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100 करोड़ थी सैलरी, Elon Musk ने इस भारतीय को नौकरी से निकाला, अब किया ये कमाल

पराग अग्रवाल IIT ग्रेजुएट हैं, जो एक भारतीय मूल के हैं. ट्विटर के सीईओ के तौर पर पराग अग्रवाल काफी पॉपुलर हुए थे. ट्विटर में सीईओ के पद पर कार्य करते हुए पराग अग्रवाल की सैलरी का पैकेज 100 करोड़ रुपये थी.

पराग अग्रवाल पराग अग्रवाल
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 15 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

भारत के लोग अमेरिका से लेकर लंदन तक कमाल कर रहे हैं. दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों की कमान भारतीयों के हाथों में ही है. कुछ साल पहले ऐसी ही एक बड़ी कंपनी की कमान एक भारतीय के हाथ में थी. उस समय उनका सैलरी पैकेज 100 करोड़ रुपये था, लेकिन एलन मस्‍क ने अपनी कंपनी से निकाल दिया. जॉब जाने के बाद भी उसने हिम्‍मत नहीं हारी और आज वह अपनी खुद की कंपनी चला रहे हैं. 

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अक्‍टूबर 2022 में दुनिया के दिग्‍गज उद्योगपति Elon Musk ने ट्विवटर को 44 अरब डॉलर में खरीदा था. एलन मस्‍क के द्वारा इसे खरीदने के बाद कई बड़े बदलाव किए गए. एलन मस्‍क ने ट्विटर का नाम बदलकर X कर दिया था. साथ ही कई कर्मचारियों को भी निकाल दिया था. इसके अलावा, उस समय के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agarwal) को भी निकाल दिया था. 

पराग अग्रवाल को एलन मस्‍क ने क्‍यों निकाला? 
पराग अग्रवाल IIT ग्रेजुएट हैं, जो एक भारतीय मूल के हैं. ट्विटर के सीईओ के तौर पर पराग अग्रवाल काफी पॉपुलर हुए थे. ट्विटर में सीईओ के पद पर कार्य करते हुए पराग अग्रवाल की सैलरी का पैकेज 100 करोड़ रुपये था. ब्लूमबर्ग के कुर्ट वैगनर की एक किताब के मुताबिक पराग ने एलन मस्क के प्राइवेट जेट की लोकेशन को ट्रैक करने वाले अकाउंट को ब्लॉक करने की रिक्वेस्ट को अस्वीकार कर दिया था. Twitter के अधिग्रहण से पहले ये घटना हुई थी, अधिग्रहण के बाद पराग अग्रवाल को एलन मस्‍क ने निकाल दिया. 

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पराग अग्रवाल को नहीं मिला था मुआवजा 
दावा किया जाता है कि निकाले जाने के बाद पराग अग्रवाल करीब 400 करोड़ रुपये पाने के हकदार थे, लेकिन उन्‍हें कोई अमाउंट नहीं दिया गया. पराग और अन्‍य पूर्व ट्विटर अधिकारियों ने मस्‍क के खिलाफ मुकदमा दायर किया. कुल मिलाकर 1000 करोड़ के मुआवजे के लिए मुकदमा दायर किया गया था. 

निकाले जाने के बाद अग्रवाल ने किया कमाल 
पराग अग्रवाल अब AI सेक्टर में उतर चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्‍हें अपने नए वेंचर के लिए ₹249 करोड़ की फंडिंग मिली है. उनका स्टार्टअप लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ काम करने वाले डेवलपर्स के लिए सॉफ्टवेयर डेवलप करने पर फोकस है, जो ओपनएआई के चैटजीपीटी के पीछे की टेक्नोलॉजी के जैसा है.

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