
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अचानक रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाने का ऐलान कर दिया. आरबीआई गवर्नर (RBI Governor) ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बेकाबू होती महंगाई (Inflation) के कारण यह फैसला लेना जरूरी हो गया था. हालांकि सेंट्रल बैंक (Central Bank) का यह फैसला उन लोगों पर बोझ बढ़ा देगा, जो कार लोन (Car Loan) या होम लोन (Home Loan) की ईएमआई (EMI) भर रहे हैं. रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक लोन (Bank Loan) का ब्याज बढ़ाएंगे, जिससे अंतत: ईएमआई बढ़ जाएगी. आइए समझें कि ब्याज दर बढ़ने से महंगाई दर को कैसे काबू किया जा सकता है...
इस कारण सेंट्रल बैंक ने कम की थी ब्याज दर
हमने आरबीआई का यह गणित समझने के लिए सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनेंस (CEPPF) के इकोनॉमिस्ट डॉ सुधांशु कुमार (Dr Sudhanshu Kumar) से बात की. डॉ सुधांशु ने बताया कि जब महामारी के कारण बाजार में डिमांड कम हो गई थी, तब सारे सेंट्रल बैंकों ने ब्याज घटाकर कैपिटल कॉस्ट (Capital Cost) कम किया, ताकि डिमांड को आर्टिफिशियली (Artificial Demand) बूस्ट किया जा सके. यह इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) को सपोर्ट करने के लिए तत्कालीन हालात में जरूरी था. अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं.
रेट बढ़ने से कंट्रोल होगी आर्टिफिशियल डिमांड
उन्होंने कहा, 'मार्च में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) 7 फीसदी पर पहुंच गई. अमेरिका (US), ब्रिटेन (UK) जैसे डेवलप्ड इकोनॉमीज भी दशकों की सबसे ज्यादा महंगाई से जूझ रहे हैं. जब महंगाई रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच जाए, तो सेंट्रल बैंक की प्रॉयरिटी इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने से ज्यादा इसे काबू करना हो जाता है. महंगाई को काबू करने के लिए अगर बाजार से लिक्विडिटी कम कर दी जाए या मॉनीटरी पॉलिसीज के जरिए आर्टिफिशियल डिमांड को कंट्रोल किया जाए, तो महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. इसी कारण अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व समेत तमाम सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. फेडरल रिजर्व आज फिर ब्याज दर बढ़ाने का ऐलान कर सकता है.'
महंगाई हुई कंट्रोल तो सबको फायदा
डॉ सुधांशु ने ये भी बताया कि किस तरह से नियंत्रित महंगाई की स्थिति सस्ते ब्याज की तुलना में आम लोगों के लिए बेहतर है. उन्होंने कहा कि होम लोन या कार लोन की ईएमआई भरने वालों का हिस्सा कुल आबादी में बहुत कम है. रिजर्व बैंक के रेट हाइक (RBI Rate Hike) से ऐसे सीमित लोगों के पॉकेट पर ही असर होगा. दूसरी ओर महंगाई एक ऐसा अदृश्य टैक्स (Invisible Tax) है, जो हर कोई भरता है. जो रिक्शा चला रहा है, वह भी महंगाई की मार झेल रहा है और जो लक्जरी जीवन जी रहा है, वह भी इसकी कीमत चुका रहा है. अब अगर आरबीआई के इस एक्शन से महंगाई नियंत्रित हो जाती है, तो लोन महंगा होने के बाद भी बड़ी आबादी के लिए बेहतर स्थिति ही पैदा होगी.
ब्याज दर बढ़ा रहे सारे सेंट्रल बैंक
आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी कर दिया है. रेपो रेट में अगस्त 2018 से कोई बदलाव नहीं हुआ था और नीतिगत ब्याज दरें अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बनी हुई थी. कोरोना महामारी के बाद लगभग सारी इकोनॉमीज में ब्याज दरें रिकॉर्ड लो पर लाई गई थीं. हालांकि महंगाई का प्रेशर बढ़ने के बाद तमाम सेंट्रल बैंक लोअर इंटेरेस्ट रेट के दौर से बाहर निकलने लगे हैं. फेडरल रिजर्व इसकी शुरुआत पहले ही कर चुका है. इसके बाद बैंक ऑफ जापान, बैंक ऑफ इंग्लैंड, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया समेत कई सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा चुके हैं. फेडरल रिजर्व अब दूसरी बार ब्याज दर बढ़ाने की तैयारी में है.