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दो दोस्त... 2 बेडरूम, फिर बन गई अरबों डॉलर की कंपनी Flipkart, अब को-फाउंडर ने छोड़ा साथ!

Flipkart को शुरू करने का आइडिया आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के दौरान सचिन बंसल के दिमाग में आया था और फिर 2007 में उन्होंने अपने दोस्त बिन्नी बंसल के साथ इसकी शुरुआत की थी.

फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर बिन्नी बंसल ने दिया कंपनी बोर्ड से इस्तीफा फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर बिन्नी बंसल ने दिया कंपनी बोर्ड से इस्तीफा
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 6:16 PM IST

दो दोस्तों द्वारा दो बेडरूम के फ्लैट से शुरू हुई देश की जानी-मानी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) आज इस सेक्टर की दिग्गज प्लेयर है. इस कंपनी की शुरुआत और फिर अरबों डॉलर वैल्यू की फर्म बनने की कहानी बेहद ही दिलचस्प है. अब इससे जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर बिन्नी बंसल ने कंपनी छोड़ (Binny Bansal Resigns) दी है, उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनी के साथ 16 साल का सफर खत्म करने का ऐलान किया है. 

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2007 में सचिन-बिन्नी बंसल ने शुरू की थी कंपनी
बिजनेस टुडे पर छपी ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, Flipkart को दो बेडरूम फ्लैट से निकालकर आसमान की बुलंदियों पर पहुंचाने में बिन्नी बंसल का बड़ा योगदान रहा है. दरअसल, बिन्नी बंसल और सचिन बंसल ने मिलकर साल 2007 में इसकी शुरुआत की थी. इसके बाद इन दोनों ने इस कंपनी को आगे बढ़ाते हुए साल 2018 में फ्लिपकार्ट को 20.8 अरब डॉलर की कंपनी बना दिया था. लेकिन अब बिन्नी बंसल इस कंपनी के साथ नहीं है, उन्होंने बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है. बिन्नी बंसल ने ई-कॉमर्स सेक्टर में अपने नए वेंचर का हवाला देते हुए इस हफ्ते की शुरुआत में बोर्ड को अपने इस्तीफे के बारे में बताया.

बिन्नी बोले- मजबूत हाथों में है कंपनी
रिपोर्ट के अनुसार, बिन्नी बंसल ने ओपडूर (OppDoor) नाम से एक नया ई-कॉमर्स स्टार्टअप शुरू किया है. कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ये पूरी तरह से प्रबंधित Amazon सर्विसेज मुहैया करता है जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कई सेक्टर्स में निजी लेबल ब्रांडों का विस्तार करना है. ये प्लेटफॉर्म शुरुआत में अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, यूके, जर्मनी, सिंगापुर, जापान और ऑस्ट्रेलिया में ई-कॉमर्स कंपनियों पर फोकस करेगा. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, Flipkart से इस्तीफा देने को लेकर बिन्नी बंसल ने कहा कि मुझे पिछले 16 सालों में फ्लिपकार्ट ग्रुप की उपलब्धियों पर गर्व है. फ्लिपकार्ट एक मजबूत स्थिति में है. मुझे यह पता है कि कंपनी एक मजबूत हाथों में है. इस विश्वास के साथ मैंने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है.

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ऐसे आया था Flipkart का आइडिया 
फ्लिपकार्ट की शुरुआत के बारे में बात करें तो आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सचिन बंसल के दिमाग में ये आइडिया आया था और उन्होंने इसे अपने दोस्त बिन्नी बंसल के साथ शेयर किया. इसके बाद दोनों कुछ नया और अलग करने के लिए मार्केट में कूद गए. बिन्नी उस समय अमेजन के लिए काम कर रहे थे, लेकिन 2007 में दोनों ने साथ मिलकर ऑनलाइन बुक शॉप फ्लिपकार्ट की शुरुआत और अपने फ्लैट से बिजेनस को ऑपरेट करना शुरू किया. इस बीच दोनों के मन में  पहली बार एक अमेजन जैसा प्लेटफॉर्म बनाने का ख्याल आया, उस समय भारत में बहुत अधिक ई-कॉमर्स एक्टिविटीज नहीं थीं. बिन्नी ने मौका भांपा, रिस्क लिया और फ्लिपकार्ट ऑनलाइन रिटेल की नींव रख दी. 

ऐसे बढ़ता गया ई-कॉमर्स कंपनी का बिजनेस
किताबें बेचने से हुई शुरुआत धीमे-धीमे म्यूजिक, फिल्म, गेम और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बेचने तक पहुंच गई. भारत में अपना विस्तार करने के बाद साल 2011 में फ्लिपकार्ट ने सिंगापुर में एंट्री ली, इस कदम ने विदेशी इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने का काम किया. शुरुआती 9 साल तक सचिन बंसल कंपनी के सीईओ थे, लेकिन 2016 में बिन्नी ने सीईओ का कार्यभार संभाला और सचिन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बन गए. फ्लिपकार्ट ने अपने फ्लेटफॉर्म पर आने वाले ग्राहकों को कैश ऑन डिलिवरी का ऑप्शन दिया, जिसने इसके ग्राहक आधार में तेज इजाफा किया. इसके अलावा कंपनी ने EMI, एक्सचेंज ऑफर जैसे ऑप्शन देकर ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा. 

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2018 में वॉलमार्ट ने खरीदी थी हिस्सेदारी 
साल 2018 में वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट का 16 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण कर लिया. तब इसे दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन ई-कॉमर्स अधिग्रहण कहा गया था. सचिन बंसल ने अपनी माइनॉरिटी स्टेक एक बिलियन डॉलर में बेची थी. वहीं इस अधिग्रहण के बाद बिन्नी बंसल ने सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया था. अब उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनी के बोर्ड से भी बाहर निकलने का ऐलान कर दिया है. 

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