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18 मई को हुई थी डील, अब अडानी ग्रीन एनर्जी ने इस कंपनी पर किया कब्जा!

इस लेन-देन के साथ एसबी एनर्जी इंडिया का उद्यम मूल्यांकन 3.5 अरब डॉलर (लगभग 26,000 करोड़ रुपये) हो गया है और यह भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा अधिग्रहण है.

मई में हुई थी डील मई में हुई थी डील
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST
  • 26,000 करोड़ रुपये में एसबी एनर्जी इंडिया का अधिग्रहण
  • दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा डेवलपर एजीईएल

अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने सोमवार को कहा कि उसने 3.5 अरब डॉलर (26,000 करोड़ रुपये) में एसबी एनर्जी इंडिया का अधिग्रहण पूरा कर लिया है. कंपनी ने कहा, 'दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा डेवलपर एजीईएल ने एसबी एनर्जी होल्डिंग्स लिमिटेड (एसबी एनर्जी इंडिया) के अधिग्रहण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके लिए 18 मई, 2021 को निर्णायक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे.'

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पीटीआई के मुताबिक इस सौदे के साथ, एसबी एनर्जी इंडिया अब AGEL की 100 प्रतिशत स्वामित्व वाली अनुषंगी बन गई है. इससे पहले, यह जापान की सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प और भारती समूह के बीच 80:20 (क्रमश: 80 प्रतिशत और 20 प्रतिशत का सह स्वामित्व) का संयुक्त उद्यम थी.

इस लेन-देन के साथ एसबी एनर्जी इंडिया का उद्यम मूल्यांकन 3.5 अरब डॉलर (लगभग 26,000 करोड़ रुपये) हो गया है और यह भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा अधिग्रहण है.

पिछले हफ्ते अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने घोषणा की थी कि समूह अगले 10 वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करेगा. AGEL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) विनीत एस जैन ने बयान में कहा कि इस लेनदेन की मदद से एजीईएल नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक अगुआ बनने के करीब पहुंच गया है.

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उन्होंने कहा, 'एसबी एनर्जी इंडिया की इन उच्च-गुणवत्ता वाली बड़ी उपयोगिता-पैमाने की संपत्तियों को अपने साथ जोड़ने से अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्बन न्यूट्रल भविष्य की ओर बढ़ने के भारत के प्रयासों में तेजी लाने के इरादे को पता चलता है. हमारी नवीकरणीय ऊर्जा की बुनियाद नए उद्योगों के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करेगी जिससे कई क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा सकती है.'

एसबी एनर्जी इंडिया के पास अपने विशेष प्रयोजन इकाइयों (एसपीवी) के माध्यम से भारत के चार राज्यों में पांच गीगावॉट क्षमता की नवीकरणीय संपत्तियां हैं.


 

 

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