
बजट एयरलाइंस गो फर्स्ट (Go First) के विमान अब आसमान पर कब दिखेंगे, ये कहना जरा मुश्किल सा हो गया है. कंपनी की ओर से उड़ाने रद्द करने का सिलसिला लगातार जारी है और इसकी तारीख को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है. अब कंपनी की सभी फ्लाइट्स 28 मई 2023 तक रद्द कर दी गई हैं, इसके साथ ही टिकटों की बिक्री पर भी रोक बनी रहेगी. बीते 3 मई से एयरलाइन की उड़ानें रद्द हैं और इसकी तारीख लगातार बढ़ती जा रही है.
एयरलाइंस लगातार बढ़ा रही तारीख
आजतक के सहयोगी चैनल इंडिया टुडे के मुताबिक, गो-फर्स्ट एयरलाइंस ने पहले 26 मई तक के लिए अपनी सभी उड़ानों को रद्द किया था और अब इसे 28 मई तक बढ़ा दिया गया है. एनसीएलटी में कंपनी की ओर से वित्तीय स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए दिवालिया घोषित किए जाने के लिए आवेदन दिया गया है. एयरलाइन ने अपनी याचिका में कहा था कि वह भारी नकदी संकट का सामना कर रही है. इसके बाद विमानन नियामक (DGCA) ने एयरलाइंस को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.
3 मई से रद्द हैं सभी उड़ानें
खुद से दिवाला कार्यवाही के लिए NCLT में आवेदन देने वाली गो फर्स्ट एयलाइंस ने सबसे पहले 3 से 5 मई तक के लिए अपनी सभी उड़ानों को रद्द किया था. फिर इस तारीख को 9 मई तक के लिए और इसके बाद 12 मई तक आगे बढ़ाया गया था. उम्मीद जताई जा रही थी, कंपनी के विमान फिर से आसमान में उड़ान भरेंगे, लेकिन फ्लाइट सस्पेंड रहने की तारीख को इसके बाद भी आगे बढ़ाए जाने का सिलसिला जारी रहा और अब इसे 26 मई से आगे बढ़ाकर 28 मई कर दिया गया है.
CEO ने दिलाया सैलरी का भरोसा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Go First CEO कौशिक खोना ने एयरलाइंस के कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि उनके अप्रैल महीने के वेतन को उड़ानें फिर से शुरू करने से पहले क्रेडिट कर दिया जाएगा. वहीं पीटीआई के मुताबिक, DGCA ने कंपनी को अपना रिवाइवल प्लान 30 दिन के अंदर जमा करने का निर्देश दिया है. इसके साथ नियामक ने एयरलाइंस से उड़ान भरने योग्य विमानों, पायलट और कर्मचारियों, मेंटीनेंस और फंड समेत अन्य बातों की पूरी जानकारी देने के लिए कहा है.
गो-फर्स्ट संकट के 5 बड़े कारण
पहला : NCLT में दायर याचिका में बताया गया है कि कंपनी पर 6,527 करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है.
दूसरा : कंपनी को इंजन मुहैया कराने वाली अमेरिकी कंपनी Pratt & Whitney सप्लाई बंद कर चुकी है.
तीसरा : गो-फर्स्ट के विमान ग्राउंडेड होने के चलते कंपनी के सामने भयंकर नकदी संकट खड़ा हो गया है.
चौथा : एयरलाइंस की बाजार हिस्सेदारी घटी है. मई 2022 में 11.1% से घटकर ये अब 6% के करीब रह गई है.
पांचवां : नियामकीय फाइलिंग की मानें तो गो-फर्स्ट ने FY23 में 218 मिलियन डॉलर का शुद्ध घाटा दर्ज किया. जो पिछले साल के 105 मिलियन डॉलर से लगभग दोगुना है.
2022 से संकटग्रस्त है एयरलाइंस
बीते साल 2022 में कंपनी को पहली बार संकट का सामना करना पड़ा था. जुलाई 2022 में उसे अपना विमान ग्राउंडेड करना पड़ा था. तब से लेकर अब तक लगातार इसकी बाजार हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिल रही है. एक ओर जहां मई 2022 में एयरलाइन ने 1.27 मिलियन यात्रियों हवाई सफर कराया था जब उसकी हिस्सेदारी 11.1 फीसदी थी. वहीं फरवरी 2023 में यात्रियों की संख्या कम होकर 9,63,000 रह गई और हिस्सेदारी भी इसी क्रम में घटकर 8 फीसदी रह गई, जो अब और भी कम करीब 6.9 फीसदी रह गई है. इसका असर एयरलाइंस की फाइनेंशियल हेल्थ पर भी पड़ा.
287 साल पुराना है वाडिया ग्रुप
Go First एयरलाइंस को वाडिया ग्रुप संचालित करता है और ये समूह आजादी के पहले बहुत पहले का है. इसका 287 साल का इतिहास है और ऐसा पहली बार है जबकि इस ग्रुप की कोई कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंची है. वाडिया ग्रुप एयरलाइन, एफएमसीजी, रियल एस्टेट, क्लोथ, कैमिकल और खाद्य प्रसंस्करण सहित तमाम सेक्टर्स में उपस्थिति के साथ भारत के सबसे पुराने कारोबारी समूहों में से एक है. यहां बात करें विमानन क्षेत्र में इसकी भागीदारी की, तो बता दें ग्रुप ने इस सेक्टर में साल 2005 में बिना किसी विस्तृत योजना के एंट्री मारी थी.