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शिपिंग कॉरपोरेशन के निजीकरण पर सरकार ने बढ़ाया कदम, ग्लोबल EOI आमंत्रित

अभिरुचि पत्र (EOI) दाखिल करने के लिए अंतिम तिथि 13 फरवरी तक है. निवेशक कंपनी अकेले या कई कंपनियों के कंसोर्टियम के रूप में बोली लगा सकती है. मौजूदा शेयर कीमतों के आधार पर SCIL का बाजार मूल्य करीब 4,000 करोड़ रुपये होता है.

SCI का निजीकरण करने की ओर बढ़ा कदम SCI का निजीकरण करने की ओर बढ़ा कदम
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 22 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST
  • शिपिंग कॉरपोरेशन का निजीकरण कर रही सरकार
  • इसके ​लिए ग्लोबल स्तर पर EOI आमंत्रित
  • अपना पूरा 63.75% हिस्सा बेचेगी सरकार

सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCIL) लिमिटेड की 63.75 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार ने ग्लोबल अभिरुचि पत्र (EOI) आमंत्रित किया है. इस ​बिक्री के तहत (SCIL) के प्रबंधन पर नियंत्रण भी हिस्सेदारी लेने वाली कंपनी को मिलेगा.

इसका मतलब यह है कि SCIL का सिर्फ विनिवेश नहीं बल्कि इसका निजीकरण किया जाएगा. कोरोना संकट की वजह से कंपनी के निजी हाथों को सौंपने के सरकार के प्रयास में देरी हुई है. 

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मंगलवार को एक बयान में वित्त मंत्रालय ने बताया कि अभिरुचि पत्र दाखिल करने के लिए अंतिम तिथि 13 फरवरी तक है. निवेशक कंपनी अकेले या कई कंपनियों के कंसोर्टियम के रूप में बोली लगा सकती है. मौजूदा शेयर कीमतों के आधार पर (SCIL का बाजार मूल्य करीब 4,000 करोड़ रुपये होता है. मंगलवार को इसके शेयर 3 फीसदी मजबूत होकर 85 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे थे. 

पिछले साल मिली थी मंजूरी

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में ही आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडिलीय समिति ने शिपिंग कॉरपोरेशन को बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. लेकिन कोरोना संकट की वजह से इसे बेचने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पायी. 

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कंपनी ने शानदार कमाई की

यह सरकारी कंपनी भी कोरोना संकट में जबर्दस्त मुनाफे में रही थी.कोरोना संकट के दौरान देश में आर्थिक गतिविधियां थम गई थीं, लेकिन उस दौरान इस कंपनी ने शानदार कमाई की. वित्त-वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में SCI को रिकॉर्ड 317 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. जो कि पिछले 54 तिमाही (करीब साढ़े 13 साल) के मुकाबले सबसे ज्यादा था. जबकि मौजूदा वित्त-वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी को 141.89 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ.

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SCI की स्थापना 1961 में

भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (SCI) की स्थापना 2 अक्टूबर 1961 को हुई थी. 18 सितंबर 1992 को कंपनी का दर्जा 'प्राइवेट लिमिटेड' से बदलकर 'पब्‍लिक लिमिटेड' कर दिया गया. कंपनी को भारत सरकार ने 24 फरवरी 2000 को 'मिनी रत्‍न' का खिताब दिया था.

केवल 19 जहाजों को लेकर एक लाइनर शिपिंग कंपनी की शुरुआत हुई थी और आज एससीआई के पास डीडब्ल्यूटी के 83 से ज्यादा जहाज हैं. कंपनी के पास टैंकर, बल्क कैरियर, लाइनर और ऑफशोर आपूर्ति उपलब्ध है.

 

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