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SEBI चेयरपर्सन माधबी बुच को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. पिछले संसद सत्र के दौरान इनका नाम काफी चर्चा में आया था. कांग्रेस ने उन पर, उनके परिवार पर और भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. साथ ही आरोप था कि सेबी चेयरपर्सन माधबी बुच (SEBI Chairperson Madhabi Buch) अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रही हैं. हालांकि इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं.
जानकारी के मुताबिक माधबी बुच अपना बचा हुआ कार्यकाल पूरा करेंगी. वो मार्च तक SEBI प्रमुख के पद पर बनी रहेंगीं.
क्या लगे थे गंभीर आरोप
आरोप 1
आरोप 2
सेबी चेयरपर्सन पर दूसरा गंभरी आरोप लगा था कि उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल से मिले पैसे का खुलासा नहीं किया, ICICI में अपने पिछले कार्यकाल से उन्हें जो पैसा मिला, उसका खुलासा नहीं किया गया. सरकार ने इन आरोपों की जांच की है और कोई भी लेनदेन अवैध नहीं मिला, उन्होंने अपना सारा बकाया चुका दिया है.
ICICI बैंक ने स्पष्ट किया कि अक्टूबर 2013 में रिटायरमेंट के बाद उन्हें कोई वेतन या ESOP नहीं दिया गया, उन्हें केवल रिटायरमेंट प्रॉफिट दिया गया, जैसा कि उस पद पर अन्य सभी को दिया जाता है. बुच ने प्राइवेट सेक्टर के कर्जदाता के साथ 12 सालों तक काम किया और बाद में 2011 में समूह छोड़ने से पहले 2 वर्षों तक ICICI सिक्योरिटीज के CEO के रूप में कार्य किया. सिर्फ बुच को ही ICICI से रिटायर्ड होने के बाद राशि का भुगतान नहीं किया गया, बल्कि सभी शीर्ष बैंकों के शीर्ष प्रबंधकों को सेवानिवृत्ति लाभ दिया जाता है. यह सिर्फ एक व्यक्ति को कुछ गलत दिए जाने का मामला नहीं था.
आरोप 3
सेबी में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा वित्त मंत्रालय को भेजे गए पत्रों ने बुच के लिए एक और मोर्चा खोला था. इस कारण न केवल बाजार नियामक के भीतर, बल्कि राजनीतिक महकमे में रोष पैदा कर दिया था. वित्त मंत्रालय से कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि इनके लीडरशिप में वर्क कल्चर बेकार है. सरकार ने इस पर गौर किया और कर्मचारियों से बात की. कर्मचारियों का आरोप था कि वे उनपर चिल्लाती हैं.
सरकार का मानना है कि सेबी की अध्यक्ष के रूप में माधबी पुरी बुच ने सिस्टम को साफ करने के लिए काफी प्रयास किए हैं और कई लोग इस सिस्टम को साफ करने से खुश नहीं हैं. सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि माधबी पुरी बुच अपना कार्यकाल पूरा करेंगी जो 28 फरवरी, 2025 को समाप्त होगा.