
वस्तु एवं सेवा कर (GST) बकाये का मामला उलझता ही जा रहा है. कई राज्य केंद्र सरकार द्वारा दिए गए विकल्प को मानने को तैयार नहीं हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर मांग की है कि केंद्र सरकार खुद उधार लेकर राज्यों को जीएसटी बकाया दे.
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह भी याद दिलाया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान नरेंद्र मोदी ने भी जीएसटी लागू करने का विरोध किया था. उन्होंने लिखा है, 'मुझे पूरा भरोसा है कि राज्य ऐसे समाधान के लिए सहयोग करेंगे कि सेस संग्रह को पांच साल के बाद तब तक जारी रखा जाए, जब तक केंद्र सरकार इस कर्ज का ब्याज सहित पूरा भुगतान नहीं कर देती.'
अब तक 4 सीएम ने लिखे पीएम को लेटर
गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ममता बनर्जी से पहले तीन अन्य राज्यों के मख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री को लेटर लिखकर यह मांग की है कि केंद्र सरकार खुद उधार लेकर राज्यों को जीएसटी का बकाया दे. तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, तमिलनाडु के सीएम ई के पलानीस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा है. इनके अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेटर लिखा है.
अरुण जेटली ने क्या कहा था
ममता बनर्जी ने कहा है, 'स्वर्गीय श्री अरुण जेटली ने दिसंबर 2013 में सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया था कि बीजेपी इस एकमात्र वजह से जीएसटी लागू करने का विरोध कर रही है, क्योंकि उसे यह भरोसा नहीं है कि केंद्र सरकार राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई का वादा पूरा करेगी!'
क्या है मामला
गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 41वीं बैठक 27 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में हुई थी. वित्त मंत्री ने बताया कि राज्यों को उनके जीएसटी बकाये के भुगतान के लिए 2 विकल्प दिए गए हैं. विकल्प 1: रिजर्व बैंक की सलाह से राज्यों को एक विशेष विंडो दिया जाए ताकि वे वाजिब ब्याज दर पर 97,000 करोड़ रुपये रकम उधार हासिल कर पायें. विकल्प 2: राज्य एक विशेष विंडो के द्वारा समूचे जीएसटी कम्पेनसेशन की कमी के बराबर यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये का उधार ले सकें.
इन दोनों विकल्पों पर राज्यों को 7 दिन के भीतर अपनी राय देने को कहा गया. लेकिन केरल और पंजाब सहित सात गैर बीजेपी शासित राज्यों ने इस मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिए गए विकल्पों को मानने से इनकार कर दिया है. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी केंद्र सरकार के विकल्पों को ठुकरा दिया है.