
खिलौनों के ग्लोबल मार्केट (Global Toy Market) में भारत की दखल हाल के कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है. कभी बच्चों के खिलौने के लिए चीन के आयात (Chinese Toy Import) पर निर्भर भारत अब बड़े पैमाने पर इनका निर्यात करने लगा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार खिलौनों के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस (76th Independence Day) के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए खिलौना उद्योग का भी जिक्र किया. आइए आंकड़ों से जानते हैं कि खिलौनों के बाजार में भारत की हैसियत कितनी सुधरी है और अभी इसमें ग्रोथ की कितनी गुंजाइश बाकी है...
आयात में आई कमी, तेजी से बढ़ा निर्यात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ साल के दौरान खिलौनों के मामले में आयात पर भारत की निर्भरता तेजी से कम हुई है. जहां भारत ने फाइनेंशियल ईयर 2018-19 (FY19) के दौरान 304 मिलियन डॉलर के खिलौनों का आयात (India's Toy Import) किया था, वहीं यह अगले तीन साल में यानी फाइनेंशियल ईयर 2021-22 (FY22) मे कम होकर 36 मिलियन डॉलर पर आ गया. इसका मतलब हुआ कि बीते तीन साल के दौरान भारत का खिलौना आयात 88 फीसदी से ज्यादा कम हुआ है. निर्यात (India's Toy Export) की बात करें तो इस मोर्चे पर भी भारत ने बेहतर किया है. 2018-19 में भारत ने 109 मिलियन डॉलर के खिलौनों का निर्यात किया था, जो बढ़कर 2021-22 में 177 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया. यानी बीते तीन साल के दौरान भारत का खिलौना निर्यात 62 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है.
प्रधानमंत्री ने लाल किले से कही ये बात
भारतीय खिलौना उद्योग (Indian Toy Industry) का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आज अपने संबोधन में कहा कि आयात को और कम करने की जरूरत है. इसके साथ-साथ मेड-इन-इंडिया उत्पादों (Made-In-India Toys) को बढ़ावा देना भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि अब छोटे बच्चे भी भारत में बने सामानों का महत्व समझ रहे हैं और आयातित खिलौनों के साथ खेलने से मना कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा, 'मैंने सुना है कि अब 5-7 साल के बच्चे भी विदेशी खिलौनों के साथ खेलने से मना कर रहे हैं. जब पांच साल के बच्चे विदेशी खिलौनों के साथ नहीं खेलने का प्रण ठान लें तो इसमें आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की झलक दिखती है.' प्रधानमंत्री ने कहा कि अब विदेशी कंपनियां भारत आ रही हैं, सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजनाओं (PLI Schemes) का लाभ उठा रही हैं और अपने साथ टेक्नोलॉजी लेकर आ रही हैं.
बढ़ रही ऐसे खिलौनों की डिमांड
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के नाम प्रधानमंत्री के संबोधन में खिलौनों का जिक्र अनायास नहीं है. आयातित खिलौनों पर शुल्क बढ़ाने और खिलौनों के आयात के लिए बीआईएस स्टैंडर्ड (BIS Standard) को अनिवार्य बनाने जैसे सरकारी फैसलों ने घरेलू खिलौना उद्योग को जरूरी समर्थन प्रदान किया है. यह बात खिलौनों के आयात व निर्यात के आंकड़ों से भी पता चलती है. खिलौना उद्योग के ट्रेंड को देखें तो सरकारी नीतियों के चलते घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहन मिल रहा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक हालिया रिपोर्ट में खिलौना उद्योग के जानकारों के हवाले से बताया गया है कि अब पारंपरिक पौराणिक कहानियों, देसी सिनेमा के कैरेक्टर्स और छोटा भीम जैसे इंडियन सुपरहीरोज पर बने खिलौनों की मांग बढ़ रही है. इससे भारतीय खिलौना बाजार में चीन व अन्य देशों का वर्चस्व कम हो रहा है.
खिलौनों के खेल में उतरने लगे बड़े कॉरपोरेट
खिलौनों के घरेलू बाजार में पिछले कुछ सालों के दौरान भारत में बने उत्पादों का दबदबा बढ़ा है. अब भारतीय कंपनियां घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों की जरूरतें पूरा करने पर ध्यान दे रही हैं. हालात इस कदर बदले हैं कि अभी तक असंगठित रहे खिलौना बाजार में बड़े कॉरपोरेट भी कदम रखने लगे हैं. देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने हाल ही में खिलौना बाजार में दखल बढ़ाने के लिए कुछ अहम सौदों को अंजाम दिया है. मुकेश अंबानी की कंपनी ने इसी साल इटली की खिलौना कंपनी प्लास्टिक लेग्नो (Plastic Legno) के साथ एक डील की है. इस डील के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज ने प्लास्टिक लेग्नो के भारतीय कारोबार की 40 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास पहले से ही ब्रिटिश खिलौना ब्रांड हैमलेज (Hamleys) और रोवन (Rowan) का मालिकाना हक है. रिलायंस जैसी कंपनियों के खिलौना उद्योग में उतरने से इस सेक्टर की संभावनाओं का पता चलता है.
अभी ग्लोबल ट्रेड में भारत का हिस्सा नगण्य
उद्योग संगठन फिक्की (Ficci) और केपीएमजी (KPMG) की एक संयुक्त रिपोर्ट 'India's toy story- Unboxing fun and beyond' के अनुसार, भारतीय खिलौना बाजार का आकार 2019-20 में करीब 01 बिलियन डॉलर का था. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024-25 तक इसका साइज दोगुना होकर 02 बिलियन डॉलर पर पहुंच जाने की संभावनाएं हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में खिलौनों का टोटल ग्लोबल ट्रेड (Global Toy Trade) 93 बिलियन डॉलर का रहा था. इसमें भारत की हिस्सेदारी लगभग नगण्य थी. साल 2020 में खिलौनों के आयात में भारत का हिस्सा महज 0.4 फीसदी और निर्यात में हिस्सेदारी महज 0.2 फीसदी थी. यह हाल तब है, जबकि भारत 0-14 साल की उम्र सीमा की आबादी में सबसे ज्यादा हिस्सा रखता है. खिलौनों के व्यापार में भारत की स्थिति की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में भारत खिलौनों का 29वां सबसे बड़ा निर्यातक और 44वां सबसे बड़ा आयातक देश था.
भारत की उम्मीद जगाने वाले ये आंकड़े
केपीएमजी और फिक्की की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में अमेरिका ने अकेले 27 बिलियन डॉलर के खिलौनों का आयात किया था. उसके बाद जर्मनी ने 6.5 बिलियन डॉलर, ब्रिटेन ने 5.2 बिलियन डॉलर, जापान ने 4 बिलियन डॉलर और फ्रांस ने 3.8 बिलियन डॉलर के खिलौनों का आयात किया था. निर्यात के मामले में चीन अकेले 63 फीसदी बाजार पर काबिज है. साल 2020 के दौरान चीन ने 57.8 बिलियन डॉलर के खिलौनों का निर्यात किया था. उसके बाद जर्मनी ने 4.4 बिलियन डॉलर, चेक गणराज्य ने 3.8 बिलियन डॉलर, अमेरिका ने 3.4 बिलियन डॉलर और जापान ने 3.3 बिलियन डॉलर के खिलौनों का निर्यात किया था. हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को देखें तो इनके कारण भी भारत के लिए परिस्थितियां अनुकूल हुई हैं. चीन और अमेरिका के संबंधों में फिर से तनाव हावी हो चला है. दुनिया के पांचों सबसे बड़े आयातक देशों के साथ चीन के संबंध ठीक नहीं हैं. भारत के समक्ष बदले हालात का फायदा उठाकर खिलौनों के वैश्विक बाजार में दखल बढ़ाने का सुनहरा मौका है. संभवत: यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ ही भारत में बने खिलौनों के निर्यात को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं.