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HDFC बैंक में क्या-क्या बदला? नंबर- 2 पर कब्ज़ा, होम लोन से लेकर अकाउंट पर ये असर

HDFC Bank-HDFC Merger : आज से प्रभावी हुए विलय के बाद एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद देश की दूसरे सबसे मूल्यवान फर्म बन गया है. इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 14.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है और इसने वैल्यू के मामले में TCS को पीछे छोड़ दिया है.

1 जुलाई 2023 से एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड का विलय प्रभावी 1 जुलाई 2023 से एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड का विलय प्रभावी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

आज 1 जुलाई 2023 से HDFC Bank और HDFC Ltd का विलय हो गया है. इसके साथ ही अब एचडीएफसी बैंक दुनिया का चौथा सबसे वैल्यूएबल बैंक बन गया है. शुक्रवार 30 जून को हुई बोर्ड की बैठक में इस मर्जर को अंतिम मुहर लगा दी गई थी. एचडीएफसी लिमिटेड के शेयरों की डिलिस्टिंग के लिए 13 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई है. विलय के बाद मैनेजमेंट से लेकर वैल्यूएशन में कई बड़े बदलाव दिखेंगे. बता दें बोर्ड बैठक के बाद HDFC Group के चेयरमैन दीपक पारेख ने भी शेयरहोल्डर्स को एक पत्र लिखते हुए इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद शशि जगदीशन के ऊपर अब उनकी विरासत को आगे बढाने की जिम्मेदारी आ गई है.  

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दुनिया का चौथा सबसे मूल्यवान बैंक HDFC
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड के विलय के बाद अब HDFC Bank की वैल्यूएशन में जोरदार इजाफा हुआ है. वैल्यूएशन के मामले में ये HSBC और City Group से भी आगे निकलते हुए दुनिया का चौथा सबसे मूल्यवान बैंक बन गया है. इससे ऊपर जेपी मोर्गन, इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना, बैंक ऑफ अमेरिका कॉर्प  का नाम आता है. 

देश की दूसरी सबसे बड़ी फर्म
HDFC Bank-HDFC Ltd के मर्जर के बाद जहां यह बैंक दुनिया में चौथे स्थान पर आ गया है, तो वहीं देश में दूसरी सबसे मूल्यवान फर्म बन गया है. दरअसल, अब एचडीएफसी बैंक ने मार्केट कैप के लिहाज से आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को भी पीछे छोड़ दिया है और दूसरे पायदान पर पहुंच गया है. इस मामले में देश की सबसे वैल्यूएबल फर्म मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज है.

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शुक्रवार के आंकड़ों के मुताबिक, जहां Reliance Industries का मार्केट कैपिटलाइजेशन 17.3 लाख करोड़ रुपये था, वहीं एचडीएफसी बैंक-एचडीएफसी लिमिटेड का कंबाइड मार्केट कैप उछलकर 14.7 लाख करोड़ रुपये हो गया है, हालांकि, दोनों संस्थाओं का अंतिम मार्केट कैपिटलाइजेशन 17 जुलाई के आस-पास तय किया जाएगा. इस बीच तीसरे पायदान पर पहुंची टीसीएस का MCap 12 लाख करोड़ रुपये है. 

13 जुलाई से डिलिस्टिंग प्रभावी, ऐसे बटेंगे शेयर
मर्जर लागू होने के साथ ही अब 13 जुलाई 2023 से एचडीएफसी के शेयर Stock Market से डीलिस्ट कर दिए जाएंगे. यानी आप इन्हें खरीद या बेच नहीं सकेंगे. इन शेयरों की ट्रेडिंग क्लोज कर दी जाएगी. अब HDFC Bank में 100 फीसदी हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों की होगी और एचडीएफसी के मौजूदा शेयरधारकों के पास बैंक की 41 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी. HDFC Limited के हर एक शेयरधारक को उनके प्रत्येक 25 शेयर के लिए एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर दिए जाएंगे.

ग्राहकों और कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
विलय के बाद अब बैंक के पास लगभग 12 करोड़ ग्राहक हो जाएंगे, जबकि नए HDFC Bank के कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 1,73,222 होगी. अब सवाल ये कि मर्जर के बाद ग्राहकों, उन्हें मिलने वाली सेवाओं और दोनों कंपनियों के कर्मचारियों पर क्या असर दिखेगा. तो बता दें इस मर्जर की तारीख का ऐलान करने के दौरान ही HDFC Group के पूर्व चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा था कि विलय के बाद बनने वाली नई इकाई में दोनों कंपनियों के किसी भी कर्मचारी का वेतन कतई कम नहीं किया जाएगा. इसके अलावा 60 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक कर्मचारी को शामिल किया जाएगा. उन्होंने कहा था कि HDFC Bank को हमारे लोगों की जरूरत होगी.

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HDFC Bank के ग्राहकों की बात करें अकाउंट होल्डर्स के वर्तमान में दी जाने वाली सभी सुविधाएं निरंतर जारी रहेंगी. इनमें कोई चेंज नहीं किया जाएगा. बैंक से पर्सनल लोन लेने ग्राहकों से लेकर अन्य अकाउंट होल्डर्स को पुरानी सभी सेवाएं जारी रहेंगी. बैंक के सभी ब्रांच में HDFC लिमिटेड की सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी. यानी अगर आपने एचडीएफसी से होम लोन (HDFC Home Loan) लिया है, तो आप अब एचडीएफसी बैंक के ग्राहक बन जाएंगे. लोन लेने वाले ग्राहक मौजूदा Home Loan के नियम और शर्तों के आधार पर पहले की तरह ही अपनी EMI को चुकाते रहेंगे.

पारेख की विरासत आगे बढ़ाएंगे जगदीशन
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक,दीपक पारेख के पद छोड़ने के बाद HDFC Group के नए लीडर शशि जगदीशन (Sashi Jagdishan) उनकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे. एचडीएफसी की स्थापना दिवंगत हसमुखभाई या एच टी पारेख द्वारा की गई थी. उन्होंने 1970 के दशक के अंत में भारत की पहली रिटेल हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की स्थापना की थी.

अपने चाचा के कहने पर दीपक पारेख ने 1978 में एचडीएफसी ग्रुप में शामिल होने के लिए Chase Manhattan में अपनी आरामदायक नौकरी छोड़ दी थी. इसके बाद उन्होंने चार दशक से ज्यादा समय तक समूह का मार्गदर्शन किया और उसे नए मुकाम तक पहुंचाया. उनके पद छोड़ने के बाद कमान अगली पीढ़ी को सौंप दी गई है और HDFC Bank के एमडी और CEO शशि जगदीशन की बारी है कि वे अपना रास्ता खुद बनाएं और एचडीएफसी समूह की विरासत पर एक स्थायी छाप छोड़ें.

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