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महंगा हुआ HDFC का Home Loan, दिखने लगा RBI के रेपो रेट बढ़ाने का असर

भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट (RBI Repo Rate) में बढ़ोतरी का असर बाजार पर तत्काल दिखने लगा है. HDFC ने अपने होम लोन की ब्याज दरों को बढ़ा दिया है.

महंगा हुआ HDFC का  Home Loan (Photo : Getty) महंगा हुआ HDFC का Home Loan (Photo : Getty)
आशुतोष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2022,
  • अपडेटेड 10:10 PM IST
  • RBI ने 0.40% बढ़ाया रेपो रेट
  • महंगाई पर नियंत्रण के लिए बढ़ी दरें

आरबीआई के रेपो रेट (RBI Repo Rate) में बढ़ोतरी करने के कुछ ही घंटो बाद HDFC का Home Loan महंगा हो गया है. प्राइवेट सेक्टर के इस सबसे बड़े बैंक के होम लोन पर बढ़ी ब्याज दरें 1 मई से लागू हो गई हैं. 

HDFC ने 0.05% बढ़ायी ब्याज दर

एचडीएफसी ने अपने रिटेल प्राइम लेंडिंग रेट (RPLR) में 0.05% की बढ़ोतरी की है. ये नई दरें 1 मई 2022 से मान्य हैं. बैंक ने साफ किया है कि एडजस्टेबल रेट होम लोन (ARHL) स्कीम के तहत होम लोन के लिए आवेदन करने वाले ग्राहकों के लिए नई ब्याज दर 0.05% बढ़ जाएगी और ये उनके ब्याज की रीसेट डेट से ही लागू होगी.

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RBI ने 0.40% बढ़ाया रेपो रेट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)ने महीनों से ऐतिहासिक निचले यानी 4% पर बनी हुई रेपो दरें बुधवार को बढ़ा दीं. इनमें 0.40% की बढ़ोतरी की गई. इससे तय हो गया कि होम लोन और कार लोन पर ब्याज दरें महंगी होंगी. नई रेपो दर 4.40% हो गई है.

महंगाई कंट्रोल करने के लिए बढ़ाया रेपो रेट

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikant Das) ने बुधवार को अचानक प्रेस कांफ्रेंस की. गवर्नर दास ने कांफ्रेंस में बताया कि रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाने का निर्णय किया गया है. उन्होंने बताया कि सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने इकोनॉमी के हालात पर चर्चा करने के लिए बैठक की. इस बैठक में एमपीसी के सदस्यों ने एकमत से रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया. एमपीसी ने यह फैसला बेकाबू होती महंगाई के कारण लिया.

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महंगा लोन कम करेगा महंगाई

लोन के महंगा होने से आने वाले दिनों में महंगाई कम होगी. इस बारे में सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनेंस (CEPPF) के इकोनॉमिस्ट डॉ सुधांशु कुमार (Dr Sudhanshu Kumar) का कहना है कि जब महामारी के कारण बाजार में डिमांड कम हो गई थी, तब सारे सेंट्रल बैंकों ने ब्याज घटाकर कैपिटल कॉस्ट (Capital Cost) कम किया, ताकि डिमांड को आर्टिफिशियली (Artificial Demand) बूस्ट किया जा सके. यह इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) को सपोर्ट करने के लिए तत्कालीन हालात में जरूरी था. अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं.

उन्होंने कहा कि महंगाई को काबू करने के लिए अगर बाजार से लिक्विडिटी कम कर दी जाए या मॉनीटरी पॉलिसीज के जरिए आर्टिफिशियल डिमांड को कंट्रोल किया जाए, तो महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिलती है. इसी कारण अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व समेत तमाम सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं.

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