
एशिया के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के छोटे भाई अनिल अंबानी (Anil Ambani) की दिवालिया कंपनी रिलायंस कैपिटल (RCap) की दूसरी नीलामी बुधवार 26 अप्रैल को आयोजित की गई. इसमें एकमात्र बोलीदाता हिंदुजा समूह (Hinduja Group) ने लेनदारों को 9,650 करोड़ रुपये की पेशकश की है. इससे पहले हुई नीलामी प्रक्रिया में टोरेंट (Torrent) ग्रुप सबसे बड़ा बोलीदाता रहा था. लेकिन कंपनी के लिए दूसरी बोली प्रक्रिया में ये ग्रुप बाहर रहा और इसे गैर कानूनी करार दिया है.
इस बाद टोरेंट ग्रुप से ज्यादा बोली लगाई
बिजनेस टुडे के मुताबिक, नीलामी में हिंदुजा ग्रुप की ओर से कथित तौर पर पहले राउंड में 9,510 करोड़ रुपये और दूसरे राउंड में 9,650 करोड़ रुपये की बोली लगाई गई है. इससे पहले अनिल अंबानी की कंपनी Reliance Capital के लिए पहली नीलामी दिसंबर 2022 में हुई थी. तब टोरेंट ग्रुप (Torrent Group) ने सबसे अधिक 8,640 करोड़ रुपये की पेशकश की थी. हालांकि, Rcap की दूसरी नीलामी प्रक्रिया से पहले Torrent और अमेरिका की इन्वेस्टमेंट फर्म ओकट्री कैपिटल (Oaktree Capital) ने शामिल होने के संकेत दिए थे, लेकिन ये दोनों ही इस बार दूर रहे.
बीते साल दूसरे नंबर पर रहा था हिंदुजा ग्रुप
बीते साल दिसंबर में आयोजित की गई पहली नीलामी में हिंदुजा समूह (Hinduja Group) 8,110 करोड़ रुपये की बोली के साथ दूसरे पायदान पर रहा था. इसके बाद में उसने नीलामी प्रक्रिया से इतर 9,000 करोड़ रुपये की रिवाइज्ड बोली पेश की थी. इसे देखते हुए लेनदारों ने दूसरी नीलामी आयोजित करने का निर्णय लिया था. हालांकि, Torrent ने हिंदुजा की संशोधित बोली और दूसरी नीलामी की वैधता को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख किया था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने अंतिम फैसले के तहत ऋणदाताओं को दूसरी नीलामी आयोजित करने की अनुमति दी है. अब इस मामले में अगली सुनवाई इसी साल अगस्त 2023 में होनी है.
भारी कर्ज में दबी है रिलायंस कैपिटल
भले ही रिलायंस कैपिटल की दूसरी नीलामी में हिंदुजा ग्रुप ने टोरेंट ग्रुप से ज्यादा बोली लगाई है. इसके बावजूद हिंदुजा की पेशकश RCap के 13,000 करोड़ रुपये के परिसमापन मूल्य (liquidation value) से अभी भी काफी कम है. गौरतलब है कि रिलायंस कैपिटल अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी है, जो 24,000 करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी नहीं कर पाई थी. इसके बाद कंपनी को ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता 2016 के तहत ऋण समाधान के लिए भेजा गया है.
नवंबर 2021 में भंग किया गया था बोर्ड
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में काम करने वाली अनिल अंबानी की रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को 29 नवंबर 2021 को बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने Bank Of Maharashtra के पूर्व कार्यकारी निदेशक नागेश्वर राव को प्रशासक नियुक्त कर दिया था. इसके अगले ही दिन केंद्रीय बैंक ने राव की मदद के लिए एक तीन सदस्यीय पैनल भी गठित कर दिया था.