Advertisement

अब SBI इकोरैप में घटा GDP ग्रोथ का अनुमान, धीरे-धीरे सुधार के संकेत

एसबीआई की इकोरैप में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021 में रियल GDP ग्रोथ में 10.9 फीसदी की गिरावट आ सकती है. खास बात यह एसबीआई के पिछले अनुमान से 4.1 फीसदी अधिक है.

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST
  • कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को उबरने में लगेगा लंबा वक्त
  • वित्त वर्ष 2021 में GDP ग्रोथ में 10.9% की गिरावट का अनुमान
  • यह SBI के पिछले अनुमान से 4.1 फीसदी अधिक है

कोरोना संकट की वजह से पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है, जो अच्छे संकेत नहीं है. अब स्टेट बैंक इंडिया (SBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट इकोरैप में धीरे-धीरे स्थिति में सुधार का अनुमान लगाया गया है.

एसबीआई की इकोरैप में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021 में रियल GDP ग्रोथ में 10.9 फीसदी की गिरावट आ सकती है. खास बात यह है कि ये एसबीआई के पिछले अनुमान से 4.1 फीसदी अधिक है. इससे पहले SBI ने अनुमान लगाया था कि रियल जीडीपी ग्रोथ में -6.8 फीसदी रह सकती है. 

Advertisement

बता दें, वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 3.1 फीसदी दर्ज की गई थी. जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 5.2 फीसदी पर था.

जीडीपी के मोर्चे पर अच्छे संकेत नहीं

रिसर्च रिपोर्ट की मानें तो वित्त वर्ष 2020-21 की चारों तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव रह सकती है. पहली तिमाही में 23.9 में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि दूसरी तिमाही में रियल जीडीपी ग्रोथ -12 से -15 फीसदी तक रह सकती है. वहीं तीसरी तिमाही में ग्रोथ -5 से -10 फीसदी तक हो सकती है. अगर आखिरी तिमाही की बात करें तो इकोरैप में रियल जीडीपी ग्रोथ -2 से -5 फीसदी तक रह सकती है. 

इन आंकड़ों को देखने से साफ जाहिर होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कोरोना संकट से उबरने में लंबा वक्त लग जाएगा. इकोरैप में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था के लिए कंस्ट्रक्शन, ट्रेड, होटल्स और एविएशन सेक्टर को फोकस करने की जरूरत है. सरकारी वित्तीय उपायों के अलावा आरबीआई को बॉन्ड जारी करके इंफ्रास्ट्रक्चर को पुश करना चाहिए.

Advertisement

क्या होती है जीडीपी
किसी देश की सीमा में एक निर्धारित समय के भीतर तैयार सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक या बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहते हैं. यह किसी देश के घरेलू उत्पादन का व्यापक मापन होता है और इससे किसी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत पता चलती है. इसकी गणना आमतौर पर सालाना होती है, लेकिन भारत में इसे हर तीन महीने यानी तिमाही भी आंका जाता है. कुछ साल पहले इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और कंप्यूटर जैसी अलग-अलग सेवाओं यानी सर्विस सेक्टर को भी जोड़ दिया गया. 


 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement