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India Today Conclave 2024: '800 रुपये में हुई थी हमारी शादी...', नारायण और सुधा मूर्ति ने सुनाया पहली मुलाकात का किस्सा

India Today Conclave 2024 : इंफोसिस को-फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 में अपनी पत्नी सुधा मूर्ति की जमकर तारीफ की और उन्हें सबसे अच्छी जीवन संगिनी बताया. दोनों ने इस दौरान एक दूसरे के लिए बॉलीवुड का गीत भी गुनगुनाया.

नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति ने बताई इंफोसिस की शुरुआत की कहानी नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति ने बताई इंफोसिस की शुरुआत की कहानी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 1:49 PM IST

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव (India Today Conclave 2024) में देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) के को-फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति (N R Narayana Murthy) और उनकी पत्नी सुधा मूर्ति (Sudha Murthy) शामिल हुईं. उन्होंने इस दौरान इंफोसिस की शुरुआत से लेकर अपनी शादी तक के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि हमारी शादी महज 800 रुपये में हो गई थी और दोनों को 400-400 रुपये मिले थे. इस दौरान सुधा मूर्ति ने नारायण मूर्ति के साथ पहली मुलाकात का जिक्र भी किया.

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नारायण मूर्ति बोले- सुधा सबसे अच्छी जीवन संगिनी
हाल ही में राज्यसभा के लिए नामित हुईं सुधा मूर्ति ने बातचीत के दौरान बताया कि हमारी मुलाकात पुणे के एक जूस कॉर्नर पर हुई थी, जब नारायण मूर्ति फ्रांस से लौटकर आए थे. उनसे मुलाकात का जिक्र करते हुए सुधा मूर्ति ने एक गाना भी गुनगुनाया, 'अभी ना जाओ छोड़कर कि...' N R Narayan Murthy ने कहा कि सुधा मूर्ति सबसे अच्छी जीवन संगिनी हैं. 

मां की सीख इंफोसिस की शुरुआत में आई काम
एन आर नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति ने कॉन्क्लेव के दौरान इंफोसिस (Infosys) की शुरुआत की कहानी के बारे में भी बताया. इंफोसिस को-फाउंडर ने हमेशा की तरह अपनी पत्नी सुधा मूर्ति को कंपनी की शुरुआत का श्रेय दिया. उन्होंने कहा कि जीवन सीखने और आगे बढ़ने का नाम है, उन दिनों में पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ ही करियर और बिजनेस में आगे बढ़ने का समय था. उन्होंने कहा कि सुधा इंफोसिस के सभी को-फाउंडर से ज्यादा जानकार और पढ़ी लिखी थीं. इसलिए हम उन्हें हमेशा इंफोसिस का श्रेय दिया जाता है.  

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गौरतलब है कि सुधा मूर्ति के दिए गए 10,000 रुपये के उधार के जरिए ही इंफोसिस की शुरुआत हुई थी. इसके बारे में बात करते हुए सुधा मूर्ति ने बताया कि मेरी मां ने कहा था कि कुछ सेविंग करो और वो भी बिना अपने पति को बताए, जो कि आगे जरूरत पर काम आए. उन्होंने कहा कि जब 1981 में नारायण मूर्ति ने मुझसे कहा कि मैं अपनी कंपनी शुरू करना चाहता हूं, तो उस समय मेरे पास बचत के 10,250 रुपये थे और इसमें से 10000 रुपये मैंने उन्हें दे दिए थे, जबकि 250 रुपये अपने पास बचा लिए थे. उन्होंने कहा कि जब इंफोसिस स्टार्ट की, तो उस समय माहौल अलग था. लेकिन जब इंफोसिस शुरू हुई तो हमारी लाइफ चेंज हो गई. 

एक-दूसरे के लिए गुनगुनाया बॉलीवुड गीत 
बातचीत के दौरान सुधा मूर्ति ने अपने रिश्ते के बारे में बताया कि एनआर नारायण मूर्ति से हमारी मुलाकात को 50 साल हो गए हैं और हमारी शादी को 46 साल, इस दौरान दोनों ने एक दूसरे के लिए गीत भी गुनगुनाया. सुधा मूर्ति ने जहां पति के लिए गाना गाया 'कोरा कागज था ये मन मेरा... लिख दिया नाम इस पर तेरा...' तो वहीं एन आर नारायण मूर्ति ने पत्नी के लिए 'अभी ना जाओ छोड़कर... कि दिल अभी भरा नहीं...' 

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