
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) का ऐलान कर दिया है और उन्होंने इस दिन को लिब्रेशन डे का नाम दिया है. नए टैरिफ रेट के मुताबिक, अमेरिका चीन से 34%, यूरोपीय संघ से 20% जापान से 24% और भारत से 27% टैरिफ वसूलेगा. अगर भारत पर इसके असर को देखें, तो जहां कुछ सेक्टर्स पर दबाव देखने को मिल सकता है, तो वहीं कुछ सेक्टर्स की टैरिफ के बाद भी बल्ले-बल्ले हो सकती है. इनमें खासतौर पर टेक्सटाइल-गारमेंट और फार्मा सेक्टर शामिल हैं, जिन्हें तगड़ा बूम मिल सकता है.
क्यों भारत को इन सेक्टर्स में फायदा?
सबसे पहले बताते हैं कि आखिर क्यों टेक्सटाइल्स समेत कुछ सेक्टर्स को अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ के बावजूद फायदा पहुंच सकता है? तो बता दें कि अमेरिका दुनिया के कई देशों के साथ ट्रेड करता है और Trump Tariff को देखें, तो चीन, वियतनाम समेत कई देश ऐसे हैं, जिनपर भारत की तुलना में अधिक टैरिफ लगाया गया है. ऐसे में इन देशों से आयात भारत की तुलना में महंगा होने वाला है और इसका फायदा भारतीय कंपनियों को कारोबार में इजाफे के तौर पर मिल सकता है.
अमेरिका में भारतीय कपड़ों की खूब डिमांड
US Reciprocal Tariff के बावजूद भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के बड़े अवसर नजर आ रहे हैं. भारतीय कपड़ों का फिलहाल सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका ही है और इस सेक्टर पर टैरिफ का दबाव देखने को मिलेगा, लेकिन आपदा में अवसर वाली कहावत इस सेक्टर में पूरी होती भी नजर आ सकती है. इसे आंकड़ों से समझें, तो 2023-24 में भारत से कुल लगभग 36 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) के कपड़ा निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 28 फीसदी या 10 अरब डॉलर (करीब 85,600 करोड़ रुपये) रहा था.
इस सेक्टर में लगातार इजाफा देखने को मिला है. साल 2016-17 और 2017-18 में भारत से कुल कपड़ा निर्यात में अमेरिकी हिस्सा 21 फीसदी से, साल 2019-20 में 25 फीसदी हुआ और 2022-23 में 29 फीसदी तक पहुंच गया था. रिपोर्ट की मानें तो भारत से कालीनों का 58%, अन्य निर्मित वस्त्रों का 50%, लेमिनेटेड वस्त्रों का 44% और बुने व गैर-बुने हुए कपड़ों के निर्यात का करीब 33% हिस्सा अमेरिका का था.
चीन, वियतनाम और बांग्लादेश रेस में आगे
हालांकि, अमेरिका में कपड़ा आयात में भारतीय हिस्सेदारी चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों की तुलना में बेहद कम है. साल 2024 में अमेरिका में कपड़ा आयात में भारत की हिस्सेदारी महज 6 फीसदी थी, जबकि चीन की हिस्सेदारी 21 फीसदी, वियतनाम की 19 फीसदी और बांग्लादेश की हिस्सेदारी 9 फीसदी थी.
भारत के पास कारोबार बढ़ाने का मौका
अब बताते हैं कि इस सेक्टर में क्यों भारत के लिए अवसर हैं. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयात पर 34% टैरिफ लगाया है, तो वियतनाम पर 46% और बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. वहीं इसकी तुलना में भारत पर टैरिफ 27 फीसदी है. मतलब भारत पर लगाया गया टैरिफ चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम है, जो भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए मददगार है.
इसका मतलब ये है कि भारत के कपड़े अमेरिका में दूसरे देशों के मुकाबले सस्ते होंगे, जिससे उनकी बिक्री बढ़ सकती है और इस सेक्टर से जुड़ीं भारतीय कंपनियां अपना कारोबार बढ़ाकर मोटा मुनाफा कमा सकती हैं और अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं. इससे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को फायदा तो होगा ही, कारोबार बढ़ने पर भारत के इस सेक्टर में रोजगार के अवसरों में भी इजाफा होगा.
फार्मा सेक्टर को भी मिलेगा बूस्ट
एक ओर जहां टेक्सटाइल सेक्टर को टैरिफ के बावजूद फायदा मिल सकता है, तो अमेरिका ने भारतीय फार्मा सेक्टर का भी लोहा माना है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि White House ने फार्मा प्रोडक्ट्स को इस टैरिफ के दायरे से बाहर रखा है. अमेरिका में खासतौर पर भारतीय जेनेरिक दवाओं की खासी डिमांड है और आंकड़ों के मुताबिक, भारत अमेरिका को लगभग 9 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है. ऐसे में इस सेक्टर में भी संभावनाएं बेशुमार नजर आ रही हैं और भारतीय कारोबार को बूस्ट मिल सकता है.