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Indian's Spending: खाने-पीने पर कम खर्च कर रहे हैं भारतीय.... सरकार ने बताया कहां ज्यादा उड़ाए जा रहे पैसे?

सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने खाने-पीने की चीजों पर होने वाला खर्च बीते 10 साल में ग्रामीण क्षेत्रों में 53 फीसदी से घटकर 46.4 फीसदी, जबकि शहरी क्षेत्रों में 42.6 फीसदी से कम होकर 39.2 फीसदी रह गया है.

सर्वे के मुताबिक, 10 साल में भारतीयों का कुल खर्च लगभग दोगुना हो गया है सर्वे के मुताबिक, 10 साल में भारतीयों का कुल खर्च लगभग दोगुना हो गया है
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST

भारतीय लोगों के खर्च (Indians Spending) को लेकर एक सरकारी सर्वे में बड़ा खुलासा किया गया है. इसमें बताया गया है कि भारतीयों के कुल घरेलू खर्च में बीते 10 साल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. दरअसल, सर्वे के मुताबिक जहां घरेलू खर्च (Household Spent) का आंकड़ा दोगुना हो गया है, तो वहीं लोगों के खाने-पीने पर होने वाला खर्च कम हुआ है. यानी लोग खाने-पीने के बजाय दूसरी चीजों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं. आइए नजर डालते हैं इस  सरकारी सर्वे के आंकड़ों पर...  

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कपड़े-मनोरंजन पर ज्यादा पैसे उड़ाए जा रहे
सांख्यिकी मंत्रालय ने भारतीय परिवारों के घरेलू खर्च को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में सामने आया है कि भारतीय परिवारों का घरेलू खर्च पिछले दस सालों में दोगुना से अधिक हो गया है. रिपोर्ट से पता चला है कि भारतीय अपने घरों में खाने के सामान पर अब कम खर्च हो रहा है, जबकि ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि अब भारतीय कपड़े, टेलीविजन सेट और एंटरटेनमेंट से जुड़ी चीजों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं.

शहर-गांव में इतना घटा खाने-पीने पर खर्च
सर्वे रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों में एक दशक की तुलना की गई है. इस पर नजर डालें तो ग्रामीण क्षेत्रों में हर महीने होने वाले खर्च में खाने-पीने की हिस्सेदारी 2011-12 की तुलना में 53 फीसदी थी, जो कि अब घटकर 46.4 फीसदी हो गई है. वहीं शहरी क्षेत्रों की बात करें तो खर्च में भोजन की हिस्सेदारी इस अवधि में 42.6 फीसदी से कम होकर 39.2 फीसदी रह गई है. सर्वे में सामने आया कि भोजन के बजाय गैर-खाद्य सामानों की हिस्सेदारी शहरी क्षेत्रों में 57.4 फीसदी से बढ़कर 60.8 फीसदी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 47 फीसदी से बढ़कर 53.6 फीसदी हो गई है.

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प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च में इजाफा
ये सरकारी सर्वे अगस्त 2022 से जुलाई 2023 के बीच किया गया था. इसमें लोगों के कुल खर्च में हुई बढ़ोतरी के बारे में जो तस्वीर सामने आई है, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहरी क्षेत्रों में औसतन मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च बढ़कर अनुमानित 6,459 रुपये हो गया, जो 2011-12 में करीब 2,630 रुपये था. वहीं इस अवधि के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में आंकड़ा 1,430 रुपये से बढ़कर अनुमानित 3,773 रुपये हो गया है. इस हिसाब से देखा जाए तो पिछले 11 वर्षों में खाने-पीने से लेकर तमाम तरह की चीजों और सेवाओं पर प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च ढाई गुना तक बढ़ा है.

कंज्यूमर सर्वे का कहां होता है इस्तेमाल? 
हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे के इन आंकड़ों को देखकर साफ है कि भारतीयों द्वारा किए जाने वाले कुल खर्च में खाने-पीने की चीजों की हिस्सेदारी घटी है, वहीं दूसरी ओर यात्रा और अन्य चीजों पर खर्च में इजाफा हुआ है. गौरतलब है कि ये कंज्यूमर सर्वे खासा महत्व रखता है और इकोनॉमी में डिमांड के उतार-चढ़ाव का आंकड़ा पेश करता है, इस डेटा का इस्तेमाल सरकार के जरिए रिटेल महंगाई (Retail Inflation) और जीडीपी (GDP) की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को फिर से समायोजित करने के लिए भी किया जाता है. 

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