
भारत में फेस्टिव सीजन (Festive Season In India) की शुरुआत से ऐन पहले ही चिंता बढ़ाने वाली खबरें आई हैं. जी हां, सितंबर महीने की शुरुआत में जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें (Crude Oil Price) तेजी से गिरी थीं, तो उम्मीद जताई जा रही थी देश में लंबे समय से स्थिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन इन उम्मीदों पर इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग पानी फेरती नजर आ रही है. इसका असर भी दिखने लगा है और क्रूड का दाम फिर 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. अगर ये बढ़ता है, तो त्योहारों के बीच जनता को फायदे के बजाय बड़ा झटका लग सकता है. आइए जानते हैं कि क्रूड की कीमतों का पेट्रोल-डीजल के भाव पर कैसे और क्या असर पड़ता है?
ईरान ने दागीं 180 मिसाइलें, क्रूड में लगी आग
Israel-Iran War जल्द थमता नजर नहीं आ रहा है. जहां एक ओर ईरान ने इजरायल पर ताबड़तोड़ करीब 180 मिसाइलों से अटैक किया, तो मंगलवार को इजरायल ने भी दो टूक कह दिया कि अब हम ईरान के हमले का जवाब देंगे, हमारा प्लान तैयार है, लेकिन समय और जगह हम चुनेंगे. दोनों ओर से बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतों पर दिखा है और ये 5 फीसदी के आस-पास उछल गई हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और ईरान तनाव बढ़ने से जहां वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI Crude) की कीमतों में अचानक 5 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है. ये बीते दिनों करीब 2.7 फीसदी तक फिसला था, तो वहीं दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड (Brent Crude Price) भी एक बार फिर 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच जंग (Russia-Ukraine War) शुरू होने के बाद क्रूड के दाम आसमान पर पहुंच गए थे.
पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद पर ब्रेक!
बीते सितंबर महीने की शुरुआत में इंटरनेशनल मार्केट में Crude के दाम में लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी और महीने के बीच में WTI क्रूड की कीमत जहां 70 डॉलर के नीचे 69.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी, तो वहीं 2021 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव भी गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास पहुंच गया था. दरअसल, यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने पॉलिसी रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, जिसके बाद क्रूड का दाम टूटा था. इसके अलावा और भी कई कारण सामने आए थे.
सितंबर महीने में कच्चे तेल की कीमतों आई गिरावट के चलते फेस्टिव सीजन में भारत में लंबे समय से स्थिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Rates) में कटौती की उम्मीद भी जागी थी. बिजनेस टुडे पर सितंबर महीने में छपी रिपोर्ट्स पर नजर डालें, तो इनमें अनुमान जताते हुए सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि केंद्र सरकार क्रूड के दाम में गिरावट को देखते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती कर सकती है.
Crude के भाव का पेट्रोल-डीजल पर असर
यहां ये जान लेना बेहद जरूरी है कि आखिर कैसे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड के दाम में बदलाव का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है. तो बता दें कि देश में फ्यूल के दाम कई कारकों पर निर्भर होते हैं. हर रोज इनके दाम घटते और बढ़ते हैं. इसके साथ ही हर शहर में ये कीमतें अगल-अलग होती हैं. इस बदलाव का कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंट क्रूड ऑयल का भाव, देश में इन पर लगने वाला उत्पाद शुल्क, राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट बनता है.
हालांकि, Petrol-Diesel Price तय करने में सबसे बड़ी भूमिका ग्लोबल मार्केट में बेंट क्रूड के भाव (Crude Price) की होती है. अगर क्रूड की कीमतों में गिरावट आती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी देखने को मिलती है. लेकिन, ऐसा हर बार हो ये जरूरी नहीं है कि क्रूड ऑयल सस्ता होने के बाद पेट्रोल-डीजल भी सस्ता हो, लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा ही देखने को मिलता है.
क्रूड में 1 डॉलर इजाफे का कैलकुलेशन
कैलकुलेशन को देखें तो एक्सपर्ट्स अनुज गुप्ता के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा होता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम 50 से 60 पैसे बढ़ने की संभावना रहती है. जबकि अगर 1 डॉलर की कमी आती है, तो फिर इसी अनुपात में Petrol-Diesel घट सकते हैं. ऐसे में अचानक जिस तेजी से क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ी है और Israel-Iran के बीच जंग बढ़ने से इसमें और तेजी आने की आशंका जताई जा रही है, फेस्टिव सीजन में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत की उम्मीद कम ही नजर आ रही है.
भारत में 80% कच्चे तेल का आयात
रिपोर्ट की मानें तो भारत में रोजाना करीब 37 लाख बैरल क्रूड की खपत होती है और देश अपनी खपत की पूर्ति के लिए लगभग 80 फीसदी क्रूड ऑयल आयात करता है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां Crude Oil की कीमत, फ्रेट चार्ज, रिफाइनरी कॉस्ट के आधार पर तय करती हैं कि पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता होगा या कितना महंगा किया जाएगा? इसके अलावा ग्राहक तक पहुंचने तक इसकी कीमतों में एक्साइज ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन भी जुड़ जाता है. मतलब साफ है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में कितना और कब बदलाव करना है, इस पर अंतिम फैसला स्थानीय तेल कंपनियां ही लेती हैं.
क्रूड सेक्टर में ईरान का दबदबा
गौरतलब है कि ईरान, जो कि ओपेक का सदस्य है और Crude Sector में इसका दबदबा है. कच्चे तेल के क्षेत्र में इसकी भागीदारी ने तेल आपूर्ति (Oil Supply Chain) में व्यवधान की आशंकाओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि ईरान दुनियाभर में होने वाली तेल सप्लाई के करीब एक तिहाई हिस्से की आपूर्ति करता है. बिजनसे टुडे की रिपोर्ट के मुताबि, ईरान के मिसाइल अटैक से संकट बढ़ने के आसार दिखने लगे हैं और इस खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया.