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तीन कंपनियों में बंट जाएगी Mahindra Auto, अलग-अलग होंगे ये बिजनेस

महिंद्रा एंड महिंद्रा अपने ऑटोमोबाइल बिजनेस को 3 कंपनियों में बांटने जा रही है. महिंद्रा समूह की कुल कमाई में ऑटो बिजनेस की हिस्सेदारी 55% है और कंपनी अब इसका पुनर्गठन करने जा रही है.

तीन कंपनियों में बंट जाएगी Mahindra Auto तीन कंपनियों में बंट जाएगी Mahindra Auto
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2022,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST
  • ट्रैक्टर बनाने में नंबर-1 है Mahindra
  • SUV की यूनिट अलग करेगी Mahindra

बहुत जल्द Mahindra & Mahindra का ऑटो बिजनेस एक नहीं रहेगा, बल्कि ये 3 अलग-अलग कंपनियो में बंट जाएगा. जी हां, आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) का महिंद्रा समूह (Mahindra Group) अपने पैसेंजर व्हीकल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ट्रैक्टर बिजनेस को अलग-अलग करने जा रहा है.  

EV बिजनेस के लिए Mahindra जुटाएगी पैसा

ईटी की एक खबर के अनुसार, महिंद्रा समूह अपने ऑटोमोबाइल बिजनेस को अलग-अलग करने के शुरुआती चरण में है. अभी समूह की ऑटो कंपनी में ये सभी अलग-अलग डिवीजन के तौर पर काम करते हैं. इसमें भी कंपनी की प्लानिंग अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल बिजनेस को इटली के डिजाइन हाउस Automobili Pininfarina के साथ मिलाने की है. कंपनी अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल बिजनेस के लिए फंड जुटाने की संभावनाएं भी तलाश रही है. भारत में कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल का प्लांट पुणे में है.

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SUV की यूनिट अलग करेगी Mahindra

इलेक्ट्रिक व्हीकल के अलावा कंपनी अपने एसयूवी बिजनेस को एक अलग कंपनी में बदल सकती है. अभी कंपनी XUV रेंज के तहत कई एसयूवी बनाती है. साथ ही Scorpio, Bolero और Thar जैसे पॉपुलर मॉडल भी बनाती है. हाल में कंपनी ने अपना नया लोगो भी जारी किया था, जो मुख्य तौर पर एसयूवी बिजनेस के लिए ही इस्तेमाल किया जाना है.

ट्रैक्टर बनाने में नंबर-1 है Mahindra

एक अलग कंपनी महिंद्रा अपने ट्रैक्टर बिजनेस के लिए बना सकती है. साल 2007 में पंजाब ट्रैक्टर का अधिग्रहण करने के बाद महिंद्रा भारत की सबसे बड़ी ट्रैक्टर कंपनी बन चुकी है. ट्रैक्टर बाजार में इसकी हिस्सेदारी 43% है. वहीं महिंद्रा के पूरे ऑटो बिजनेस में सबसे अधिक प्रॉफिट देने वाली यूनिट भी यही है.

हालांकि महिंद्रा की ओर से इस खबर पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है. वहीं इस खबर की जानकारी रखने वाले नजदीकी सूत्रों का कहना है कि ऑटो बिजनेस को 3 अलग-अलग कंपनियों में बांटने का मकसद तीनों तरह के बिजनेस की वैल्यू का सही उपयोग करना है.

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