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Tariffs Impact: ट्रंप, टैरिफ और धमकी... भारत पर कितना होगा असर? मूडीज ने कहा- नो टेंशन!

मूडीज के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ से एशिया-पैसिफिक देशों के निर्यात पर असर पड़ेगा. लेकिन भारत का इस मामले में जोखिम कम है, क्योंकि केवल कुछ खास सेक्टर्स जैसे कपड़ा, दवाइयां और खाने-पीने के सामानों पर ही इसका असर हो सकता है. 

America Tariff Impact (Photo: File) America Tariff Impact (Photo: File)
आदित्य के. राणा
  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST

अमेरिका के नए टैरिफ नियमों ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. खासकर एशिया-पैसिफिक इलाके के देशों पर इसका असर पड़ने की बात सामने आ रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 फरवरी को 'फेयर एंड रेसिप्रोकल प्लान' पर दस्तखत किए, जिसके तहत अमेरिका अपने इम्पोर्ट टैरिफ को अपने ट्रेड पार्टनर देशों के बराबर करना चाहता है. यानी अगर कोई देश अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैरिफ लगाता है तो अमेरिका भी उस देश के सामानों पर उतना ही टैरिफ लगा सकता है. 

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इस नीति से भारत जैसे देशों पर भी असर पड़ने की आशंका है. इस संभावित बढ़ोतरी के असर को लेकर रेटिंग एजेंसी मूडीज का कहना है कि भारत पर इसका असर बाकी देशों के मुकाबले कम होगा. लेकिन इसके पहले एसएंडपी ने चेतावनी दी है कि भारत को इससे सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है.

भारत-अमेरिका व्यापार
भारतीय सामानों पर अमेरिका में टैरिफ बढ़ने के असर को पूरी तरह समझने के लिए ये जानना जरुरी है कि दोनों देशों के बीच कितना व्यापार होता है. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और 2024 में दोनों देशों के बीच 129.2 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. 2023-24 में भारत ने अमेरिका को 77.52 अरब डॉलर का निर्यात किया था. अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 तक भारत का अमेरिका को कुल निर्यात 68.47 बिलियन डॉलर रहा. ऐसे में मूडीज के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ से एशिया-पैसिफिक देशों के निर्यात पर असर पड़ेगा. लेकिन भारत का इस मामले में जोखिम कम है, क्योंकि केवल कुछ खास सेक्टर्स जैसे कपड़ा, दवाइयां और खाने-पीने के सामानों पर ही इसका असर हो सकता है. 

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अमेरिका-भारत के बीच बातचीत
फिलहाल अमेरिका और भारत के बीच बातचीत चल रही है, जिससे इस असर को कम किया जा सके. भारत सरकार अमेरिकी मांगों पर विचार कर रही है जिनमें कुछ अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करना, अमेरिकी खेती के सामानों के लिए बाजार खोलना और अमेरिकी ऊर्जा खरीद बढ़ाना शामिल हैं. इसके बदले भारत 2025 तक एक नया व्यापार समझौता चाहता है. लेकिन अगर ये टैरिफ लागू हुए तो भारत के कपड़ा, दवा और खेती से जुड़े कारोबार पर दबाव पड़ सकता है. 

भारत के कपड़ा उद्योग के लिए अमेरिका बड़ा बाजार है, क्योंकि ये भारत से बड़े पैमाने पर कपड़े खरीदता है. भारत की फार्मा कंपनियों का बड़ा बाजार अमेरिका में है. वहीं टैरिफ बढ़ने से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है. 

टैरिफ पर टेंशन
भारत का अमेरिका के साथ पहले भी टैरिफ को लेकर टकराव हो चुका है. 2018 में जब अमेरिका ने भारतीय स्टील और एल्यूमिनियम पर टैरिफ लगाया था, तो भारत ने जवाब में 29 अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बढ़ा दिया था. इस बार भी अगर अमेरिका ने सख्ती की, तो भारत करारा जवाब दे सकता है. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को अपने टैरिफ ढांचे में बदलाव का मौका भी मिल सकता है. जानकार मानते हैं कि अगर भारत अपने कच्चे माल पर टैरिफ कम करे, तो भारतीय उद्योग ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं. अमेरिका का औसत टैरिफ 2.2% है जो दुनिया में सबसे कम है. वहीं भारत का औसत टैरिफ अमेरिका से काफी ज्यादा है. वियतनाम जैसे देशों के लिए टैरिफ बढ़ोतरी बड़े तनाव का सबब बन सकती है क्योंकि उसका अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस 123 बिलियन डॉलर है.

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S&P की भारत के लिए चेतावनी!
S&P ग्लोबल की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड को अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज्यादा खतरा है. वियतनाम, ताइवान और थाईलैंड जैसे देशों का अमेरिका के साथ व्यापार ज्यादा है, इसलिए उन्हें बड़ा नुकसान हो सकता है. वहीं, भारत और जापान की अर्थव्यवस्था अपने घरेलू बाजार पर ज्यादा निर्भर है, जो कुछ राहत दे सकती है. लेकिन ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि भारत जैसे देशों पर भी टैरिफ बढ़ाए जाएंगे. हाल ही में चीन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया और स्टील-एल्यूमिनियम पर शुल्क 25% तक बढ़ाया गया जिसके बाद भारत का नंबर आ सकता है. 

अमेरिकी टैरिफ का असर ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और दवा जैसे उद्योगों पर भी पड़ सकता है. इससे निर्यात प्रभावित होने के अलावा रुपये पर भी दबाव बढ़ेगा. अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ तो RBI के लिए नीतियां बनाना मुश्किल हो सकता है. कुल मिलाकर देखा जाए तो मूडीज का मानना है कि भारत पर असर कम होगा, लेकिन एसएंडपी की चेतावनी गंभीर है. ऐसे में भारत सरकार को सावधानी से कदम उठाने होंगे, वरना व्यापार घाटा बढ़ सकता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव और गहरा सकता है.

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