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अमूल से 36 का आंकड़ा... अब मिला तिरुपति मंदिर में घी सप्लाई का काम, जानिए कैसे नंदिनी बना दक्षिण भारत का बड़ा ब्रांड, कौन है मालिक?

उत्तर भारत में अमूल और मदर डेयरी दूध उत्पादों की लोकप्रियता की तरह ही, दक्षिण भारत में भी 'नंदिनी' एक जाना-माना नाम है. 'नंदिनी' कर्नाटक का सबसे बड़ा दूध ब्रांड है, जो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और गोवा जैसे पड़ोसी राज्यों में भी फेमस है.

नंदिनी की कहानी नंदिनी की कहानी
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 25 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:17 PM IST

तिरुपति मंदिर में लड्डुओं में पशु चर्बी और अन्‍य मिलावट का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है. इस बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने घी की सप्‍लाई करने वाली कंपनी को बदल दिया है और अब घी की आपूर्ति 'नंदिनी' को दे दी गई है. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की ओर से कंपनी को ऑर्डर भी दे दिया गया है. कुछ साल पहले भी नंदिनी ही तिरुपति मंदिर के लिए घी की सप्‍लाई करती थी, लेकिन टेंडर में AR डेयरी को ये काम मिल गया था. हालांकि फिर से नंदिनी को घी की सप्‍लाई करने का कॉन्‍ट्रैक्‍ट मिल चुका है. आइए जानते हैं नंदिनी कंपनी और उसके मालिक के बारे में, जो इन दिनों काफी चर्चा में हैं. 

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उत्तर भारत में अमूल और मदर डेयरी दूध उत्पादों की लोकप्रियता की तरह ही, दक्षिण भारत में भी 'नंदिनी' एक जाना-माना नाम है. 'नंदिनी' कर्नाटक का सबसे बड़ा दूध ब्रांड है, जो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और गोवा जैसे पड़ोसी राज्यों में भी फेमस है. कर्नाटक सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (KMF) के पास इस ब्रांड का मालिकाना हक है. यानी कि केएमएफ ही नंदिनी ब्रांड का संचालन करता है. 

कैसे KMF की हुई शुरुआत? 
बात साल 1955 की है, जब कर्नाटक के कोडागु जिले में पहली डेयरी सहकारी संस्‍था खोली गई थी. उस समय पैकेटबंद दूध का चलन नहीं था. किसान खुद घर-घर दूध पहुंचाते थे और साल 1970 के दशक तक दूध उत्‍पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाने लगा और जनवरी 1970 में दूध क्रांति की शुरुआत हुई, जिसे 'श्वेत क्रांति' कहा गया. वर्ल्‍ड बैंक की ओर से भी डेयरी परियोजनाओं से जुड़ी कई योजनाएं बनाई गईं. वर्ल्‍ड बैंक की डेयरी परियोजनाओं को लागू करने के लिए साल 1974 में कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक डेयरी विकास निगम (KDCC) की स्‍थापना की और फिर 10 साल बाद 1984 में इसका नाम बदलकर कर्नाटक मिल्‍क फेडरेशन (KMF) कर दिया. 

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नंदिनी ब्रांड का नाम कैसे आया? 
साल 1984 के आसपास कंपनी ने पैकेज्‍ड दूध और अन्‍य उत्‍पाद की सप्‍लाई के लिए एक ब्रांड निकाला, जिसे 'नंदिनी' नाम दिया गया. अपनी क्‍वालिटी और विस्‍तार के कारण समय के साथ 'नंदिनी' कर्नाटक में सबसे लोकप्रिय ब्रांड बन गया. इसके बड़े ब्रांड बनने का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि इसके बराबर में दक्षिण भारत में कोई और कंपनी नहीं थी. नंदिनी ने पड़ोसी राज्‍यों में भी अपनी पकड़ बनाई और आज भी ये एक बड़ा नाम है. यह ब्रांड दूध और दूध से बने हर तरह के प्रोडक्‍ट्स की सप्‍लाई करता है. जिसे दक्षिण भारत में खूब पसंद किया जाता रहा है. वर्तमान में कर्नाटक प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एमके जगदीश KMF के MD और सीईओ हैं. 

कैसे काम करता है नंदिनी ब्रांड का मालिक KMF? 
केएमएफ एक ऐसी संस्‍था बन चुकी है, जो राज्‍य के 15 डेयरी संघों का नेतृत्‍व करता है. इनमें बेंगलुरु सहकारी दुग्‍ध संघ, कोलार सहकारी दुग्‍ध संघ, मैसूर सहकारी दुग्‍ध संघ और कई अन्‍य शामिल हैं. ये डेयरी संघ जिला स्‍तरीय डेयरी सहकारी समितियों (DCS) के माध्‍यम से हर गांव के दूध खरीदते हैं और फिर उसे केएमएफ तक पहुंचाते हैं. कर्नाटक दुग्‍ध संघ की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, डेयरी सहकारी संस्‍था 24,000 गांवों के 26 लाख किसानों से प्रतिदिन 46 लाख किलो से ज्‍यादा दूध खरीदती है. 

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छोटे किसान और दूध उत्‍पादक 
कर्नाटक मिल्‍क फेडरेशन की सबसे खास बात ये है कि यह अपने ज्‍यादातर दूध सप्‍लायर्स को रोजाना भुगतान करता है, जिसमें ज्‍यादातर छोटे किसान और दूध उत्‍पादक हैं. फेडरेशन के मुताबिक, यह हर दिन दूध उत्‍पादकों को 28 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का भुगतान करता है. कर्नाटक मिल्‍क फेडरेशन के पास कुल 15 यूनिट्स हैं, जहां यह दूध को प्रोसेस और पैक करता है. इसके बाद ये मार्केटिंग और बिक्री का काम करता है. 

नंदिनी का कितना बड़ा कारोबार? 
नंदिनी ब्रांड के तहत दूध, दही, मक्खन, पनीर, चीज, फ्लेवर्ड मिल्क, चॉकलेट, रस्क, कुकीज, ब्रेड, नमकीन, आइसक्रीम जैसे 148 से अधिक प्रोडक्‍ट्स सप्‍लाई किए जाते हैं. वित्त वर्ष 2022-23 में केएमएफ का कुल कारोबार 19,784 करोड़ रुपये रहा.

अमूल और नंदिनी में क्‍यों विवाद? 
अमूल का मालिकाना हक गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के पास है. वित्त वर्ष 2022-23 में इसका कुल कारोबार 61,000 करोड़ रुपये रहा. वहीं नंदिनी का कारोबार 19,784 करोड़ रुपये रहा. अमूल और नंदिनी के बीच विवाद पिछले साल अमूल के कर्नाटक में उतरने के फैसले के बाद आया था. जब अमूल ने यहां पर रिटेल मार्केट में उतरने का ऐलान किया तो बहुत हंगामा हुआ था. कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने दावा किया कि दोनों सहकारी समितियों के बीच हमेशा से एक समझौता रहा है कि वे तब तक एक-दूसरे के बाजार में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक वे अपनी-अपनी मांगें पूरी करने में सक्षम नहीं हो जाते. हालांकि यह समझौता लिखित तौर पर नहीं था.

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वहीं अमूल ने दावा किया कि कर्नाटक के कई शहरों, खासकर बेंगलुरु में दूध की मांग पूरी नहीं हो रही है और इसलिए उसने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूध बेचने का फैसला किया है. जिसके बाद अमूल यहां मार्केट में उतरने का फैसला किया और फिर विवाद ने जोर पकड़ लिया. दक्षिण भारत में अमूल के प्रोडक्‍ट्स का बहिष्‍कार भी हुआ था. ये विवाद काफी लंबा चला था.  

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