
बैंक धोखाधड़ी के मामले में फंसे जेट एयरवेज (Jet Airways) के संस्थापक नरेश गोयल (Naresh Goyal) आज अदालत में जज के सामने 'हाथ जोड़कर' गुहार लगा रहे हैं, वे कह रहे हैं कि 'मैंने जीवन की हर उम्मीद खो दी है' और अपनी वर्तमान स्थिति में जीने के बजाय जेल में मरना पसंद करेंगे. अब सवाल ये कि कैसे एक एयरलाइंस का मालिक इस हालात में पहुंच गया? तो इसके पीछे एक लंबी कहानी है जो बेहद ही दिलचस्प भी है. कैसे महीने में 300 रुपये की सैलरी वाला एक व्यक्ति करोड़ों रुपये की एयरलाइंस का मालिक बन गया और फिर एक झटके में कैसे अर्श से फर्श पर आ गिरा?
300 रुपये महीने पर शुरू की थी नौकरी
देश की आजादी के दो वर्ष बाद साल 1949 में पंजाब के संगरूर में एक आभूषण व्यापारी के घर जन्मे नरेश गोयल (Naresh Goyal) का बचपन बेहद मुश्किलों में गुजरा था. पिता का साया बचपन में ही उठ चुका था और महज 11 साल की उम्र में उनके सिर से छत भी छिन गई थी, क्योंकि परिवार ऐसे मुश्किल आर्थिक संकट में फंसा था कि घर तक की नीलामी हो गई. 1967 में जब नरेश गोयल 17-18 साल के थे और पटियाला के बिक्रम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन कर रहे थे, तब जिम्मेदारियों और घर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें नौकरी शुरू करनी पड़ी. उन्होंने अपने मामा सेठ चरण दास राम लाल की ईस्ट वेस्ट नाम की ट्रैवल एजेंसी में 300 रुपये महीने पर नौकरी की शुरुआत की.
नौकरी करने हुए ट्रैवल बिजनेस की बारीकियां सीखीं
ट्रैवल एजेंसी में काम करते हुए नरेश गोयल 1967 से 1974 तक कई विदेशी एयरलाइनों के साथ जुड़े रहे. इस दौरान उन्होंने ट्रैवल बिजनेस की बारिकियों को समझा. कारोबार के सिलसिले में खूब विदेशी यात्राएं भी कीं. साल 1969 में इराकी एयरवेज ने नरेश गोयल को अपना जनसंपर्क प्रबंधक नियुक्त किया. साल 1971 से 1974 तक ALIA, रॉयल जॉर्डनियन एयरलाइंस के रिजनल मैनेजर के रूप में काम किया. मिडिल ईस्ट एयरलाइंस (MEA) के भारतीय ऑफिस में भी नरेश गोयल ने काम किया. यहां उन्होंने टिकटिंग, रिजर्वेशन और सेल समेत ट्रैवलिंग बिजनेस के कई अहम पहलुओं को समझा.
15000 रुपये उधार मांग शुरू किया बिजनेस
टैवल बिजनेस की बारीकियों को समझते हुए उन्होंने अपना कारोबार शुरू करने का मन बना लिया और फिर में साल 1974 में उन्होंने अपनी मां से करीब 15,000 रुपये लेकर जेट एयर नाम से अपनी खुद की ट्रैवल एजेंसी स्टार्ट कर दी. जेट एयर एजेंसी एयर फ्रांस, ऑस्ट्रियन एयरलाइंस और कैथे पैसिफिक जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती थी. गोयल का ये कदम मील का पत्थर साबित हुआ और उनका कारोबार चल निकला. फिर जैसे-जैसे साल बदले और दशक बदले उनका कारोबार बढ़ता चला गया. 90 के शुरुआती दशक में देश की इकोनॉमी मुश्किल दौर में थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार ने ओपन स्काई पॉलिसी को हरी झंडी दे दी. इस मौके को नरेश गोयल ने हाथों-हाथ लिया और घरेलू ऑपरेशन के लिए एयर टैक्सी की शुरुआत कर दी.
1993 में Jet Airways की शुरुआत
इसके बाद नरेश गोयल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, एयर टैक्सी की शुरुआत के दो साल के भीतर उनके बेड़े में चार विमान शामिल हो चुके थे. फिर 5 मई 1993 को जेट एयरवेज की बोइंग विमान ने रन-वे से अपनी नोज उठाकर आसमान की तरफ देखा और फिर बादलों से बात करने के लिए उनमें खो गया. जी हां यही वो तारीख है जब जेट एयरवेज (Jet Airways) ने अपने कमर्शियल ऑपरेशन की शुरुआत की थी. घरेलू मार्केट में जेट एयरवेज ने तेजी से अपने पैर पसारे और साल 2002 में तो इसने भारतीय एविएशन मार्खेट में हिस्सेदारी के मामले में इंडियन एयरलाइंस तक को पीछे छोड़ दिया.
एयर सहारा खरीदने के बाद पलटने लगे हालात
साल 2005 में एयरलाइन ने कैपिटल मार्केट में एंट्री ली और 20 फीसदी हिस्सेदारी के साथ नरेश गोयल की कुल संपत्ति (Naresh Goyal Net Worth) 8,000 करोड़ रुपये के पार निकल गई. कंपनी ने अपना आईपीओ भी पेश किया और इसके आने के बाद नरेश गोयल देश के सबसे अमीरों में शामिल हो गए, उन्हें Forbs ने 16वें नंबर पर रखा था. अपना कारोबार बढ़ाने के लिए उन्होंने 2006 में एयर सहारा एयरलाइन को 1,450 करोड़ रुपये में खरीदा, जिसमें जेट एयरवेज को 27 विमान और 12 फीसदी हिस्सेदारी के साथ कुछ इंटरनेशनल रूट्स भी मिले. लेकिन इस डील को ही जेट एयरवेज के लिए बुरे दिन की शुरुआत माना जाने लगा.
बजट एयरलाइंस का दौर पड़ा भारी
Naresh Goyal ने एयर सहारा का नाम 'जेटलाइट' किया और इसे सस्ते टिकट पर फुल सर्विस एयरलाइन के तौर पर संचालित किया. इस समय तक बजट एयलाइंस का दौर शुरू हो चुका था और जिसने स्थानीय विमानन परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया. इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइन ने अपने कम कीमत, नो-फ्रिल्स मॉडल से पूरे उद्योग को हिलाकर रख दिया. इस रेस में जेट एयरवेज और जेटलाइन पर खूब पैसे खर्च किए गए. जानकारों का मानना है कि यहीं से कंपनी वित्तीय संकट में फंसती चली गई. 5-6 साल बाद एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव आया, जब इंडिगो जेट एयरवेज से आगे निकल गई. इसी समय, रुपये की गिरती कीमत और तेल के बढ़ते दाम ने खेल और बिगाड़ दिया.
कर्ज का जाल, 2019 में ऑपरेशन बंद
किंगफिशर जैसे एयरलाइंस धड़ाम हो गईं और जेट एयरवेज भी मुश्किल में फंस गई. इस दौरान जेट ने बड़ी संख्या में करीब (1900) कर्मचारियों को भी निकाला था. हालांकि, सरकारी हस्तक्षेप के बाद उन्हें फिर बहाल भी किया गया था. साल 2013 में UAE की एतिहाद ने जेट में 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली. वहीं एयरलाइंस पर कर्ज लगातार बढ़ता गया. नवंबर 2018 तक जेट एयरवेज पर 25 अन्य बैंकों का करीब 8,500 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था. जनवरी 2019 में एयरलाइन ने बैंकों के कर्ज चुकाने में देरी की, जिससे उसकी रेटिंग गिर गई. बुरे दौर में यूएई की एतिहाद नरेश गोयल की आखिरी उम्मीद खत्म कर दी और 25 साल में आसमान की बुलंदियों को छूने वाली जेट एयरवेज धराशायी हो गई और उसे ऑपरेशन बंद करना पड़ा.
538 करोड़ के बैंक फ्रॉड में फंसे हैं गोयल
फिलहाल की बात करें, तो बता दें कि नरेश गोयल 538 करोड़ रुपये के केनरा बैंक (Canera Bank) धोखाधड़ी केस में आरोपी हैं. कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में पिछले साल 1 सितंबर 2022 को गोयल को हिरासत में लिया गया था. वह फिलहाल मुंबई की आर्थर रोड जेल में न्यायिक हिरासत में हैं. गौरतलब है कि बीते साल 23 नवंबर 2022 को केनरा बैंक के अधिकारियों ने जेट एयरवेज के नरेश गोयल, अनीता गोयल, गौरंग आनंद शेट्टी और अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षडयंत्र और विश्वासघात का आरोप लगाया था, जिससे केनरा बैंक को 538.62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.