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घर नीलाम, ट्रैवल एजेंसी में नौकरी, फिर जेट एयरवेज की उड़ान... कैसे अर्श से फर्श तक पहुंचे नरेश गोयल?

जेट एयरवेज (Jet Airways) के फाउंडर नरेश गोयल (Naresh Goyal) को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. नरेश गोयल एक समय देश के एविएशन सेक्टर के पोस्टर बॉय थे, लेकिन फिर उनके कुछ फैसलों ने जेट को जमीन पर ला पटका.

जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल. जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल.
रोहित कुमार ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

बात सन 1967 की है. पटियाला के बिक्रम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन कर रहे करीब 17-18 साल के एक लड़के ने ईस्ट वेस्ट नाम की ट्रैवल एजेंसी में नौकरी की शुरुआत की. ग्रेजुएशन की डिग्री मिलने में अभी वक्त था. लेकिन घर के हालात ऐसे थे कि कम उम्र में ही उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई. पिता का साया माथे से बचपन में ही उठ चुका था. 11 साल की उम्र में सिर से छत भी छिन गई थी. क्योंकि परिवार ऐसे मुश्किल आर्थिक संकट से गुजरा कि घर तक नीलाम हो गया. फिर उसे अपनी मां के साथ चाचा के घर में रहना पड़ा.

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लेकिन कहते हैं न कि वक्त की खासियत है कि ये बदल जाता है... तो उसका भी वक्त बदला और ऐसा बदला कि वो देश के एविएशन सेक्टर का आईकॉन बन गया...ये कहानी है जेट एयरवेज की नींव रखने वाले नरेश गोयल की, जिन्हें शनिवार की सुबह ईडी ने बैंक फ्रॉड के मामले में गिरफ्तार किया है...

300 रुपये की नौकरी

देश की आजादी के दो वर्ष बाद सन 1949 में पंजाब के संगरूर में एक आभूषण व्यापारी के घर जन्मे नरेश गोयल का बचपन बेहद मुश्किलों में गुजरा. घर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नरेश गोयल ने 18 साल की उम्र में अपने मामा सेठ चरण दास राम लाल की ट्रैवल एजेंसी में बतौर कैशियर नौकरी की शुरुआत की. उन्हें महीने के 300 रुपये वेतन के रूप में मिलते थे. यहां नौकरी कुछ समय तक चली. फिर कॉमर्स में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद नरेश गोयल इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए जीएसए के साथ ट्रैवल बिजनेस में शामिल हो गए.  

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ट्रैवल बिजनेस की दुनिया 

1967 से 1974 तक वो कई विदेशी एयरलाइनों के साथ जुड़े रहे. इस दौरान उन्होंने ट्रैवल बिजनेस की बारिकियों को समझा. कारोबार के सिलसिले में खूब विदेशी यात्राएं भी की. साल 1969 में इराकी एयरवेज ने नरेश गोयल को अपना जनसंपर्क प्रबंधक नियुक्त किया. साल 1971 से 1974 तक ALIA, रॉयल जॉर्डनियन एयरलाइंस के रिजनल मैनेजर के रूप में काम किया. मिडिल ईस्ट एयरलाइंस (एमईए) के भारतीय ऑफिस में भी नरेश गोयल ने काम किया. यहां उन्होंने टिकटिंग, रिजर्वेशन और सेल समेत ट्रैवलिंग बिजनेस के कई अहम पहलुओं को समझा. 

नरेश गोयल

जेट एयर की पड़ी नींव

फिर कैलेंडर में साल 1974 आया और नरेश गोयल ने अपनी मां से करीब 15 हजार रुपये लेकर जेट एयर नाम से अपनी ट्रैवल एजेंसी की नींव डाली. जेट एयर एजेंसी एयर फ्रांस, ऑस्ट्रियन एयरलाइंस और कैथे पैसिफिक जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती थी. कारोबार चल निकला और नरेश गोयल ट्रैवल बिजनेस में धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे. फिर साल बदले और बदला दशक...

गोयल ने हाथों-हाथ लपका मौका

90 के शुरुआती दशक में देश की इकोनॉमी मुश्किल दौर से गुजर रही थी. प्रधान मंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कोशिश कर रही थी. इसी दौरान सरकार ने ओपन स्काई पॉलिसी को हरी झंडी दी. नरेश गोयल ने इस मौके को हाथों-हाथ लपका और घरेलू ऑपरेशन के लिए एयर टैक्सी की शुरुआत की. क्योंकि तब भरत का कानून बिल्कुल संगठित तरीके से प्राइवेट एयरलाइंस की ऑपरेशन की अनुमति नहीं देते थे, जिसके विमान टाइम टेबल के मुताबिक उड़ान भर सकें.

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लेकिन दो साल बीतते-बीतते नरेश गोयल ने चार विमानों का एक बेड़ा तैयार कर लिया और आसमान की ऊंचाइयों को नापने के लिए कमर कस ली. फिर तारीख आई 5 मई 1993 की... जिस दिन जेट एयरवेज की बोइंग विमान ने रनवे से अपनी नोज उठाकर आसमान की तरफ देखा और फिर बादलों से बातों करने के लिए उनमें खो गया. इस तरह जेट एयरवेज ने अपने कमर्शियल ऑपरेशन की शुरुआत की.

जेट एयर ने चखा सफलता का स्वाद

नरेश गोयल के पास एविएशन बिजनेस को जल्द समझने के लिए जरूरी व्यवसायिक समझ थी. तब एविएशन सेक्टर के लिए समय कठिन था. कई निजी विमानन कंपनियां मुश्किलों का सामना कर रही थीं. इस दौर में घरेलू मार्केट में जेट एयरवेज ने तेजी से अपने कारोबारी पैर पसारे. साल 2002 जेट एयरवेज के लिए ऐतिहासिक रहा. क्योंकि इसी साल वो पल आया, जब वो भारतीय बाजार हिस्सेदारी के मामले में इंडियन एयरलाइंस को पीछे छोड़ दिया.

साल 2005 में एयरलाइन ने कैपिटल मार्केट में प्रवेश किया और 20 फीसदी हिस्सेदारी के साथ गोयल की कुल संपत्ति 8,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई. जेट एयरवेज के आईपीओ के बाद फोर्ब्स मैगजीन ने नरेश गोयल को भारत का 16वां सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था.

एक डील और गिरावट का दौर शुरू

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साल 2006 में नरेश गोयल ने एक डील में एयर सहारा एयरलाइन को 1,450 करोड़ रुपये में खरीद लिया. इस डील में जेट एयरवेज को 27 विमान और 12 फीसदी हिस्सेदारी और कुछ इंटरनेशनल रूट्स मिले. लेकिन इस सेक्टर की समझ रखने वाले जानकार कहते हैं कि इस डील के बाद से ही जेट एयरवेज के बुरे दिन की शुरुआत हो गई. नरेश गोयल ने एयर सहारा का नाम बदलकर जेटलाइट कर दिया और इसे सस्ते टिकट पर फुल सर्विस एयरलाइन के तौर पर ऑपरेट करने लगे. जानकार कहते हैं कि यहीं से कंपनी वित्तीय संकट में फंसती चली गई. इस दौरान जेट एयरवेज के विस्तार पर भी खूब पैसे खर्च किए गए. 

बजट एयरलाइंस ने बदला खेल

जिस समय जेट एयरवेज आसमान में लहराकर सफलता के स्वाद चख रही थी. उसी दौरान भारतीय एविएशन सेक्टर में बजट एयरलाइंस की एंट्री ने पूरे कारोबार के परिदृश्य को बदल रही थीं. साल 2004-05 बजट एयरलाइंस की एंट्री एक ऐसी घटना थी, जिसने स्थानीय विमानन परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया. इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइन ने अपने कम कीमत, नो-फ्रिल्स मॉडल से पूरे उद्योग को हिलाकर रख दिया.

गिरते रुपये और बढ़ती फ्यूल की कीमतों ने दिया झटका

साल 2012 में भारत के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव तब आया, जब इंडिगो ने अंततः स्थानीय बाजार में हिस्सेदारी के मोर्चे पर जेट एयरवेज को पीछे छोड़ दिया. करीब एक दशक में जेट एयरवेज की चमक फीकी पड़ने लगी थी. लगभग इसी समय, गिरते रुपये और बढ़ती तेल की कीमतों ने विमानन कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं. संकट लगातार बढ़ता गया, केवल सरकारी राहत पैकेजों की एक सीरीज ने ही एयर इंडिया को बचाए रखा. किंगफिशर जैसी एयरलाइन आसमान से धड़ाम से जमीन पर गिर गई. 

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जेट एयरवेज ने बेची हिस्सेदारी

जेट एयरवेज उन एयरलाइंस में शामिल थी, जिन्हें इन वजहों से सबसे गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ा. फिर जेट ने अपने कुल 13,000 कर्मचारियों में से 1,900 को नौकरी से निकाल दिया. एयरलाइन के इस कदम से नरेश गोयल पर जमकर सवाल उठे. बाद में सरकार के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों को फिर से बहाल करना पड़ा. साल 2013 में यूएई की एतिहाद ने जेट एयरवेज में 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली. लेकिन गोयल ने अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी बरकरार रखी.

साल 2018 के नवंबर में जेट के तिमाही नतीजे तीसरी बार निगेटिव आए. जेट एयरवेज पर 25 अन्य बैंकों का 8,500 करोड़ रुपये का कर्ज था. साथ ही कंपनी पर 23,000 कर्मचारियों और सैकड़ों वेंडरों का भी 13,000 करोड़ रुपये बकाया था. जेट ने अपने पायलटों से कहा कि वह अप्रैल 2019 तक बकाया वेतन का भुगतान कर देगी.

तमाम कोशिशें नहीं आईं काम

जनवरी 2019 में साफ संकेत मिल गए कि जेट किस राह पर जा रहा है. एयरलाइन ने बैंकों के कर्ज चुकाने में देरी की, जिससे रेटिंग में गिरावट आई. फरवरी के मध्य तक, जेट एयरवेज के बोर्ड ने एक राहत पैकेज पारित किया, जो ऋणदाताओं को इसका सबसे बड़ा शेयरधारक बना देता. 15 फरवरी को एयरलाइंस ने शेयरधारकों से 840 मिलियन डॉलर की राहत राशि मांगी. एक हफ्ते बाद, शेयरधारकों ने जेट के कर्ज को इक्विटी में बदलने के कदम को मंजूरी दे दी.

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मार्च मध्य तक, बड़ी पिक्चर इतनी साफ हो गई कि गोयल अब इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते थे. उन्होंने अपने 24 फीसदी पार्टनर एतिहाद से 750 करोड़ रुपये के निवेश के लिए कहा, जिसके जवाब में एतिहाद ने कहा कि अगर उसे 150 रुपये प्रति शेयर मिलेंगे तो वह अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देगा. एतिहाद नरेश गोयल की आखिरी उम्मीद थी. उसके इंकार बाद गोयल के लिए सारे दरवाजे बंद हो गए. कुछ दिनों बाद वह अपनी पत्नी के साथ उस एयरलाइन से उतर गए, जिसे उन्होंने करीब 25 साल पहले शुरू शुरू किया था और इस तरह जेट आसमान की ऊंचाइयों से जमीन पर आ गई. 
 

 

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