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आजादी से पहले ये चीज बनाती थी Parle कंपनी, जानिए बिस्किट बनाने का आइडिया कहां से आया?

Parle-G Success Story : पारले ने स्वदेशी आंदोलन के दौरान साल 1929 में कैंडी का प्रोडक्शन शुरू किया और इसके एक दशक के बाद पहली बार 1938 में पारले-ग्‍लूको (Parle-Gloco) नाम से बिस्किट का उत्पादन शुरू किया.

पारले जी 2011 में बना था दुनिया का बेस्ट सेलिंग बिस्किट ब्रांड पारले जी 2011 में बना था दुनिया का बेस्ट सेलिंग बिस्किट ब्रांड
दीपक चतुर्वेदी
  • नई दिल्ली,
  • 27 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

आज भी बिस्किट की बात आती है, तो फिर सबसे पहले जुबान पर एक ही नाम आता है और वो है 'Parle-G'. भले ही इस मार्केट में अब तमाम छोटी-बड़ी कंपनियों की एंट्री हो चुकी है, लेकिन पारले का दबदबा कायम है. लेकिन Parle ऐसे ही इतनी बड़ी कंपनी नहीं बन गई, बल्कि कैंडी से शुरू हुआ सफर कैसे बिस्किट इंडस्ट्री की पहचान बन गया? एक समय ये दुनिया में वेस्ट सेलिंग बिस्किट बन गया था. इसकी बड़ी ही दिलचस्प कहानी है.

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द्वितीय विश्व युद्ध में भारी डिमांड 
बच्चे हों, बूढ़े हों या फिर जवान लगभग सभी Parle-G के नाम से वाकिफ होंगे. ये नाम और प्रोडक्ट महज एक बिस्किट का ब्रांड ना होकर, लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है. क्योंकि, अगर बुजुर्गों के सामने भी पारले-जी बिस्किट का जिक्र होता है, तो एक बार जरूर वे अपने बचपन में लौट जाते होंगे. समय के साथ इस बिस्टिक की पैकेजिंग से लेकर दाम तक में बदलाव हुआ, लेकिन इसका स्वाद जस का तस है. गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान भारतीय और ब्रिटिश दोनों ही सैनिकों का यह पंसदीदा बिस्किट हुआ करता था.

कब हुई थी Parle की शुरुआत? 
अब बात करते हैं पारले की शुरुआत के बारे में, तो बता दें पारले प्रोडक्ट्स को 'हाउस ऑफ पारले' (House of Parle) कंपनी के तहत शुरू किया गया था. इस कंपनी को मोहनलाल दयाल ने 1928 में स्थापित किया था. वैसे उनका फैमिली बिजनेस सिल्क का था, उस समय भारत आजादी की जंग लड़ रहा था और स्‍वदेशी आंदोलन जारी था. उसी समय मोहनलाल दयाल ने एक पुरानी फैक्‍टरी में कन्‍फेक्‍शनरी यूनिट तैयार की और इसमें बनने वाला पहला प्रोडक्ट रेंज कैंडी था. इसे पारले कैंडी नाम दिया गया. 

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जर्मनी की ट्रेनिंग भारत में कर गई काम
मोहनलाल दयाल ने ऐसे ही इस कन्फेक्शनरी यूनिट को शुरू नहीं किया था, बल्कि इसकी पूरी ट्रेनिंग जर्मनी से लेकर आए थे और साथ में मशीनें भी. कैंडी के फेमस होने के साथ ही उनके दिमाग में कारोबार विस्तार का प्लान बनना शुरू हो गया था, हालांकि नया प्रोडक्ट लाने में 10 साल का समय लग गया और पारले ने पहली बार 1938 में पारले-ग्‍लूको (Parle-Gloco) नाम से बिस्किट का उत्पादन शुरू किया. आजादी से पहले पारले-जी (Parle-G) का नाम ग्लूको बिस्किट (Gluco Biscuit) हुआ करता था.

आजादी के बाद ग्लूको बिस्किट का उत्पादन बंद कर दिया गया था. दरअसल, इसे बनाने के लिए गेंहू का इस्तेमाल किया जाता था और देश में उस समय अन्न का संकट उत्पन्न हो गया था, जिस कारण इसका उत्पादन बंद करना पड़ा था.

ऐसे अस्तित्व में आया Parle-G बिस्किट
अन्न संकट के बीच बंद किए जाने के बाद कंपनी ने जब दोबारा बिस्किट का प्रोडक्शन स्टार्ट किया, तब तक इस मार्केट में कई छोटी-बड़ी कंपनियां दस्तक दे चुकी थीं. खासकर ब्रिटानिया, जिसने ग्लूकोज-डी (Glucose-D) बिस्किट के जरिए बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दी थी. उसी समय पारले ने 80 के दशक में अपने ग्लूको बिस्किट को नाम में थोड़ा-सा बदलाव करके दोबारा लॉन्च किया. इसका नया नाम था 'Pagle-G'. इसमें 'G' शब्द को पहले 'Genius' के तौर पर प्रमोट किय गया था. लेकिन, असल मायने में इसका मतलब 'ग्लूकोज' (Glucose) से ही था.

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पारले-जी बन गया दुनिया में बेस्ट सेलिंग बिस्किट
देखते ही देखते पारले-जी देश के लोगों की पसंद बनता गया और इसका बिजनेस भी रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ने लगा. इसका बिजनेस बढ़ाने में 90 के दशक में दूरदर्शन पर इसके ऐड के जरिए किए गए प्रमोशन का अहम रोल रहा और ये घर-घर तक पहुंच गया. साल 2011 में हुए नील्सन सर्वे के मुताबिक, पारले-जी दुनिया में बेस्ट सेलिंग बिस्किट ब्रांड था. इसकी शुरुआत से अब तक पारले ने इस मार्केट में कई नए प्रोडक्ट्स उतारे हैं, लेकिन Parle-G का दबदबा कायम है. 

17000 करोड़ रुपये से ज्यादा है रेवेन्यू
शुरुआती दौर में परिवार के महज 12 लोगों के साथ हुआ पारले का सफर अब देश के करीब 30 लाख से ज्यादा रिटेल स्टोर्स तक पहुंच चुका है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रति सेकेंड 4,000 से ज्यादा Parle-G बिस्किटों की खपत होती है. पॉपुलैरिटी के साथ ही कंपनी का बिजनेस भी बड़ा हो चुका है और एक फैक्ट्री को रिफर्बिश करते शुरू हुई कंपनी अब 17000 करोड़ रुपये से ज्यादा के रेवेन्यू वाली फर्म में तब्दील हो चुकी है. 

यहां बता दें कि चौहान परिवार द्वारा शुरू की गई पारले कंपनी का बिजनेस तीन हिस्सों में चलता है. जिनमें Parle-G बनाने वाली पारले प्रोडक्ट्स (Parle Products) के साथ ही पारले एग्रो (Parle Agro) और पारले बिसलेरी (Bisleri) शामिल है. पारले प्रॉडक्ट्स के अन्य पॉपुलर प्रोडक्ट्स की बात करें तो इसमें पारले 20-20 कुकीज, पारले आटा, पारले रस्क, हाइड एंड सीक, मिल्क शक्ति, जिंग, कच्चा मैंगा बाइट समेत अन्य शामिल हैं. 

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