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Rapido Success Story: IIT से पढ़ाई, 7 बार काम में फेल... फिर भी हार नहीं माने, आज हर शहर में इनका नाम!

रैपिडो को हाल ही में 200 मिलियन डॉलर का फंड मिला है, जिसके बाद इस कंपनी का वैल्‍यूवेशन 1.1 अरब डॉलर हो गई है. इसका मतलब है कि ये कंपनी यूनिकॉर्न बन चुकी है. रैपिडो की शुरुआत तीन दोस्‍तों ने मिलकर 2015 में की थी.

रैपिडो के को-फाउंडर पवन गुंटुपल्‍ली रैपिडो के को-फाउंडर पवन गुंटुपल्‍ली
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 06 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:29 AM IST

मेहनत करने वालों की कब किस्‍तम पलट जाए कोई नहीं जानता... एक IIT से पढ़ाई पूरी करने वाले शख्‍स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. IIT से निकलकर पवन गुंटुपल्ली ने विदेश में पहले नौकरी की, लेकिन उनका वहां पर मन नहीं लगा. वापस इंडिया आकर वे कुछ नया करना चाहते थे. लाखों रुपये की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर वे देश वापस आए और दो सालों तक नए-नए आइडिया पर काम करते रहे, लेकिन वे 7 बार असफल रहे. 

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पवन गुंटुपल्ली ने एक इंटरव्‍यू में बताया था कि इतनी बार फेल होने के बाद भी उन्‍होंने हार नहीं मानी. आसपास के लोग उन्‍हें कहते थे कि वह अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं, लेकिन घर वालों का पूरा सपोर्ट था. आखिरकार वह समय आ गया, जब उन्‍होंने एक शानदार आइडिया पर कैब प्रोवाइड कराने वाली कंपनी की शुरुआत की. यह कंपनी कोई और नहीं रैपिडो (Rapido) है, जो आज कई शहरों में बाइक से कैब तक की सर्विस प्रोवाइड कराती है और इसे अब एक बड़ी सफलता मिली है. 

यूनिकॉर्न बनी रैपिडो 
राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो को वेस्टब्रिज कैपिटल की अगुआई में सीरीज ई फंडिंग में 200 मिलियन डॉलर मिला है. इस नए निवेश के साथ रैपिडो का पोस्ट-मनी वैल्‍यूवेशन 1.1 अरब डॉलर हो चुका है. यानी अब ये कंपनी यूनिकॉर्न क्‍लब में शामिल हो चुकी है. रैपिडो के को-फाउंडर अरविंद सांका ने कहा कि पूंजी के इस नए निवेश के साथ, हम अपने ऑफ़र का पता लगाने और विस्तार करने के लिए उत्सुक हैं, ताकि हम अपने ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सकें. 

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एक आइडिया से शुरू हुआ रैपिडो 
6 बार स्‍टार्टअप में फेल होने के बाद  पवन गुंटुपल्ली ने अपने एक दोस्त अरविंद सान्का के साथ मिलकर ‘द कैरियर’ (theKarrier) की शुरुआत की. वे मिनी ट्रक से इंटरसिटी लॉजिस्टिक्स सेवाएं देते थे, लेकिन ये बिजनेस भी ज्‍यादा नहीं चला. वहीं ट्रैफिक जाम की परेशानियों और पुराने असफल बिजनेस से पवन गुंटुपल्ली को आइडिया आया कि क्‍यों ना एक बाइक वाली कैब सर्विस शुरू किया जाए? फिर क्‍या था, उन्‍होंने अपने दोस्‍तों अरविंद सान्का और ऋषिकेश एसआर के साथ मिलकर साल 2015 में रैपिडो की शुरुआत कर दी, यह कंपनी बाइक से लेकर टैक्‍सी तक की सुविधा प्रोवाइड करने के लिए शुरू की गई थी. आज इस कंपनी का वैल्‍यूवेशन 9237 करोड़ रुपये (1.1 अरब डॉलर) है.  

ओला-उबर से थी बड़ी टक्‍कर 
जब रैपिडो की शुरुआत हुई तो कैब प्रोवाइड कराने वाले ओला और उबर लीड प्‍लेयर थे. ये सिर्फ कार, टैक्‍सी की सर्विस प्रोवाइड कराते थे. दूसरी तरफ बाइक के बारे में लोग कम जानते थे. पवन गुंटुपल्ली ने बैंगलोर से रैपिडो की शुरुआत की. उन्होंने इसके लिए बेस फेयर 15 रुपये रखा और उसके बाद हर एक किलोमीटर के लिए 3 रुपये का शुल्क रखा. लेकिन इतनाभर कर देने से सफलता नहीं मिली. रैपिडो ने बाइक सर्विस के साथ अपनी कैब सर्विस शुरू की थी. रैपिडो के शुरू होने के एक महीने बाद ही उबर और ओला ने भी अपनी बाइक सर्विस भी लॉन्च कर दी, जिस कारण रैपिडो में बड़े निवेशक आने से डरने लगे. 

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रैपिडो कैसे बना मार्केट लीडर? 
साल 2016 में रैपिडो को हीरो मोटोकॉर्प के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पवन मुंजाल का साथ मिला. उनके बाद एंडवांटएज (AdvantEdge) और कुछ अन्य का भी साथ मिला. अब रैपिडो ने बैंगलोर, दिल्ली और गुड़गांव में 400 बाइक्स उतार दीं. जनवरी 2016 तक कंपनी के पास 5000 यूजर थे, जबकि दिसंबर 2016 आते-आते यह संख्या बढ़कर 1,50,000 तक पहुंच गई. आज स्थिति ये है कि रैपिडो ने मेट्रो शहरों से आगे भी अपनी पहुंच बढ़ाई है, देश भर के टियर 2 और 3 शहरों सहित 100 से अधिक शहरों में अपनी उपस्थिति स्थापित की है और इस सेक्‍टर में एक लीडर के तौर पर उभरा है. 

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