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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट (Repo Rate) को लेकर बड़ा फैसला लिया है. रेपो रेट में इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. अभी भी रेपो रेट 6.50 फीसदी पर स्थिर है. यह 11वीं बार है जब रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. रिजर्व बैंक ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेटो रेट बदला था और इसे 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.50 फीसदी कर दिया था. इसके बाद से इसे चेंज नहीं किया गया है.
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपने कार्यकाल का आखिरी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करते हुए कहा कि मेजोरिटी में सदस्यों ने तय किया है कि रेपो रेट को अनचेंज रखा जाए. MPC ने तय किया गया है कि महंगाई को टारगेट पर लाने का फोकस रहेगा. इस लिए अभी रेपो रेट में कटौती नहीं की जा रही है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने नीतिगत रेपो दर को 6.5% पर बरकरार रखा है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने 4:2 बहुमत के साथ तटस्थ रुख बनाए रखा है. दास के अनुसार, स्थिर रेपो दर मौजूदा आर्थिक स्थितियों के प्रति सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देती है. दास ने अपने के दौरान कहा कि मौद्रिक नीति का व्यापक प्रभाव होता है, मूल्य स्थिरता समाज के हर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है."
जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाया
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति बैठक की घोषणाओं में 2024-25 के लिए अनुमानित जीडीपी वृद्धि को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया, जिसमें तीसरी तिमाही में ग्रोथ 6.8 और चौथी तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि अगले साल की पहली तिमाही में वृद्धि 6.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
महंगाई को लेकर आरबीआई का फैसला
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025 के लिए CPI इन्फ्लेशन को 4.8% पर आंका है, जो महंगाई और विकास को संतुलित करने में लगातार चुनौतियों को रेखांकित करता है. गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौसम संबंधी चुनौतियों, वित्तीय अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ी है.
Repo Rate का EMI पर असर
RBI की MPC की बैठक हर दो महीने में होती है और इसमें शामिल रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास समेत छह सदस्य महंगाई समेत अन्य मुद्दों और बदलावों (Rule Changes) पर चर्चा करते हैं. यहां बता दें कि रेपो रेट का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट (Repo Rate) वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.