
भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा को लेकर डिजिटल वालेट कंपनी मोबिक्विक को आड़े हाथों लिया है. उसने कंपनी के डेटाबेस में हैकर्स की सेंधमारी को लेकर उसे एक आदेश दिया है, जानें क्या है पूरा मामला...
10 करोड़ ग्राहकों के डेटा में सेंधमारी
हैकरों के एक समूह जॉर्डनडेवेन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को एक ईमेल कर डेटाबेस का लिंक भेजा. इसमें मोबिक्विक के फाउंडर बिपिन प्रीत सिंह और सीईओ उपासना टाकू समेत कंपनी के 9.9 करोड़ यूजर्स के ना सिर्फ फोन नंबर बल्कि बैंक खाता संख्या, क्रेडिट कार्ड नंबर जैसी कई अहम जानकारियां ऑनलाइन जारी कर दी गई. इसे अब तक की सबसे बुरी डेटा लीक घटनाओं में से एक माना जा रहा है.
सभी डेटा सुरक्षा कानूनों को मानती है कंपनी
घटना के बाद मोबिक्विक ने मंगलवार को कहा कि वह डेटा सुरक्षा से जुड़े सभी कानूनों का पालन करती है. जहां तक इस घटना की बात है कंपनी सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर जांच करा रही है और उन्हें डेटा में सेंधमारी के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं.
RBI का फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि रिजर्व बैंक ने डेटा चोरी मामले में मोबिक्विक को बिना देरी किए फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है. इस पर कंपनी का दावा है कि उसकी प्रणाली पूर्णतया सुरक्षित है, ऐसे में डेटा चोरी का सवाल ही नहीं उठता. वह ग्राहकों की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को गंभीरता से लेता है. सूत्रों ने केंद्रीय बैंक के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि RBI ने कंपनी को सर्ट-इन के पैनल पर मौजूद ऑडिटर से जल्द से जल्द ऑडिट कराने के लिए कहा है.
नहीं मिला आधिकारिक जवाब
हालांकि फॉरेंसिक ऑडिट के ऊपर रिजर्व बैंक और मोबिक्विक दोनों से ही कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है.
www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित
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