
सऊदी अरब (Saudi Arabia) के एक ऐलान से अब दुनियाभर के मुस्लिम देशों में खलबली मच सकती है. दरअसल, अभी तक मुस्लिम देशों में अपने प्रभाव का विस्तार करने की मुहिम के तहत सऊदी अरब ने पाकिस्तान से लेकर मिस्र तक को अरबों डॉलर की रकम बगैर किसी खास शर्त के दी है. लेकिन अब सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वो अपनी इस नीति में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान मिस्र और पाकिस्तान को हो सकता है. इसकी वजह है कि सऊदी अरब इन दोनों ही कंगाल देशों से दूरी बना रहा है.
प्रिंस बदलेंगे सऊदी अरब की रणनीति
सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान लगातार कड़ी शर्तें लगा रहे हैं और वो सब्सिडी को खत्म करने के साथ ही सरकारी कंपनियों को निजी क्षेत्र को सौंपने की वकालत कर रहे हैं. सऊदी अरब की रणनीति में बदलाव की वजह तेल की बिक्री से सऊदी अरब की कमाई में आई गिरावट है. यूक्रेन युद्ध के बाद तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद सऊदी अरब 2022 में 28 अरब डॉलर के बजट सरप्लस में था. इस कमाई के बावजूद भी सऊदी अरब मिस्र, पाकिस्तान और लेबनान जैसे कर्ज मांगने वाले देशों के साथ सख्ती बरत रहा है.
मुनाफे के लिए निवेश करेगा सऊदी अरब
सऊदी अरब अभी भी विदेश में पैसा भेज रहा है. लेकिन उसका मकसद अब मुनाफे के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेश है. इसके अलावा वो अपने यहां इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उद्योगों को बढ़ावा देना चाहता है. जनवरी में दावोस में सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल जदान ने भी कहा था कि पहले सऊदी बिना शर्त सीधे मदद करता था. लेकिन अब ये देश इसे बदलकर बहुपक्षीय संस्थाओं के साथ काम करने की वजह से सुधार पर जोर दे रहा है.
मिस्र-पाक को सबसे ज्यादा नुकसान
अभी तक मिस्र सऊदी अरब और यूएई के पैसे पर बहुत ज्यादा निर्भर है. लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सऊदी अरब की नीति में बदलाव नहीं होगा. सऊदी प्रिंस ने अपने पिता के गद्दी संभालने के बाद देश को तेल पर से निर्भरता कम करने की कोशिश की है. अब उनकी कोशिश देश को बिजनेस और संस्कृति का गढ़ बनाने की है. वो अब अपने साथी अरब देशों जैसे यूएई और कतर के मॉडल को अपने देश में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे वो अपने अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को भी बढ़ाना चाहते हैं. खाड़ी देशों ने तुर्की को 5 अरब डॉलर की मदद की है, जिससे इस धुर विरोधी देश में भी सऊदी अरब का प्रभाव बढ़ गया है.
सऊदी फर्स्ट की नीति पर प्रिंस
मोहम्मद बिन सलमान अब सऊदी फर्स्ट की नीति पर चल रहे हैं और देश में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. सऊदी के इस बदलाव से पाकिस्तान जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उसे IMF से लोन तक नहीं मिल पा रहा है.
IMF ने अब सऊदी और UAE से लोन देने से पहले गारंटी मांग ली है. पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की कगार पर है और अब सऊदी प्रिंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके भाई नवाज शरीफ को उमरा पर बुलाया है. ऐसे में अगर सऊदी का बिना शर्त लोन देने का रुख जारी रहा तो फिर मुमकिन है कि पाकिस्तान जैसे देशों के लिए आगे की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी.