
मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच एचडीएफसी, एचयूएल और आईटीसी जैसे बड़े शेयरों में तेजी के चलते प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स बुधवार को 95 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स में दिन के कारोबार के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह 94.71 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़त के साथ 38,067.93 पर बंद हुआ. इसी तरह कारोबार के अंत में एनएसई निफ्टी 25.15 अंक या 0.22 प्रतिशत बढ़कर 11,247.55 पर पहुंच गया. इस बीच, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे बढ़कर 73.76 पर बंद हुआ.
3% की बढ़त टेक महिंद्रा में
सेंसेक्स में सबसे अधिक 3% की बढ़त टेक महिंद्रा में हुई, जिसके बाद टाइटन, नेस्ले इंडिया, एचयूएल, आईटीसी, एशियन पेंट्स और एचडीएफसी का स्थान रहा. दूसरी ओर भारती एयरटेल, टाटा स्टील, इंडसइंड बैंक, एमएंडएम और सन फार्मा में गिरावट हुई. कारोबारियों के मुताबिक अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की पहली बहस के बाद मिलेजुले वैश्विक संकेतों के चलते घरेलू शेयर बाजार में सतर्क रुख देखने को मिला. यूरोपीय शेयर बाजारों में शुरुआत गिरावट के साथ हुई.
मंगलवार को उतार-चढ़ाव
इससे पहले, मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहा. कारोबार के अंत में सेंसेक्स आठ अंक फिसलकर 37,973 पर जबकि निफ्टी पांच अंक नीचे आकर 11,222 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 10 शेयर तेजी के साथ बंद हुए, जबकि 20 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.
म्यूचुअल फंड प्रबंधकों के लिए नियम
इस बीच, शेयर मार्केट रेग्युलेट करने वाली संस्था सेबी ने म्यूचुअल फंड प्रबंधकों के लिए आचार संहिता जारी करने का फैसला किया है. संपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के मुख्य निवेश अधिकारियों को भी आचार संहिता के दायरे में लाया जाएगा. सेबी निदेशक मंडल की बैठक में कहा गया है कि संपत्ति प्रबंधन कंपनियों को स्वयं क्लियरिंग सदस्य बनने की भी अनुमति दी गई है. सीईओ की यह जिम्मेदारी होगी कि वह यह सुनिश्चित करे कि इन सभी अधिकारियों द्वारा आचार संहिता का पालन किया जाये.
फारेंसिंक जांच की देनी होगी जानकारी
इसके अलावा सूचनाओं की उपलब्धता में खामी को दूर करते हुए सेबी के निदेशक मंडल ने यह फैसला किया कि सूचीबद्ध कंपनियों को उनके खातों की फारेंसिंक जांच शुरू होने के बारे में जानकारी देनी होगी. निदेशक मंडल ने इसके साथ ही कार्पोरेट बॉन्ड बाजार में रेपो खरीद फरोख्त को बढ़ावा देने के लिये ‘लिमिटेड परपज रेपो क्लियरिंग कार्पोरेशन’ की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी.