
देश में रोजगार के मौके मुहैया कराना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. रोजगार के ज्यादातर अवसर भी बड़े शहरों में ही मौजूद रहे हैं. इसके लिए लोगों को छोटे शहरों-गांवों से चलकर बड़े शहरों में आने के लिए मजबूर होना पड़ता है. लेकिन अब नौकरियों के मामले में एक दिलचस्प बात सामने आई है. xpheno के एक सर्वे में दावा किया गया है कि नौकरियों के मौके पैदा करने के मामले में देश के छोटे शहरों ने बड़े शहरों को पीछे छोड़कर बाजी मार ली है. इतना ही नहीं छोटे शहरों में तो नौकरियों के मौके बढ़ रहे हैं जबकि बड़े शहरों में इनमें कमी आई है.
छोटे शहरों में बढ़े नौकरियों के मौके
एक स्टडी में दावा किया गया है कि जनवरी तक पिछले एक साल के दौरान देश के 9 बड़े शहरों में नई नौकरियों के मौके 16 फीसदी कम हुए हैं. जबकि इस दौरान छोटे शहरों में नौकरियों के अवसर 12 फीसदी बढ़े हैं. ये बात जॉब पोर्टल्स और कंपनियों की निकाली गई जॉब वैकेंसी पर हुए सर्वे के बाद सामने आई है. इस सर्वे से संकेत मिल रहा है कि नौकरी खोजने वालों की तलाश छोटे शहरों में जाकर खत्म हो सकती है.
बड़ी कंपनियों ने छोटे शहरों का किया रुख
छोटे शहरों में नौकरियों के मौके बढ़ने की एक बड़ी वजह कोरोना के बाद हुआ रिवर्स माइग्रेशन है. दरअसल, वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल की वजह से बड़े शहरों से वापस गए लोगों के लिए छोटे शहरों में स्थित अपने घरों से काम करना मुमकिन हो गया है. इन कर्मचारियों को छोटे शहरों में सस्ते रहन सहन के साथ ही घर पर रहने का फायदा भी मिल रहा है. ऐसे में इस तरह के टैलेंट की टियर टू और थ्री शहरों में उपलब्धता बढ़ने से एयरटेल, LTI माइंडट्री, मेक माई ट्रिप और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों ने इन शहरों का रुख किया है. टेक महिंद्रा ने नागपुर, इंदौर, भुवनेश्वर, विजयवाड़ा, तिरुवनंतपुरम, कोयम्बटूर और विशाखापत्तनम जैसे मिनी मेट्रो शहरों में सेंटर्स भी खोले हैं.
किन सेक्टर्स में बढ़े छोटे शहरों में मौके?
छोटे शहरों में जिन सेक्टर्स में नौकरियां मिल रही हैं उनमें स्टार्टअप, बैकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, SMEs, IT, हेल्थ और वेलनेस सेक्टर शामिल हैं. इसकी वजह है कि छोटे शहरों में जमीन औऱ टैलेंट सस्ता मिल जाता है. इससे कंपनियों के लिए अपने खर्चे घटाने में मदद मिलती है जिससे स्टार्टअप सेक्टर को कम खर्चों में अपना कारोबार शुरु करने का मौका मिल जाता है. शुरुआती पूंजी बचाने की वजह से ये कंपनियां जल्दी मुनाफे में आने का भरोसा कर सकती हैं.
BFSI में मिल रही हैं नौकरियां
बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस यानी BFSI सेक्टर की पैठ छोटे शहरों में लगातार बढ़ रही है. इसकी वजह है कि इनको जिस तरह के ग्राहकों की तलाश होती है वो रिवर्स माइग्रेशन की वजह से काफी संख्या में टियर-2,3 शहरों में आ गए हैं. ऐसे में BFSI सेक्टर को छोटे शहरों में कारोबार विस्तार की काफी संभावनाएं नजर आ रही हैं और वो यहां पर अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं.
आर्थिक सुस्ती ने IT कंपनियों को छोटे शहरों में बुलाया!
IT सेक्टर पर आर्थिक सुस्ती का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है. नई भर्तियों को घटाने के साथ ही सैलरी ऑफर्स को भी ये कंपनियां घटा रही हैं. ऐसे में छोटे शहर इनके लिए कारोबार को चलाए रखने का सबसे बड़ा ज़रिया बन सकते हैं. ये कंपनियां अभी टियर-3 शहरों में तो नहीं जा रही हैं लेकिन टियर-2 शहर इनको रास आ रहे हैं. बेहतर एयर कनेक्टिविटी वाले टियर-2 शहरों में अपने नए सेंटर्स खोलने से इनकी लागत कम हो रही है. इसके अलावा इनको सस्ता टैलेंट भी इन शहरों में मिल रहा है.
'मेक इन इंडिया' ने SMEs में बढ़ाई जॉब्स!
आत्मनिर्भर भारत अभियान के असर से देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेज रफ्तार से दौड़ रहा है. ऐसे में देश और विदेश की बड़ी कंपनियां भारत में जगह जगह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स लगा रही हैं. इन कंपनियों को भी कई तरह के कच्चे और तैयार माल के लिए छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनि्ट्स के भरोसे रहना होता है. ये छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स कम लागत के लिए छोटे शहरों में अपना कारोबार स्थापित कर रही हैं. यहां पर उनको लेबरफोर्स के साथ साथ स्किल्ड कर्मचारी भी आसानी से और कम खर्च में मिल जाते हैं.
हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में बढ़ी नौकरियां
हेल्थ और वेलनेस सेक्टर तो वैसे ही कोरोना के बाद लोगो के जागरुक होने से काफी तेज ग्रोथ कर रहा है. लेकिन छोटे शहरों में इसकी तेज ग्रोथ की वजह जागरुकता के साथ ही बड़े शहरों से लौटे लोगों की सतर्कता है. ये लोग बड़े शहरों की तरह फुल बॉडी चेकअप और इलाज कराने में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतते हैं. इससे हेल्थ और वेलनेस सेक्टर की बड़ी कंपनियों को भी छोटे शहरों में विस्तार के लिए मजबूत कारण मिल गया है.
विदेशी निवेश बना छोटे शहरों में रोजगार बढ़ने की वजह
आंकड़ों के मुताबिक 2022 में देश में करीब 55 हज़ार करोड़ डॉलर का FDI आया है. ये विदेशी निवेश केवल बड़े शहरों और चंद राज्यों तक सीमित नहीं है. ये निवेश देश के सभी राज्यों के छोटे बड़े शहरों में आया है. ऐसे में इस निवेश से पैदा होने वाले नौकरियों के मौकों से छोटे शहरों को भी अब बड़े शहरों के बराबर ही फायदा मिल रहा है.
इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली छोटे शहरों की तस्वीर
हमारे देश में कनेक्टिविटी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है. लेकिन जिस तरह से हाल के बरसों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से रोड नेटवर्क का विस्तार हुआ है उससे अब छोटे शहरों में आना जाना आसान हो गया है. इंफ्रास्ट्रक्चर के इस विस्तार ने छोटे शहरों ही नहीं गांवों तक नौकरियों के मौके पैदा कर दिए हैं. इसके साथ ही देशभर में किए जा रहे एयरपोर्ट्स निर्माण से भी छोटे-बड़े शहरों का अंतर कम होता जा रहा है.
ब्रांडिंग में मिलती है कंपनियों को मदद
छोटे शहरों में कारोबार शुरु करने से कंपनियां की क्षेत्रीय विविधता में इजाफा होता है. कंपनियों के प्लांट, ऑफिस होने से उनको वहां की स्थानीय जनता से जुड़ने में मदद मिलती है. लोगों से इस तरह सीधे जुड़ना ब्रांडिंग का खर्च घटाती है. शहर में उनके नाम के लैंडमार्क बन जाने से लोगों को कंपनियों के बारे में पता चलता है. ऐसे में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के ज्यादा ग्राहकों को सर्विस और प्रॉडक्ट्स बेचने वाली कंपनियों के लिए इन शहरों में जाना खर्च घटाने के साथ ही मजबूत ब्रांडिंग की वजह भी बनता है.
एजुकेशन संस्थानों ने बढ़ाया छोटे शहरों में टैलेंट पूल
देश में बीते कुछ बरसों में नामी मैनेजमेंट संस्थानों की संख्या में करीब 4-5 गुना तक इजाफा हुआ है. इससे छोटे शहरों में कैंपस प्लेसमेंट के लिए जाने वाली कंपनियों ने इन्हीं जगहों पर टैलेंट पूल मिल जाने से अब यहां पर कारोबार भी करना शुरु कर दिया है. पहले ये संस्थान केवल बड़े शहरों तक सीमित थे लिहाजा कंपनियों के प्लेसमेंट और कारोबार भी वहीं तक सीमित थे. इसके अलावा कंपनियों का मानना है कि छोटे शहरों से आने वाले टैलेंट में ज्यादा लगन होती है. उनके सपने बड़े होते हैं और वो इसके लिए काफी मेहनत करने को तैयार रहते हैं. वहीं एडटेक कंपनियां भी अब देशभर में टैलेंट तैयार कर रही हैं जो आने वाले समय में स्किल मैनपावर में इजाफा करेगा.
छोटे शहरों के बड़ा होने से देश विकसित बनेगा
छोटे शहरों में नौकरियां बढ़ने, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होने और इनके विकसित होने से देश को फायदा होगा. जिस तरह से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा जा रहा है उसमें छोटे शहरों का विकास होना बेहद ज़रुरी है. इसके लिए छोटे और बड़े शहरों को मिलकर काम करने की ज़रुरत है. माना जा रहा है कि छोटे शहरों से पलायन रुकने से भारत की ताकत में इजाफा होगा.
विदेशों में जाने वाले टैलेंट को रोकना ज़रुरी
छोटे शहरों में नौकरियों के मौकों में बढ़ोतरी को तो तरक्की का संकेत माना जा रहा है. लेकिन देश की संपूर्ण तरक्की के लिए सुझाव दिया जा रहा है कि भारत से जो शानदार टैलेंट विदेश जा रहा है उसकी रफ्तार कम की जाए. अगर यही टैलेंट बड़े शहरों में कारोबार शुरु करके रोजगार देने वाले युवाओं में तब्दील किया जा सके तो फिर देश के लिए बड़ी राहत की बात होगी. हालांकि छोटे शहर अभी इस मामले में बड़े शहरों से ताल नहीं मिला पा रहे हैं और वहां पर भी जरुरत है कि लोकल युवा कारोबार शुरु करें जिससे इन शहरों में रोजगार के मौके तेजी से बढ़ाए जा सकें.