
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोने में निवेश पर ज्यादा बेनिफिट के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना की शुरुआत की थी. यह योजना मार्केट से कम कीमत पर सोना में निवेश करने का मौका देती है और 8 साल की मैच्योरिटी अवधि पर 2.5 फीसदी का फिक्स रिटर्न भी देती है. साथ ही आठ साल के दौरान जितना सोने का दाम बढ़ता है, उसका भी फायदा दिया जाता है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को आरबीआई समय-समय पर जारी करता है, जिस दौरान आप निवेश कर सकते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि इसे हर दिन खरीदा और बेचा जा सकता है? आइए जानते हैं पूरी डिटेल.
दरअसल, सेकेंड्री मार्केट (शेयर बाजार) से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश का मौका दिया जाता है. यहां दो तरीके से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है. पहला- जब RBI सॉवरेन गोल्ड बाॉन्ड की किश्त जारी करता है और डेट अनाउंस करता है, उस दौरान SGB को बॉय कर सकता है. दूसरा- ये ऐसा तरीका है, जिसके तहत आरबीआई किश्त जारी कर रहा हो या ना हो, आप डीमैट अकाउंट से इसे बॉय कर सकते हैं.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के द्वारा SGB को लाइव मार्केट में खरीद और बेच सकते हैं. इसे और सिंपल भाषा में कहें तो बिना आरबीआई के डेट अनाउंस के बिना NSE के तहत SGB पर ट्रेडिंग की जा सकती है. इसकी कोई एक्सपाइरी नहीं होती है. जबतक इसकी मैच्योरिटी पूरी नहीं हो जाती है आप इसे खरीदकर रख सकते हैं. या फिर आप चाहें तो मैच्योरिटी से पहले ही बेच सकते हैं.
सेकेंड्री मार्केट से खरीदने पर क्या फायदे?
लाइव मार्केट में कैसे खरीदें SGB?
SGB NSE Trading Chart
सेकेंड्री मार्केट में खरीदते वक्त रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप SGB को सेकेंड्री मार्केट से खरीदते हैं तो कोशिश करनी चाहिए कि ये आपको कम से कम प्राइस पर मिल जाए. साथ ही समय-समय पर इसके प्राइस को ट्रैक करते रहना चाहिए. जिस भी एसजीबी को खरीद रहे हैं, उसके मैच्योरिटी पीरियड, लिक्विडीटी और अन्य जरूरी चीजों के बारे में जान लेना चाहिए.
कितना लगेगा टैक्स?
अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को सेकेंड्री मार्केट से खरीदा है और फिर इसे सेकेंड्री मार्केट में ही बेच दिया है, तो आपके प्रॉफिट पर शॉर्ट या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. लेकिन अगर आप इसे मैच्योरिटी तक होल्ड करके रखते हैं और RBI को वापस बेचते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होता है. हालांकि 2.5 फीसदी का ब्याज टैक्सेबल इनकम के तहत आता है.