Advertisement

Success Story: कबाड़ से शुरुआत... अब 'खजाना' निकालती है इनकी कंपनी, देखते ही देखते बन गए अरबपति!

हम बात कर रहे हैं वेदांता रिसोर्सेज के फाउंडर और चेयरमैन अन‍िल अग्रवाल (Anil Agarwal) के बारे में. इनकी सफलता की कहानी काफी प्रेरणादायक है. वेदांता से पहले इन्‍होंने 9 बिजनेस की शुरुआत की थी, लेकिन सभी में फेल रहे.

Vedanta Anil Agrawal Vedanta Anil Agrawal
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 26 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

लगन और मेहनत से हर मुकाम पाया जा सकता है. ऐसा ही कुछ बिहार के एक शख्‍स ने कर दिखाया, जिसने देखते ही देखते अरबों डॉलर की दिग्‍गज कंपनी खड़ी कर दी. कंपनी शुरू करने के लिए इस व्‍यक्ति ने घर से भी कोई सपोर्ट नहीं लिया और खाली हाथ मुंबई चला आया. इस शख्‍स को ये भी नहीं पता था कि शहर की दुनिया कैसी है और किस रफ्तार से आगे भाग रही है. इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि मुंबई में पहली बार इस शख्‍स ने डबल डेकर बस और पीली टैक्‍सी देखी थी. आइए जानते हैं कौन हैं ये शख्‍स? जिसने कबाड़ के शुरुआत करते हुए आज एक बड़ी कंपनी खड़ी कर दी. 

Advertisement

हम बात कर रहे हैं वेदांता रिसोर्सेज के फाउंडर और चेयरमैन अन‍िल अग्रवाल (Anil Agarwal) के बारे में. इनकी सफलता की कहानी काफी प्रेरणादायक है. वेदांता से पहले इन्‍होंने 9 बिजनेस की शुरुआत की थी, लेकिन सभी में फेल रहे. हालांकि इन्‍होंने कभी भी हार नहीं मानी और एक बार फिर कंपनी की शुरुआत की. यह कंपनी वेदांता रिसोर्सेज थी, जो आज दुनिया भर में मशहूर है और इसकी वैल्‍यूवेशन अरबों डॉलर में है. अनिल अग्रवाल देश के सफल कारोबारियों में से एक माने जाते हैं. सबसे खास बात तो ये है कि अनिल अग्रवाल कभी कॉलेज गए ही नहीं, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लिया. 

बिहार से खाली हाथ आए मुंबई 
अनिल अग्रवाल बिहार के पटना में रहते थे. उन्‍होंने काफी कम उम्र करीब 20 साल में ही बिहार छोड़ दिया और खाली हाथ मुंबई आ गए थे. उनके पास उस समय केवल एक टिफिन बॉक्‍स था, मुंबई आने के बाद उन्‍होंने बहुत सी चीज पहली बार देखी थी, जिसमें डबल डेकर बस और पीली टैक्‍सी भी थी. यहां आने के बाद उन्‍होंने जमकर मेहनत शुरू कर दी और फिर साल 1970 में कबाड़ के धंधे से अपने कारोबारी जीवन की शुरुआत की. पहले बिजनेस से इन्‍हे अच्‍छी कमाई हुई. 

Advertisement

9 बिजनेस हुए फेल फिर भी नहीं मानी हार
बात साल 1976 की है, जब अनिल अग्रवाल ने शमशेर स्‍टर्लिंग केबल कंपनी को खरीदा था. लेकिन बाद में धंधा नहीं चला. हालत यहां तक पहुंच गया चुका था कि वे कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं दे पा रहे थे. इसके बाद अग्रवाल ने एक के बाद एक 9 बिजनेस की शुरुआत की. हालांकि सभी फेल होते चले गए. अनिल अग्रवाल ने कहा कि उन्‍होंने 20 से 30 साल तक स्‍ट्रगल किया. वे लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. 

कबाड़ से कैसे बनाई खजाना निकालने की कंपनी? 
अनिल अग्रवाल ने कबाड़ बेचकर अपना कारोबार शुरू किया और माइंस और मेटल के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक बन गए.  कैम्‍ब्र‍िज में अपने संबोधन के दौरान अनिल अग्रवाल ने बताया कि अपने पिता के कारोबार के लिए वे स्कूल छोड़ दिया और पुणे और फिर मुंबई आ गए. उन्होंने अपना करियर स्क्रैप डीलर के तौर पर शुरू किया. उन्होंने कुल नौ अलग-अलग बिज़नेस शुरू किए, लेकिन सभी नौ बार वे फेल हो गए. तनाव इतना बढ़ा कि उन्हें अवसाद भी झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज Vedanta Ltd का मार्केट कैप करीब 2 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. 

Advertisement

क्‍या करती है वेदांता? 
Anil Agrawal की वेदांता लिमिटेड मेटल और खनन सेक्‍टर में शामिल है. यह मिनरल्स, ऑयल एंड गैस को निकालती है, जो किसी खजाने से कम नहीं है. कंपनी के करीब 64 हजार कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्टर्स हैं. मुख्य रूप से यह कंपनी भारत, अफ्रिका, आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया में है. वेदांता लिमिटेड का मुख्यालय मुंबई में है. वेदांता, मुख्य रूप से गोवा, कर्नाटक, राजस्थान, और ओडिशा में लौह अयस्क, सोना, और एल्यूमीनियम खानों में काम करती है. वेदांता के प्रोडक्ट दुनिया भर में बिकते हैं. वेदांता की प्राथमिक रुचि एल्यूमीनियम, जस्ता-सीसा-चांदी, तेल और गैस, लौह अयस्क, इस्पात, तांबा, बिजली, फेरो मिश्र धातु, निकल, अर्धचालक, और कांच में है. 

इतनी दौलत के मालिक अनिल अग्रवाल 
अक्टूबर 2018 में अग्रवाल ने वेदांता को निजी कंपनी बना लिया, जिसके बाद उन्होंने धातु कंपनी के एक तिहाई हिस्से के लिए 1 बिलियन डॉलर से अधिक का भुगतान किया, जो पहले से उनके पास नहीं था. वेदांता ने गुजरात में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले प्लांट बनाने के लिए 20 बिलियन डॉलर का संयुक्त निवेश करने के लिए ताइवान की फॉक्सकॉन के साथ डील की है. फोर्ब्‍स के मुता‍बिक अनिल अग्रवाल की नेटवर्थ 1.6 अरब डॉलर (1339 करोड़ रुपये) है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement