Advertisement

Jet Airways: सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश और फंस गए 1.43 लाख निवेशक, बर्बादी की कगार पर खड़े!

गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेट एयरवेज (Jet Airways) के शेयर 5 फीसदी के लोअर सर्किट के बाद बंद हुए, जो बीएसई पर 34.04 रुपये पर बंद हुआ. 30 सितंबर तक रिटेल शेयरहोल्‍डर्स (जिनकी निवेशित पूंजी 2 लाख रुपये से कम है) के पास जेट में 19.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी.

Jet Airways Jet Airways
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 08 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी 7 नवंबर 2024 को जेट एयरवेज की संपत्ति बेचने का आदेश दिया. एनसीएलएटी ने जेट एयरवेज का मालिकाना हक मंजूर हो चुके रिजॉल्यूशन प्लान के तहत जालान-कालरॉक कंसोर्टियम (JKC) को देने का फैसला सुनाया था, जिसके बाद SBI और अन्‍य केडिटर्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल डिशिजन लिक्विडेट करने यानी संपत्ति बेचने का दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लाखों रिटेल शेयरहोल्‍डर्स पर मुसीबत आ चुकी है, क्‍योंकि उनके पैसे इस कंपनी के शेयरों में फंस चुके हैं. 

Advertisement

गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेट एयरवेज (Jet Airways) के शेयर 5 फीसदी के लोअर सर्किट के बाद बंद हुए, जो बीएसई पर 34.04 रुपये पर बंद हुआ. 30 सितंबर तक रिटेल शेयरहोल्‍डर्स (जिनकी निवेशित पूंजी 2 लाख रुपये से कम है) के पास जेट में 19.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. अन्य प्रमुख शेयरधारकों में पंजाब नेशनल बैंक (26 प्रतिशत), एतिहाद एयरवेज (24 प्रतिशत) और पूर्ववर्ती प्रमोटर (25 प्रतिशत) शामिल हैं. कंपनी का करेंट मार्केट कैपिटलाइजेशन 386.69 करोड़ रुपये है, जिसमें रिटेल शेयरहोल्डिंग की कीमत 74.6 करोड़ रुपये है. 

एनसीएलएटी का फैसला खारिज 
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें स्वीकृत समाधान योजना के तहत जेट को जालान-कलरॉक कंसोर्शियम (जेकेसी) को ट्रांसफर करने को सही ठहराया गया था. कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य क्रेडिटर्स की अपील को स्वीकार कर लिया. न्यायालय ने कहा कि कंसोर्शियम समाधान योजना में निर्धारित समय के भीतर पहली किश्त भी डालने में विफल रहा. 

Advertisement

कैसे अर्श से फर्श पर आई ये कंपनी 
एक समय भारत की प्रमुख एयरलाइन रही जेट एयरवेज को 2010 के दशक के अंत में गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें बढ़ते कर्ज, बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कम लागत वाली एयरलाइंस के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा शामिल थी. साल 2019 तक संकट बढ़ने के कारण इसे बंद कर दिया गया.  तब जेट एयरवेज का कर्ज 7,500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा हो गया था. 

फिर इसके बाद एसबीआई और अन्‍य केडिटर्स एयरलाइन को दिवालिया कार्यवाही के लिए NCLT के पास गए. जिसके बाद कलरॉक कैपिटल और मुरारी लाल जालान जैसे निवेशकों ने दिलचस्‍पी दिखाई और एक  रिवाइवल प्लान रखा जिसे 2021 में NCLT की मंजूरी मिली. हालांकि ये भी प्‍लान सफल नहीं हो सका. साल 2023 तक जेट के रिवाइवल की उम्‍मीदें फीकी पड़ने लगी थीं, क्‍योंकि कलरॉक-जालान कंसोर्शियम वित्तीय दायित्‍वों को पूरा नहीं कर पाए. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जेट एयरवेज के दिवालियापन की कहानी का अंत हो चुका है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement