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बिकने वाली थी Bisleri... टाटा से अटक गई डील! ये है बड़ी वजह

बीते साल 2022 में रमेश चौहान के नेतृत्व वाली बिसलेरी (Bisleri) को बेचने की कवायद शुरू हुई थी और साल के अंत में टाटा समूह (Tata Group) के साथ डील पक्की हो गई थी. दोनों ही पक्ष ट्रांजेक्शन स्ट्रक्चर को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे थे लेकिन ये डील अटक गई है.

बीते साल 2022 में टाटा-बिसलेरी में हुई थी डील बीते साल 2022 में टाटा-बिसलेरी में हुई थी डील
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 10:23 AM IST

भारत में बोतलबंद पानी के सबसे पॉपुलर ब्रांड बिसलेरी (Bisleri) की टाटा ग्रुप (Tata Group) के साथ डील अटक गई है. ये सौदा करीब 1 अरब डॉलर में होने वाला था और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा था. लेकिन अब खबर आई है कि कुछ कारणों की वजह से फिलहाल दोनों पक्षों में बातचीत रुकी हुई है. टाटा ने बीते साल ही रमेश चौहान (Ramesh Chauhan) के नेतृत्व वाली पैकेज्ड वाटर कंपनी बिसलेरी इंटरनेशनल के साथ ये डील की थी. 

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वैल्यूएशन को लेकर खटाई में डील
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह की Bisleri में स्टेक हासिल करने के लिए चल रही बातचीत के बाद दोनों ही पक्ष ट्रांजेक्शन स्ट्रक्चर को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे थे. सूत्रों के मुताबिक, अब कंपनी की वैल्यूएशन को लेकर डील अटक गई है. रिपोर्ट की मानें तो रमेश चौहान Tata Group के साथ अपनी कंपनी बिसलेरी की डील से 1 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन वैल्यूएशन को लेकर Tata-Bisleri की बातचीत फाइनल नहीं हो पा रही है. 

फिर शुरू हो सकती है सौदे पर चर्चा
रिपोर्ट में नाम न छापने की शर्त पर इस मामले से परिचित लोगों ने कहा है कि टाटा और बिसलेरी के बीच इस सौदे को लेकर चर्चा फिर से शुरू हो सकती है. यही नहीं इस डील में अन्य संभावित दावेदारों के नाम भी सामने आ सकते हैं. हालांकि, फिलहाल इस मुद्दे को लेकर दोनों की कंपनियों की ओर से किसी तरह की टिप्पणी से साफ इनकार कर दिया गया है. 

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पैकेज्ड वाटर मार्केट पर कब्जा
Bisleri के इतिहास पर नजर डालें तो साल 1969 में चौहान बिजनेस फैमिली द्वारा महज 4 लाख रुपये में इसे एक इतालवी कंपनी से खरीदा गया था, जबकि 2022 में टाटा ग्रुप के साथ इसका सौदा एक अरब डॉलर में होने का अनुमान जताया गया था. कभी बिसलेरी का पानी कांच की बोतलों में बेचा जाता था और आज देश में पैकेज्ड वाटर का मार्केट 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का है. इसमें से 60 फीसदी हिस्सा असंगठित है. बिसलेरी की संगठित बाजार में हिस्सेदारी करीब 32 फीसदी है. 

देश भर में 122 ऑपरेशनल प्लांट
वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, आज देश में बिसलेरी के 122 से अधिक ऑपरेशनल प्लांट हैं. जबकि पूरे भारत में लगभग 5,000 ट्रकों के साथ 4,500 से अधिक इसका डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क है. बिसलेरी के अध्यक्ष रमेश चौहान ने नवंबर 2022 में एक इंटरव्यू के दौरान कंपनी को बेचने की बड़ी वजह का खुलासा किया था. 

रमेश चौहान के पास नहीं कोई उत्तराधिकारी
82 वर्षीय रमेश चौहान ने कहा था कि खराब स्वास्थ्य के अलावा और भी कई ऐसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से बिसलेरी का सौदा (Bisleri Deal) करने की नौबत आई है. रिपोर्ट की मानें तो उनके पास कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए कोई उत्तराधिकारी नहीं है. उनकी बेटी और बिसलेरी की वाइस चेयरपर्सन जयंती (Jayanti) भी कारोबार के लिए बहुत उत्सुक नहीं है. जिसके चलते बिसलेरी को बेचने की तैयारी कर ली गई. 

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