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इलाज पर कमाई का 20% खर्च कर देते हैं इन शहरों के लोग, 56% ने हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में सुना भी नहीं

10,000 से अधिक रिटेल विक्रेताओं की प्रतिक्रियाओं के आधार पर सर्वे का नतीजा निकाला गया है. सर्वे में टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में बीमा की कम पहुंच पर भी फोकस किया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 55 प्रतिशत उत्तर देने वालों ने बीमा के बारे में कभी नहीं सुना.

हेल्थ पर कितना खर्च करते हैं लोग. हेल्थ पर कितना खर्च करते हैं लोग.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

भारत हेल्थ इंडेक्स ने खुलासा किया कि टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय औसतन अपनी घरेलू आय का 15-20 फीसदी मेडिकल खर्च पर खर्च करते हैं. यह आंकड़ा डिजिटल और बैंकिंग नेटवर्क PayNearby द्वारा एक प्रेस रिलीज के जरिए सामने आया है.

कंपनी ने भारत के 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इंडेक्स का पहला एडिशन जारी किया. देश के अग्रणी डिजिटल और बैंकिंग नेटवर्क ने इस बात पर भी फोकस डाला कि भारत की टियर-2 और टियर-3 आबादी में से केवल 25 प्रतिशत के पास मॉडर्न हेल्थ देखभाल तक आसान पहुंच है.

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आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच

10,000 से अधिक रिटेल विक्रेताओं की प्रतिक्रियाओं के आधार पर सर्वे का नतीजा निकाला कि केवल 15 प्रतिशत उत्तरदाताओं के पास 5 किमी के दायरे में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं. मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के बारे में बात करते हुए पता चला कि केवल 25 फीसदी के पास अपने क्षेत्र में जनरल फिजिशियन तक पहुंच थी. जबकि 92 प्रतिशत ने जवाब दिया कि हृदय रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ जैसे कोई विशेष डॉक्टर उनके एरिया में उपलब्ध नहीं हैं.

दवाइयां खरीदने के लिए 10 किलोमीटर की यात्रा

यदि कोई व्यक्ति लाइलाज बीमारी से पीड़ित है तो 90 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें इलाज के लिए किसी अलग स्थान पर जाने की जरूरत पड़ती है. PayNearby की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 85 फीसदी लोगों को विशेष दवाएं खरीदने के लिए 10 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करनी पड़ती है. विशेष रूप से 52 प्रतिशत ने कहा कि उनके पास 5 किमी के दायरे में एक फार्मेसी है, जो उनकी बुनियादी चिकित्सा जरूरतों को पूरा करती है.

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मेडिकल खर्चों का भुगतान

कंपनी ने यह भी नोट किया कि केवल 47 प्रतिशत उत्तरदाताओं के पास थर्मामीटर था. जबकि मात्र 7 प्रतिशत के पास बल्ड प्रेशर और शुगर मॉनिटर करने वाले उपकरण थे. हेल्थ खर्चों के वित्तपोषण के लिए 23 प्रतिशत लोगों ने अनौपचारिक कर्ज या उधार पर भरोसा किया. जबकि 6 प्रतिशत ने हेल्थ बिलों का भुगतान करने के लिए अपनी संपत्ति बेचने का सहारा लिया. लेकिन 53 प्रतिशत के महत्वपूर्ण हिस्से ने इन खर्चों को कवर करने के लिए अपनी बचत का इस्तेमाल किया.

कितने लोगों के पास हेल्थ बीमा?

सर्वे में टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में बीमा की कम पहुंच पर भी फोकस किया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 55 प्रतिशत उत्तर देने वालों ने बीमा के बारे में कभी नहीं सुना. बीमा के बारे में जागरूक लोगों में से केवल 32 प्रतिशत ने किसी समय बीमा का विकल्प चुना है. जबकि मात्र 28 प्रतिशत के पास अपने या अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा है. 88 प्रतिशत बीमा धारकों ने इसे सरकार या राज्य प्रायोजित योजनाओं से प्राप्त किया. जबकि 10 फीसदी से कम ने इसे निजी बीमा प्रोवाइडर से प्राप्त किया है.

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