Advertisement

3 विकल्प... BJP, NDA या INDIA अलायंस की सरकार, जानिए फिर इकोनॉमी और बाजार का क्या होगा?

ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने तीन सिनेरियो में लोकसभा चुनाव परिणाम आने पर अर्थव्‍यवस्‍था और बाजार पर क्‍या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर अपने विचार शेयर किए हैं. 

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 20 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 11:33 PM IST

देश में लोकसभा चुनाव 2024 के तारीखों का ऐलान हो चुका है. इस घोषणा के साथ ही आचार संहिता (MCC) भी लागू हो गई है. वहीं राजनीति के जानकार आगामी चुनाव को लेकर अपनी भविष्‍यवाणी करने में जुटे हुए हैं. इस बीच ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने तीन सिनेरियो में चुनाव परिणाम आने पर अर्थव्‍यवस्‍था और बाजार पर क्‍या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर अपने विचार शेयर किए हैं. 

Advertisement

 बिजनेस टुडे के मुताबिक, विदेशी ब्रोकरेज फर्म UBS ने कहा कि कई जनमत सर्वे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शानदार जीत की संभावना व्‍यक्‍त कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार कार्यकाल मिलेगा. इसके उलट INDIA गठबंधन भी पूरी ताकत लगा रही है. अगर परिणाम विपरीत आते हैं तो आर्थिक मोर्चे पर क्या बदलाव संभव होगा, इसका भी अनुमान लगाया जा रहा है. 

बीजेपी के सत्ता में आने पर क्‍या होगा असर? 
UBS ने कहा कि बीजेपी को बहुमत से जीत मिलती है तो वह अपने पॉलिसी पर फोकस करेगी, जो बिजनेस सेंटीमेंट और प्राइवेट कॉर्पोरेट कैपिटल एक्सपेंडिचर वसूली के लिए अच्‍छा संकेत हो सकता है. इसके अलावा, क्‍लीन एनर्जी चेंजेज, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, मैन्‍युफैक्‍चर और युवाओं, गरीबों, महिलाओं और किसानों समेत अन्‍य सेक्‍टर्स में सुधार को प्रगति मिल सकती है.  

Advertisement

गठबंधन से सत्ता में आई भाजपा तो क्‍या होगा? 
दूसरे सिनेरियो में देखें तो अगर भाजपा गठबंधन के साथ सत्ता में आती है तो कुछ पॉलिसी होल्‍ड या रुक सकती हैं. यूबीएस ने कहा कि इसमें विनिवेश, भूमि विधेयक और समान नागरिक संहिता समेत कुछ कठोर पॉलिसी पर रोक लगने की संभावना है.  

इंडिया गठबंधन सत्ता में आई तो क्‍या होगा? 
तीसरे सिनेरियो में अगर नरेंद्र मोदी की नेतृत्‍व वाली भाजपा सरकार को पछाड़कर इंडिया गठबंधन सत्ता में आती है तो इकोनॉमी पर तुरंत इसका असर नहीं दिखेगा, लेकिन शेयर बाजार पर त्वरित रिक्शन संभव है. हालांकि ये भी माना है कि इकोनॉमी के फ्रंट पर आगे चलकर नीतियों में बदलाव हो सकता है. खासकर राजकोषीय मोर्चे पर अनुमान है. यूबीएस ने यह भी कहा कि राजनीतिक नतीजों के कारण कमजोर प्राइवेट कॉर्पोरेट कैपिटल एक्सपेंडिचर वसूली में भी देरी आ सकती है.

गौरतलब है कि यूबीएस ने पिछले चार चुनावों के आम चुनाव घोषणापत्र का विश्‍लेषण किया और निष्‍कर्ष निकाला कि मोदी सरकार कांग्रेस की तुलना में अपने घोषणापत्र को पूरा करने में बेहतर थी. मोदी सरकार ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के साथ आर्थिक सुधारों को संतुलित करने पर फोकस किया है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement