
'मुझे फर्क नहीं पड़ा...' ये हम नहीं कह रहे, बल्कि शेयर मार्केट (Stock Market) कुछ ऐसा ही बोलता नजर आ रहा है. आमतौर पर देश में होने वाले चुनाव (Election) हों या बजट (Budget) में होने वाले फायदेमंद ऐलान या फिर देश में ब्याज दरों पर RBI का फैसला, इन सब मौकों पर होने वाली घोषणाओं का सीधा असर शेयर बाजर (Stock Market) पर देखने को मिलता रहा है, लेकिन इस बार बाजार की चाल समझ से परे नजर आ रही है.
दरअसल, बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को 7 लाख से बढ़ाकर 12 लाख कर दिया गया, फिर इसके बाद RBI ने रेपो रेट में कटौती कर दी और यही नहीं राजधानी दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में BJP ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया, लेकिन शेयर बाजार पर इसका मामूली असर भी देखने को नहीं मिला. ऐसा क्यों, ये सवाल हर किसी के मन में उठ रहा होगा, आइए जानते हैं इसके पीछे की बड़ी वजह...
एक के बाद एक चार गुड न्यूज
सबसे पहले बताते हैं बीते दिनों आईं एक के बाद एक चार Good News के बारे में, तो पहली 1 फरवरी 2025 को आई, जब मोदी 3.0 का Budget 2025 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स फ्री (Tax Free) कर दिया, यानी इतनी कमाई करने वालों को अब एक भी पैसा Income Tax नहीं देना होगा. इसके बाद दूसरी गुड न्यूज भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से आई, जब पांच साल के इंतजार के बाद आखिरकार RBI ने रेपो रेट में कटौती (Repo Rate Cut) का ऐलान किया. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 6.50 से 6.25 कर दिया.
तीसरी गुड न्यूज भी आरबीआई की ओर से आई, जब गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने का ऐलान किया. वहीं चौथी गुड न्यूज दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे के रूप में आई, जिसमें BJP को स्पष्ट बहुमत मिला. लेकिन इन चारों ही मौकों पर शेयर बाजार ने कोई रिएक्ट नहीं किया और या तो फ्लैट बंद हुआ या फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली.
बजट वाले दिन शेयर बाजार: Budget 2025 में 12 लाख की इनकम को टैक्स फ्री करने समेत कई ऐलान हुए, लेकिन शेयर मार्केट क्लोह होने तक बाजार में उत्साह नजर नहीं आया. अंत में Sensex महज 5 अंक चढ़कर 77505.96 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 26 अंक चढ़कर 23,482.15 पर क्लोज हुआ.
आरबीआई के ऐलान वाले दिन बाजार: रिजर्व बैंक ने बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को रेपो रेट कट के साथ ही बैंकिंग प्रणाली दुरुस्त करने के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुआ. मार्केट क्लोज होने पर सेंसेक्स 197.97 अंक फिसलकर 77,860.19 के लेवल पर, जबकि निफ्टी फिसलकर 23,559.95 पर बंद हुआ था.
दिल्ली में चुनावी जीत का भी असर नहीं: Delhi Election 2025 में भाजपा की 27 साल बाद सत्ता में वापसी हुई, स्पष्ट बहुमत के साथ BJP ने AAP को शिकस्त दी. इसके बाद आज जब शेयर बाजार खुला, तो इस जीत का जश्न नजर नहीं आया और सेंसेक्स-निफ्टी तेज गिरावट लेकर खुले. यही नहीं दोपहर 12 बजते-बजते बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 662 अंक, तो एनएसई का निफ्टी करीब 200 अंक फिसलकर कारोबार कर रहा था.
आखिर क्यों खड़ा नहीं हो रहा शेयर बाजार?
अब बात करते हैं कि आखिर वो क्या कारण हैं, जिनके चलते एक के बाद एक आई गुड न्यूज भी शेयर बाजार पर असर नहीं डाल सकीं. तो एक नहीं, बल्कि पांच बड़े कारण हैं.
पहला कारण- ट्रंप टैरिफ का दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पद संभालने के साथ ही टैरिफ वॉर (Tariff War) छेड़ दिया. पहले चीन, मेक्सिको और कनाडा को निशाने पर लेते हुए ट्रंप ने अन्य देशों पर सख्ती के संकेत दिए, तो बीते सप्ताह उन्होंने नया ऐलान करते हुए अमेरिका में सभी स्टील और एल्यूमिनियम आयातों पर 25% शुल्क लगाने की घोषणा की है. बता दें कि इस सेक्टर से जुड़ी भारतीय कंपनियों का भी अमेरिका में बड़ा कारोबार है और देश से अमेरिका को हर साल अरबों डॉलर का स्टील और एल्यूमिनियम निर्यात किया जाता है. इसके चलते न केवल इस सेक्टर की कंपनियों के शेयरों पर, बल्कि शेयर बाजार पर भी दबाव दिख रहा है.
मूडीज रेटिंग्स ने भी सोमवार को कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी स्टील और एल्युमीनियम आयात पर अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा के बाद भारतीय उत्पादकों को अपने प्रोडक्ट के निर्यात में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
दूसरा कारण- रुपये में जारी गिरावट
किसी भी देश की करेंसी की वैल्यू घटना, उसकी इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर नहीं होती और फिलहाल भारतीय करेंसी रुपया (Rupee) हर रोज गिरने का रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है. बजट पेश होने के दो दिन बाद रुपये ने जहां पहली बार 87 का आंकड़ा पार किया, तो इसके बाद संभलने के बजाय और गिरता चला जा रहा है. सोमवार को शुरुआती कारोबार में ये 44 पैसे फिसलकर 87.94 के ऑल टाइम लो-लेवल पर आ गया. इसका दबाव भी शेयर बाजार में गिरावट के रूप में देखने को मिला है. हालांकि, रिजर्व बैंक इसे चिंता की बात नहीं मान रहा है.
तीसरा कारण- FPI की बिकवाली जारी
विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों से निकलने का सिलसिला लगातार जारी है. जनवरी में जबरदस्त निकासी के बाद फरवरी में अब तक FPI ने 10,179 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले हैं. भारतीय बाजारों के प्रति कम आकर्षण और रुपये में गिरावट के साथ डॉलर इंडेक्स (108.37) में लगातार मजबूती के चलते विदेशी निवेशकों की बेरुखी का आलम जस का तस है. इस दबाव के चलते भी शेयर बाजार खड़ा नहीं हो पा रहा है. US Dollar में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के चलते निवेशक भारतीय बाजारों से पैसे निकालकर अमेरिकी बाजारों में मोटा मुनाफा पाने के लिए लगा रहे हैं.
चौथा कारण- खरे नहीं उतर रहे तिमाही नतीजे
कंपनियां हर तिमाही के पूरा होने के बाद अपने प्रॉफिट और घाटे के परिणाम पेश करती हैं और फिलहाल दिसंबर तिमाही (Q3 Results) आने का सिलसिला जारी है. लेकिन ये मिले-जुले हैं, तमाम बड़ी कंपनियों ITC से NHPC तक Tata Chemicals से लेकर Adani Enterprises और Swiggy तक को तगड़ा घाटा हुआ है. उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे तिमाही नतीजों को भी शेयर बाजार पर बड़े दबाव के रूप में देखा जा रहा है.