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WPI Inflation: आम आदमी बेहाल, खुदरा के बाद थोक महंगाई दर में भारी उछाल

WPI Inflation: मार्च महीने में भी थोक महंगाई दर दोहरे अंकों में रही. खाने-पीने के सामान और मैन्यूफैक्चर्ड आइटम्स के दाम में इजाफे से थोक महंगाई दर में ये उछाल देखने को मिला.

सरकार ने सोमवार को जारी किए थोक महंगाई के आंकड़े सरकार ने सोमवार को जारी किए थोक महंगाई के आंकड़े
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST
  • खाने-पीने के सामान हुए महंगे
  • मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ी

WPI Inflation: मार्च महीने में भारत की थोक महंगाई दर (WPI Inflation) 14.55 फीसदी पर पहुंच गई. ईंधन (फ्यूल) और फूड की कीमतों में उछाल की वजह से मार्च में थोक महंगाई दर में फरवरी के मुकाबले 1.44 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली. इस साल फरवरी में थोक महंगाई दर 13.11 फीसदी पर रही थी. पिछले साल मार्च में थोक महंगाई दर 7.89 फीसदी पर रही थी. 

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सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है, "रूस-यूक्रेन के बीच गतिरोध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन के बाधित होने से नेचुरल गैस, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल इत्यादि की कीमतों में उछाल से मुख्य रूप से मार्च 2022 में महंगाई की दर ऊंची रही."   

खाने-पीने के सामान हुए महंगे

सरकार की ओर से सोमवार को जारी डेटा के मुताबिक मार्च, 2022 में फूड इंफ्लेशन 8.71 फीसदी पर पहुंच गया जो फरवरी में 8.47 फीसदी पर रहा था. 

कॉमर्स मिनिस्ट्री के फूड आइटम्स की लिस्ट में अनाज, धान, गेहूं, दालें, सब्जियां, आलू, प्याज, फल, दूध, अंडे, मांस और मछली शामिल हैं. 

ये चीजें भी हुईं महंगी

मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, फ्यूल और पावर इंफ्लेशन मार्च में 34.52 फीसदी पर पहुंच गया जो फरवरी में 31.5 फीसदी पर था. मिनरल फ्यूल की कीमतों में 9.19 फीसदी की बढ़ोतरी की वजह से फ्यूल और पावर इंफ्लेशन में ये तेजी आई है.  

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मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ी

मार्च में मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई 10.71 फीसदी पर पहुंच गई, जो फरवरी में 9.84 फीसदी पर थी. इस कैटेगरी में वेजिटेबल और एनिमल ऑयल एवं फैट्स, बीवरेजेज, तंबाकू प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, Wearing Apparel, लेदर और संबंधित प्रोडक्ट्स एवं अन्य शामिल हैं.

17 महीने के उच्च स्तर पर खुदरा महंगाई

थोक महंगाई दर का ये आंकड़ा ऐसे समय में आया जब खुदरा महंगाई दर पहले ही रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है. पिछले महीने खुदरा महंगाई दर 6.95 फीसदी पर पहुंच गई. ये 17 महीने का उच्च स्तर है. 

आरबीआई ने शिफ्ट किया फोकस

आरबीआई ने बढ़ती महंगाई को संज्ञान में लिया है. इसके बाद केंद्रीय बैंक ने बढ़ती महंगाई से निपटने की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया है. 

महंगाई से जुड़े अनुमान में किया संशोधन

आरबीआई ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए महंगाई दर से जुड़े अनुमान को 4.5 फीसदी से बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया है. केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले लेते समय CPI या खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है. केंद्रीय बैंक इसके लिए थोक महंगाई दर पर गौर नहीं करता है.

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