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अडानी समूह पर अमेरिका में जांच की आंच, कांग्रेस बोली- गहरी सांठगांठ, बीजेपी का जवाब- उत्साहित ना हों...

उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिका में धोखाधड़ी और रिश्वत के आरोप लगे हैं. उन पर अपनी कंपनी को कॉन्ट्रेक्ट दिलाने के लिए 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने और इस मामले को छिपाने का दावा किया गया है. इस मामले में कांग्रेस ने अडानी समूह के लेन-देन की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराने की अपनी मांग दोहराई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. बीजेपी ने भी पलटवार किया है.

अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं. अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

उद्योगपति गौतम अडानी अमेरिका में धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों पर घिर गए हैं. इस मामले में कांग्रेस ने अडानी के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश की है और इसे गहरी सांठगांठ का हिस्सा करार दिया है. वहीं, कांग्रेस के हमलों पर बीजेपी ने पलटवार किया है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा, आरोप लगाने से पहले पढ़ लेना चाहिए. अनावश्यक उत्साहित होने की जरूरत नहीं है.

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अडानी ग्रुप का कारोबार बंदरगाहों और एयरपोर्ट से लेकर ऊर्जा सेक्टर तक फैला है. अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया कि अडानी समूह के अध्यक्ष, उनके भतीजे सागर अडानी और छह अन्य ने राज्य बिजली वितरण कंपनियों के साथ सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर 2,029 करोड़ रुपये ($265 मिलियन) की रिश्वत दी है. ये रिश्वत कथित तौर पर 2020 और 2024 के बीच दी गई है.

अमेरिकी अभियोजकों ने दावा किया कि यह फैक्ट अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से छिपाया गया, जिनसे अडानी समूह ने सौर ऊर्जा परियोजना के लिए अरबों डॉलर जुटाए थे. अडानी समूह को ऊर्जा अनुबंध हासिल करके 2 बिलियन डॉलर का मुनाफ़ा कमाने की उम्मीद थी.

इस मामले में कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश का बयान आया है. उन्होंने कहा, अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा गौतम अडानी और उनसे जुड़े अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाना उस मांग को सही ठहराता है जो कांग्रेस जनवरी 2023 से विभिन्न घोटालों की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जांच के लिए कर रही है.

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जयराम रमेश ने 'हम अडानी के हैं' सीरीज का जिक्र किया, जिसमें कथित घोटालों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी के बीच संबंधों के बारे में 100 सवाल उठाए गए हैं. उन्होंने मामले में जवाबदेही की जरूरत को दोहराया और कहा, सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं.

वहीं, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा, अमेरिका सरकार ने अरेस्ट वारंट निकाला है. देश के लिए शर्म की बात है. अडानी के लिए मोदी जी ने देश पर धब्बा लगा दिया है. हम अडानी राष्ट्र नहीं बनने देंगे.

अमित मालवीय बोले- जब तक दोषी साबित ना हो जाएं...

कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा, कोई भी प्रतिक्रिया देने से पहले पढ़ना हमेशा अच्छा होता है. आपने जिस दस्तावेज़ का हवाला दिया है, उसमें लिखा है, अभियोग में आरोप हैं और प्रतिवादियों को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि वे दोषी साबित ना हो जाएं.

लेकिन जैसा भी हो. आरोप का सार यह है कि अमेरिकी और भारतीय कंपनियां भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) को 12 गीगावॉट बिजली की आपूर्ति दिए जाने पर सहमत हुईं है. यह SECI द्वारा राज्य बिजली वितरण कंपनियों (SDCs) के साथ PPA में प्रवेश के अधीन था. अडानी ग्रीन एनर्जी के बीच अमेरिकी नवीकरणीय ऊर्जा, एज़्योर पावर के साथ एक सहयोग था, जिसके तहत एज़्योर को 4 गीगावॉट और अडानी ग्रीन एनर्जी को 8 मेगावाट आवंटित किया गया था.

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चूंकि बिजली महंगी थी, एसडीसी खरीदने को तैयार नहीं थे. इसलिए अडानी ने (अमेरिकी कंपनी Azure Power के साथ) जुलाई 2021 से फरवरी 2022 के बीच ओडिशा (तत्कालीन बीजेडी शासित), तमिलनाडु (डीएमके), छत्तीसगढ़ (तत्कालीन कांग्रेस) और आंध्र प्रदेश (तत्कालीन वाईएसआरसीपी) में स्थित SDC को 265 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर भुगतान किया.

यहां बताए गए सभी राज्य उस दौरान विपक्ष शासित थे. इसलिए, उपदेश देने से पहले कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा ली गई रिश्वत पर जवाब दें. इसके अलावा, भारतीय न्यायालय भी वैध आधार पर अमेरिकी फर्मों पर भारतीय बाजारों तक पहुंच से इनकार करने के लिए अमेरिकी सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगा सकता है. तो क्या हमें कानून को अपना काम नहीं करने देना चाहिए? और संबंधित कॉरपोरेट को अपना बचाव नहीं करने देना चाहिए? या फिर किसी देश की घरेलू राजनीति में खुद को स्थापित करने देना चाहिए? 

मालवीय ने कहा, अनावश्यक रूप से उत्साहित ना हों. संसद सत्र और डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद संभालने से ठीक पहले रिपोर्ट का समय कई सवाल खड़े करता है. यह बात बहुत कुछ कहती है कि कांग्रेस जॉर्ज सोरोस और उनके गुट का सहारा बनने को तैयार है.

जयराम रमेश ने एक्स पर क्या लिखा है...

''न्यूयॉर्क के पूर्वी ज़िले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा गौतम अडानी और उनसे जुड़े अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाना उस मांग को सही ठहराता है जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जनवरी 2023 से विभिन्न घोटालों की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जांच के लिए कर रही है. कांग्रेस ने 'हम अडानी के हैं कौन' (HAHK) श्रृंखला में इन घोटालों के विभिन्न पहलुओं और प्रधानमंत्री एवं उनके पसंदीदा पूंजीपति के बीच के घनिष्ठ संबंधों को उजागर करते हुए 100 सवाल पूछे थे. इन सवालों के जवाब आज तक नहीं दिए गए हैं.''

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''अब न्यूयॉर्क के पूर्वी ज़िले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा गौतम S अडानी, सागर R अडानी और अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोप से अडानी की आपराधिक गतिविधियों के बारे में और अधिक चौंकाने वाले विवरण सामने आए हैं. इसमें कहा गया है कि उन्होंने 2020 और 2024 के बीच भारत सरकार के अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (2,100 करोड़ रुपए) से अधिक की रिश्वत दी. रिश्वत का भुगतान “भारत सरकार के सोलर पावर प्लांट्स के प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट प्राप्त करने के लिए किया गया था, जिससे टैक्स के बाद $2 बिलियन (16,800 करोड़ रुपए) से अधिक मुनाफा होने का अनुमान था.” इसमें आरोप लगाया गया है कि "कई मौकों पर गौतम S अडानी ने रिश्वत की स्कीम को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से भारत सरकार के एक अधिकारी से मुलाक़ात की" और इसका इलेक्ट्रॉनिक और सेलुलर फोन सबूत होने का दावा किया गया है.''

''ये सब प्रधानमंत्री के स्पष्ट संरक्षण और कुछ नहीं होगा वाली सोच के साथ की गई धोखाधड़ी और अपराधों के एक लंबे रिकॉर्ड के अनुरूप है. तथ्य यह है कि अडानी की उचित जांच करने के लिए विदेशी अधिकार क्षेत्र का सहारा लिया गया है, इससे पता चलता है कि कैसे भारतीय संस्थानों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है, और कैसे लालची और सत्ता के भूखे नेताओं ने दशकों के संस्थागत विकास को बर्बाद कर दिया है.''

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''इस ख़ुलासे के बाद SEBI की नाकामी भी एक बार फ़िर से सामने आती है, जो अडानी ग्रुप द्वारा प्रतिभूतियों और अन्य कानूनों के उल्लंघन की जांच कर रहा है और ग्रुप को उसके निवेश के स्रोत, शेल कंपनियों, आदि के लिए ज़िम्मेदार ठहराने में पूरी तरह से विफल रहा है.''

''आगे का सही रास्ता यही है कि अडानी महाघोटाले में प्रतिभूति कानून के उल्लंघनों की जांच को पूरा करने के लिए एक नए और विश्वसनीय SEBI प्रमुख को नियुक्त किया जाए, और इसकी पूरी जांच के लिए तुरंत एक JPC का गठन किया जाए.''

''कांग्रेस लगातार अडानी ग्रुप के लेन-देन की जांच के लिए JPC गठन की मांग करती रही है। क्योंकि इनके लेन-देन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में एकाधिकार बढ़ रहा है और साथ ही, हमारे पड़ोस में विदेश नीति के लिए विशेष रूप से बड़ी चुनौतियां पैदा हो रही हैं.''

 

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