
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से अयोध्या के आसपास पर्यटन में तो तेजी आएगी ही इससे पूरे देश में धार्मिक पर्यटन को रफ्तार मिलेगी. अभी भी देश में हर दूसरा घरेलू पर्यटक धार्मिक यात्रा पर ही जाता है, इसलिए सरकार इसे और बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है.
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हर दूसरा घरेलू पर्यटक करता है धार्मिक पर्यटन
सरकार का यह अनुमान है कि भारत में होने वाले घरेलू पर्यटन का करीब 60 फीसदी हिस्सा धार्मिक ही होता है. यानी हर दो में से एक भारतीय घरेलू पर्यटक तीर्थयात्रा या धार्मिक स्थलों की यात्रा पर जाता है. इसलिए सरकार अब धार्मिक स्थलों के बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं के विकास पर तेजी से काम रही है.
अयोध्या में पर्यटन कारोबार का कायाकल्प
बुधवार को राम मंदिर का भूमि पूजन समारोह अयोध्या में बड़े पैमाने पर अपग्रेड योजनाओं के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद के बीच आयोजित हो रहा है. अयोध्या में एक नया एयरपोर्ट और एक बेहतरीन रेलवे स्टेशन बनेगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के साथ मंदिरों के इस शहर में कई विकास और सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट का ऐलान किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत अयोध्या को एक बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने की योजना है. अयोध्या के लिए एडवांस प्लानिंग में न केवल नया एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन शामिल हैं, बल्कि नजदीक राजमार्ग और स्थानीय पर्यटन स्थलों का उन्नयन भी शामिल है.
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं
मोदी सरकार जबसे आई है धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज हो गई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 के लालकिले की प्राचीर से अपने भाषण में कहा था कि हर व्यक्ति 2022 तक 15 घरेलू पर्यटन स्थलों की यात्रा करे.
सरकार ने साल 2016 में दो परियोजनाएं मंजूर की थीं-स्वदेश दर्शन और प्रसाद (PRASAD) . स्वदेश दर्शन के तहत 15 थीम के तहत पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है. इनमें बुद्धिस्ट सर्किट, कृष्णा सर्किट, स्पिचिरचुअल सर्किट, रामायण सर्किट और हेरिटेज सर्किट प्रमुख हैं. पर्यटन के लिहाज से सूफी सर्किट में दिल्ली, आगरा, फतेहपुर सीकरी, बीजापुर, शिरडी, औरंगाबाद आदि शामिल हैं. क्रिश्चियन सर्किट में गोवा, केरल, तमिलनाडु के चर्च शामिल हैं.
PRASAD के तहत पहचाने गए कुछ धार्मिक स्थलों का विकास और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है. इन दोनों योजनाओं के तहत सरकार ने करीब 90 प्रोजेक्ट्स में 7000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. प्रिलग्रिमेज रीजुवेनशन ऐंड स्पिरिचुअल आगुमेंटेशन ड्राइव (PRASAD) स्कीम के तहत देश भर में धार्मिक स्थलों के पहचान और उनके विकास पर जोर है ताकि लोगों के धार्मिक पर्यटन का अनुभव और व्यापक हो. स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत सरकार ने 6,035.70 करोड़ रुपये की 77 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. होटल और टूरिज्म सेक्टर में सरकार ने 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी है.
कितना है कारोबार
थिंक टैंक IBEF के अनुसार, भारत के जीडीपी में ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर का योगदान साल 2017 के 15.24 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2028 तक 32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है. इसमें से ज्यादातर हिस्सा घरेलू पर्यटन का ही होता है. तो इसमें से 60 फीसदी हिस्सा धार्मिक पर्यटन का होता है यानी धार्मिक पर्यटन का कारोबार करीब 10 लाख करोड़ रुपये का है.
पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2018 में घरेलू पर्यटकों की संख्या 1.85 अरब थी, जो एक साल पहले के मुकाबले 12 फीसदी ज्यादा है. साल 2019 में भारत में 1.08 करोड़ विदेशी पर्यटक आए थे और इनसे करीब 1.94 लाख करोड़ रुपये की आय हुई थी.
साल 2019 तक भारत के पर्यटन सेक्टर में करीब 4.2 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ था जो कुल रोजगार का करी 8.1 फीसदी है. हालांकि कोरोना संकट की वजह से इस सेक्टर की हालत खराब है और लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं. लेकिन अगले साल से इस सेक्टर की हालत में कुछ सुधार की उम्मीद की जा रही है.
ixigo की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय लोग वाराणसी, पुरी जैसी जगहों पर अब ज्यादा यात्राएं कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार पुरी के जगन्नाथ मंदिर, आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी और महाराष्ट्र के शिरडी में धार्मिक पर्यटन काफी तेजी से बढ़ा है.
भारत में अभी सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा पर्यटकों वाले तीर्थयात्रियों वाले स्थलों में बोधगया, कोर्णाक मंदिर, स्वर्ण मंदिर, वैष्णव देवी, तिरुपति बालाजी, सिरडी, काशी विश्वनाथ वाराणसी शामिल हैं, राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या भी इनमें शामिल हो जाएगा.
अन्य धार्मिक पर्यटन स्थलों में रामेश्वरम, केदारनाथ, बद्रीनाथ, द्वारका, पुष्कर, प्रयाग, उज्जैन, श्रीरंगम, हरिद्वार, मथुरा, वृंदावन, अजमेर आदि शामिल हैं. 2013 के अकेले प्रयाग के महाकुंभ में ही करीब 12 करोड़ लोग आए थे. भारत में खासकर बौद्ध धर्म से जुड़े विदेशी पर्यटक भी आते हैं.
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अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव का ज्यादा फर्क नहीं
असल में धार्मिक पर्यटन के साथ एक बात यह होती है कि यह लोगों की आस्था और भावना से जुड़ा होता है, इसलिए अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव का भी इस पर बहुत ज्यादा असर नहीं होता.
एक अनुमान के अनुसार इसमें किसी वर्ग भेद या इनकम ग्रुप का भेद भी नहीं होता. यानी हर वर्ग के लोग धार्मिक यात्राएं करते ही हैं. यही नहीं सीएसडीएस-लोकनीति की एक स्टडी के मुताबिक इनमें आयु या लिंग का भी बहुत भेद नहीं होता. इस स्टडी के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ज्यादा धार्मिक हुए हैं. यानी इनमें धार्मिक यात्राएं और बढ़ने वाली हैं.
लोकनीति की ही एक पुरानी स्टडी के मुताबिक करीब 40 फीसदी भारतीय छुट्टी मिलने पर किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर ही जाना चाहते हैं.