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अनलॉक का असर: जून में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी डिमांड, LPG का ये रहा हाल

कोविड-19 महामारी की वजह से देश में लागू लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद ईंधन की मांग में सुधार जारी है.

जून में पेट्रोल और डीजल की डिमांड बढ़ी जून में पेट्रोल और डीजल की डिमांड बढ़ी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

  • अप्रैल में ईंधन की मांग 13 साल के निचले स्तर पर
  • मई से अंकुशों में ढील के ईंधन की मांग बढ़ गई है

बीते अप्रैल महीने में ईंधन की मांग 13 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी. इसकी एकमात्र वजह पूर्ण लॉकडाउन था. हालांकि, मई के आखिर से अंकुशों में ढील के बाद आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं, जिससे ईंधन की मांग बढ़ गई है.

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मई की तुलना में 11 प्रतिशत बढ़त

ताजा आंकड़ों के अनुसार जून में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत मई की तुलना में 11 प्रतिशत बढ़कर 1.62 करोड़ टन पर पहुंच गई. हालांकि, यह जून, 2019 की तुलना में 7.8 प्रतिशत कम है. पिछले साल जून में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 1.76 करोड़ टन रही थी. अप्रैल में ईंधन की मांग घटकर 99.3 लाख टन पर आ गई थी. यह 2007 के बाद इसका सबसे निचला स्तर रहा है.

डीजल की डिमांड 84 प्रतिशत से अधिक

सबसे ज्यादा उपभोग वाले ईंधन डीजल की मांग सामान्य के 84.5 प्रतिशत और पेट्रोल की मांग सामान्य के 86.4 प्रतिशत पर है. जून में डीजल की खपत 63 लाख टन रही, जो मई के मुकाबले 14.5 प्रतिशत अधिक है. लेकिन जून, 2019 की तुलना में 15.4 प्रतिशत कम है. जून में डीजल की मांग अप्रैल की तुलना में लगभग दोगुना हो गई है. अप्रैल 2020 में यह 32.5 लाख टन रही थी.

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आंकड़ों के अनुसार जून में पेट्रोल की बिक्री मई की तुलना में 29 प्रतिशत बढ़कर 22.8 लाख टन पर पहुंच गई. हालांकि, यह एक साल पहले जून, 2019 की तुलना में 13.5 प्रतिशत कम है.

ये भी है डिमांड की वजह

ईंधन की मांग बढ़ने की एक और वजह ये भी है कि इस महामारी के डर से अब ज्यादा से ज्यादा लोग सार्वजनिक के बजाय निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. आपको बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में डीजल, पेट्रोल के मुकाबले महंगा बिक रहा है. फिलहाल डीजल का भाव पेट्रोल से 35 पैसे ज्यादा है और यह 81 रुपये के करीब आ गया है.

एलपीजी का ये रहा हाल

इस दौरान रसोई गैस सिलेंडर यानी एलपीजी की मांग तेजी से बढ़ रही है. जून में एलपीजी की मांग 15.7 प्रतिशत बढ़कर 20.7 लाख टन रही. अभी काफी सीमित संख्या में उड़ान सेवाएं शुरू हुई हैं. ऐसे में सालाना आधार पर विमान ईंधन एटीएफ की मांग 65.8 प्रतिशत घटकर 2,22,000 टन रह गई.

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