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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजगार के लिए खतरा नहीं: रिशद प्रेमजी

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजगार के लिए खतरा नहीं है.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी
aajtak.in
  • मुंबई,
  • 21 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजगार के लिए खतरा नहीं
  • रोजगार के स्वरूप में हो सकता है बदलाव
  • मौजूदा वक्त डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का युग
  • ग्राहकों के लिए कंपनियां कर रहीं खुद में बदलाव

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजगार के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इंसानों के लिए मददगार है. हर नई तकनीक आने पर लोग उसे रोजगार के लिए खतरा बताने लगते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं हैं. हर नई टेक्नोलॉजी विकास में सहायक होती है और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए  हमेशा इंसानों की जरूरत पड़ती रहेगी.

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मुंबई में आयोजित कॉन्क्लेव में रिशद ने कहा कि इंसान तकनीक का इस्तेमाल करता आया है, तकनीक इंसान का इस्तेमाल नहीं कर सकती. रिशद प्रेमजी ने कहा कि बीते 15 से 20  में तेजी से टेक्नोलॉजी बदली है. भारत की खासियत है कि लोग यहां के क्राफ्ट की वजह से खिंचे चले आते हैं. अब हर तकनीक में बदवाल हो रहा है. हर सेक्टर मेजर प्रोफाइल चेंजिंग के दौर से गुजर रहा है. जॉब की प्रवृत्ति बदल रही है. कंपनियां अपनी कार्यशैली में बदलाव कर रही हैं. ग्राहकों के लिए कंपनियां खुद को ट्रांसफॉर्म कर रही हैं. यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का युग है.

समाज को हमेशा शिक्षकों की जरूरत होगी, समाज की जरूरत होगी, शेयर मार्केटिंग और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. ऐसे में नौकरियां के मौके भी हमेशा समय के साथ बढ़ते रहेंगे, हालांकि उनमें बदलाव हो सकता है.

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किसी की भी नहीं जाएगी नौकरी

रिशद प्रेमजी ने कहा कि तकनीक में समय के साथ चरणबद्ध बदलाव हो रहे हैं. इसी तरह दावा किया जा रहा है कि जब स्वचालित गाड़ियों का निर्माण कर लिया जाएगा, लाखों की संख्या में ड्राइवरों की नौकरियां छिन जाएंगी. यह बात बेहद गलत है. किसी की भी नौकरी नहीं जाएगी, वे लोग जो टेक्नोलॉजी फ्रैंडली होंगे, वे मार्केट में हमेशा प्रांसगिक बने रहेंगे.

तकनीक सीखने वाले लोग हमेशा सुरक्षित

इंडिया टुडे और आजतक के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने सवाल किया कि देश में बड़े स्तर पर लोगों की नौकरियां जा रही हैं. नए आंकड़ों के मुताबिक अगर जीडीपी में 10 फीसदी ग्रोथ हो तब जाकर 1 फीसदी लोगों को नौकरियां मिलेंगी, ऐसे में नौकरियों का संकट बना हुआ है. इससे कैसे इससे उबरा जाएगा?

इस सवाल के जवाब में रिशद प्रेमजी ने कहा कि हमेशा वे लोग मार्केट में प्रासंगिक बने रहते हैं जो तेजी से तकनीक सीखते हैं. स्किल हर इंडस्ट्री की मांग है. लोगों को हमेशा नई तकनीक सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए. सरकार अलग-अलग उद्योगों के विकास के लिए काम कर रही है. लोगों की तकनीकी शिक्षा लेने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार की कई योजनाएं हैं जिनमें लोगों को एक क्षेत्र विशेष में ट्रेंड किया जा रहा है. सरकार को तकनीकी शिक्षा पर जोर देना चाहिए. इसके लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों को पहल करनी होगी.

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रोजगार के तरीके में होता है बदलाव

इस दावे को भी रिशद प्रेमजी ने खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि आने वाले दिनों में 5.5 करोड़ लोगों की नौकरियां जाएंगी, क्योंकि ऐसे कई पेशे मौजूदा वक्त के हिसाब से गैर जरूरी हो जाएंगे. प्रेमजी ने कहा कि लोग नए माध्यमों में शिफ्ट कर लेते हैं. चुनौतियां आती हैं, लोग सीख लेते हैं.

भारत में हो रहा है बदलाव

स्टार्टअप भारत और डिजिटल इंडिया के सवाल पर रिशद प्रेमजी ने कहा कि भारत में वेल्थ क्रिएशन का अच्छा माहौल बनेगा. अब किसी देश विशेष पर ही नहीं, वैश्विक स्तर पर कंपनियां फोकस कर रही हैं. लोगों का माइंडसेट बदल रहा है. लोग असफलताओं को स्वीकार कर रहे हैं. किसी स्टार्टअप के फेल होने पर लोग परेशान नहीं हो रहे, नए अवसर तलाश रहे हैं.

भारत के आईटी सेक्टर का प्रोडेक्ट डेवलेपमेंट कमजोर है. यही वजह से कि टिकटॉक हिट है लेकिन भारत का अपना कोई सॉफ्टवेयर इस तरह इंटरनेट सेंशेसन नहीं बना है.

इस सवाल के जवाब में रिशद प्रेमजी ने कहा कि भारत में डॉयनमिक चेंज आ रहा है. लोगों में रिस्क लेने की क्षमता नहीं थी, लोग अब भी डरते हैं. लोग सीख रहे हैं. तेजी से बदलाव हो रहा है, ऐसे में आने वाले दिनों में हमें इस सेक्टर में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

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