
देश में पेट्रोल और डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) लंबे समय से स्थिर बने हुए हैं. इस बीच अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन भारत में तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. अब जबकि नया साल 2024 आने वाला है और अगले साल आम चुनाव भी हैं, तो ऐसे में ये सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या लंबे समय से स्थिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और राहत मिलेगी या फिर ये महंगा होगा. तो बता दें कच्चे तेल की कीमतों में जारी नरमी राहत भरे संकेत दे रही है. आइए जानते हैं कि कैसे इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम में उतार-चढ़ाव भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर डालते हैं?
588 दिनों से स्थिर है पेट्रोल-डीजल
सबसे पहले बात कर लेते हैं देश में पेट्रोल और डीजल की वर्तमान कीमतों की, तो इनके दाम बीते 589 दिनों से स्थिर बने हुए हैं. आखिरी बार इनके दाम में बदलाव मई 2022 को देखने को मिला था. इस बीच कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंची, लेकिन पेट्रोल-डीजल स्थिर रहा, कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के चलते इनकी कीमतों में बदलाव नहीं देखने को मिला है. अब जबकि क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार गिरते हुए 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे 79.07 पर पहुंच गई हैं, तो नए साल में फ्यूल की कीमतों में और राहत की आस जग गई है.
देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल-डीजल की वर्तमान कीमत
शहर का नाम | पेट्रोल रुपये/ लीटर | डीजल रुपये/लीटर |
दिल्ली | 96.72 | 89.62 |
मुंबई | 106.31 | 94.27 |
चेन्नई | 102.63 | 94.24 |
कोलकाता | 106.03 | 92.76 |
बीते साल आया था तगड़ा उछाल
अब बताते हैं कच्चे तेल यानी Crude Oil के बारे में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीते कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है और ये 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा है. बीते अक्टूबर 2023 महीने में इसमें तेजी देखने को मिली थी और ये 90 डॉलर के पार पहुंच गए थे. बात करें बीते साल की तो कच्चे तेल की कीमतों में 8 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 100 डॉलर का स्तर भी पार लिया था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतों में बदलाव सीधे तौर पर देश में पेट्रोल-डीजल के दाम पर असर डालता है.
कच्चे तेल का पेट्रोल-डीजल कनेक्शन
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है और यह अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा Crude Oil बाहर से खरीदता है. अब बात करें दोनों की कीमतों के एक-दूसरे के कनेक्शन की, तो बता दें कि आयात किए जा रहे कच्चे तेल की कीमत भारत को अमेरिकी डॉलर में चुकानी होती है. तेल निर्यातक रुपये से दूरी बनाए हुए हैं. ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम प्रभावित होते हैं यानी ईंधन महंगे होने लगते हैं. वहीं अगर कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आती है, तो फिर भारत का आयात बिल घट जाता है और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलती है.
क्रूड में 1 डॉलर का इजाफा ऐसे डालता है असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर का इजाफा होता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल का दाम 50 से 60 पैसे तक बढ़ जाता है. वहीं अगर क्रूड का भाव 1 डॉलर कम होता है, तो इतनी ही गिरावट भी देखने को मिलती है. दरअसल, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के भाव, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत में बदलाव करते हैं.
पहले ये काम सरकार करती थी, लेकिन जून 2014 के बाद ये काम तेल कंपनियों को सौंप दिया गया था. अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में ये गिरावट जारी रहती है, तो फिर देश में नए साल में पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है.