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कबाड़ से शुरुआत, फिर घोड़े पर दांव.. स्विस बैंक में कालाधन, इस बिजनेसमैन की मौत!

हसन अली खान के वकील एडवोकेट प्रशांत पाटिल ने कहा कि उन्हें 4 साल 6 महीने तक सलाखों के पीछे रखा गया. मनी लॉन्ड्रिंग के लिए न्यूनतम सजा 3 साल है. भले ही वह इस मामले का दोषी पाया गया होता, लेकिन वह पहले ही अपनी पूरी सजा काट चुका था.

हसन अली खान का निधन हसन अली खान का निधन
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के आरोपी और व्यवसायी हसन अली खान (Hasan Ali Khan) का शुक्रवार को पुणे के एक अस्पताल में मौत हो गई. 70 वर्षीय खान इस मामले में फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर था. करीब चार साल जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद उसे जमानत मिली थी और अब निधन की खबर आई है.

स्विस बैंक में जमा था खजाना 
रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर विभाग (Income Tax) ने 15 जनवरी, 2007 में उसके कोरेगांव निवास पर छापा मारा था. इस कार्रवाई में दस्तावेजों में जो जानकारी सामने आई, उससे पता चला कि हसन अली की स्विस बैंक (Swiss Bank) में करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 36,000 करोड़ रुपये) की राशि जमा है. इसके बाद उस पर शिकंजा बढ़ता गया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 7 मार्च 2011 को हसन अली खान को गिरफ्तार कर लिया था. 

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1953 में हैदराबाद में हुआ था जन्म
हसन अली खान का जन्म साल 1953 में हैदराबाद में हुआ था. पिता एक्साइज डिपार्टमेंट में कर्मचारी थे. हसन ने होश संभाला तो एक कबाड़ी के तौर पर काम शुरू किया. कबाड़ का कारोबार ऐसा चला कि उसने दूसरे बिजनेस में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया. कार रेंटल एजेंसी से मेटल ट्रेडिंग तक में उसने हाथ आजमाया और करोड़पति कैटेगरी में शामिल हो गया. कबाड़ी से करोड़पति बनने के सफर में उसकी सबसे बड़ी राजदार हसन की दो पत्नियां थीं. अपनी पहली पत्नी के पारिवारिक संपर्कों के जरिए उसने एंटीक के कारोबार में भी एंट्री ले ली थी.

टैक्स चोरी करते-करते सुर्खियों में आया नाम 
करोड़ों के घोटाले कर स्विस बैंक में पैसे जमा करने के आरोप में ईडी ने हसन अली खान के खिलाफ़ कई केस दर्ज थे. सीबीआई ने भी खान के के खिलाफ मामला दर्ज किया था. एक दशक पहले टैक्स चोरी के कम से कम 7 मामलों में घिरने के बाद खान सुर्खियों में आए थे. हैदराबाद में कई मामले दर्ज होने के बाद 1999 में हसन अली पुणे आ गया. इसी शहर से उसकी किस्मत बदल गई.

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'हैदराबाद का घोड़ावाला' नाम मिला
हसन अली खान ने घोड़ों की ब्रीडिंग और रेसिंग का धंधा शुरू किया. यहीं उसकी मुलाकात मशहूर हार्स ट्रेनर फैसल की बहन रेहीमा से हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया. बाद में उसने अपनी पहली पत्नी उन्नीसा को तलाक दिया और रेहीमा से शादी कर ली. अपने साले की मदद से अली रेसकोर्स में हैदराबाद का घोड़ावाला नाम से मशहूर हो गया. इसके बाद उसने पूरे देश में होने वाली घुड़-दौड़ों में अपने घोड़े भेजने शुरू कर दिए. देखते ही देखते हसन अली रेसकोर्स में हैदराबाद का घोड़ावाला नाम से मशहूर हो गया. पुलिस की मानें तो हसन अली के घोड़े स्विट्जरलैंड और लंदन में होने वाली घुड़दौड़ में भी शामिल होते थे.

 

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