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साल-2023 में भारत में कुल लोन की ग्रोथ 17 फीसदी थी. लेकिन बीते साल महिलाओं ने 19 परसेंट ज्यादा लोन लेते हुए बाजी मार ली थी. यही नहीं, कर्ज चुकाने में भी महिलाएं ज्यादा भरोसेमंद हैं क्योंकि महज 3.4 फीसदी महिला कारोबारी ही लोन डिफॉल्टर हैं जबकि पुरुषों उद्यमियों की लोन डिफॉल्ट दर 4.6 फीसदी से भी ज्यादा है.
इसी तरह अब मैक्स लाइफ के सर्वे में दावा किया गया है कि पहली बार जीवन बीमा खरीदने में वर्किंग वीमेन पुरुषों से आगे निकल गई हैं. सर्वे में दावा किया गया है कि 79 परसेंट कामकाजी महिलाओं के पास जीवन बीमा पॉलिसी है जबकि 76 फीसदी कामकाजी पुरुषों के पास इस तरह की पॉलिसी है. लेकिन वित्तीय सुरक्षा के मामले में पुरुषों की स्थिति अभी भी महिलाओं से बेहतर है. शहरी इलाकों में पुरुष 46 प्वाइंट्स के साथ महिलाओं के 45 के स्कोर से फाइनेंशियल सिक्योरिटी में मामूली तौर पर आगे हैं.
परिवार के लिए प्रतिबद्ध हैं भारतीय महिलाएं
सर्वे में दावा किया गया है कि शहरों में रहने वाली भारतीय महिलाएं अपने परिवार को किसी भी मुश्किल से बचाने के लिए ज्यादा सचेत हैं. इसलिए वो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पीछे नहीं हैं. पॉलिसी बाजार के एक सर्वे के नतीजों के मुताबिक 2023-24 में 25 लाख रुपये से ज्यादा कवरेज वाली हेल्थ पॉलिसी को खरीदने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 24 फीसदी हो गई है. ये आंकड़ा 2022-23 में 15 परसेंट था. वहीं 25 लाख रुपये से कम कवरेज वाली हेल्थ पॉलिसी लेनी वाली महिलाओं की संख्या सात फीसदी घट गई है.
स्टार्टअप्स में बढ़ा महिलाओं का दबदबा
देश में महिला संस्थापकों वाले स्टार्टटप्स की संख्या 8 हजार से ज्यादा है. ये स्टार्टटप्स अब तक 23 अरब डालर की फंडिंग जुटा चुके हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक तकनीक से जुड़े स्टार्टअप को शुरू करने वाली महिला कारोबारियों की हिस्सेदारी 18 फीसदी से ज्यादा है जबकि फंडेंड कंपनियों के स्टार्टअप में महिला कारोबारियों की हिस्सेदारी 14 परसेंट से ज्यादा है. महिलाओं के शुरू किए गए स्टार्टअप्स की संख्या में दिल्ली-एनसीआर सबसे आगे है. इसके बाद बेंगलुरु और मुंबई का स्थान है. महिलाओं के शुरू किए गए करीब 2 हजार स्टार्टअप्स को अब तक फंडिंग मिली है.
MSME में महिला मालिकों ने महिलाओं की दी नौकरियां!
महिलाओं के मालिकाना हक वाली MSME ने पुरुषों के मालिकाना हक वाली MSME के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा महिला कर्मचारियों को नौकरी दी है. महिलाओं के मालिकाना हक वाले MSMEs में पैदा हुईं नौकरियों में से एक तिहाई महिला कर्मचारियों के लिए थीं. महिलाओं के मालिकाना हक वाले MSME के मंथली रेवेन्यू में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. महिलाओं के मालिकाना हक वाले MSME की मंथली नेट इनकम 19 फीसदी बढ़ी है जबकि पुरुषों के मामले में ये आंकड़ा 18 परसेंट है.
78% महिला मकान मालिक एंड यूजर्स
महिला दिवस के मौके पर आई एनारॉक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 78 फीसदी महिलाएं घर को खुद के रहने के लिए खरीदती हैं. जबकि केवल 22 फीसदी महिलाएं ही घर को निवेश के लिए खरीदती हैं. ये सर्वे जुलाई-दिसंबर 2023 की छमाही में किया गया था. इसके पहले जुलाई-दिसंबर 2021 के सर्वे के मुताबिक 74 फीसदी महिलाएं एंड यूजर हैं जबकि 26 परसेंट महिलाएं निवेश के लिए घर खरीदती हैं.
ताजा सर्वे में शामिल 57 फीसदी महिलाओं ने 3BHK फ्लैट्स को प्राथमिकता दी है जबकि 29 फीसदी को 2BHK फ्लैट्स पसंद आए हैं. 64 परसेंट महिलाएं 45 लाख से लेकर डेढ़ करोड़ कीमत के मिड और प्रीमियम सेगमेंट के घर खरीदती हैं जबकि 23 परसेंट ने डेढ़ करोड़ से ज्यादा कीमत के घर खरीदे हैं. 71 फीसदी महिलाओं को रेडी टू मूव या अगले 6 महीनों में पजेशन देने वाले प्रोजेक्ट्स में घर खरीदना पसंद है. वहीं अब रियल एस्टेट निवेश के लिए 2021 के 64 फीसदी से घटकर 61 परसेंट महिलाओं की पसंद रह गया है.