
Saria Rate Today: अपना घर (Dream Home) बनाने का सपना पूरा करने का सही समय आ गया है. सरकार के प्रयासों और कुछ सीजनल फैक्टर्स के कारण भवन निर्माण सामग्रियों (Building Materials) की कीमतें रिकॉर्ड कम हुई हैं. खासकर सबसे खर्चीले सरिये (Saria) की बात करें तो इसका भाव रोज ही गिरता जा रहा है. अभी यह साल है कि महज दो महीने पहले रिकॉर्ड बना रहा सरिया अभी आधा रह गया है. इसके अलावा सीमेंट (Cement) से लेकर ईंट (Bricks) तक की कीमतें गिरी हुई हैं.
कंस्ट्रक्शन में सरिया ही सबसे खर्चीला
आप चाहे घर बना (Home Construction) रहे हों या कोई और कंस्ट्रक्शन करने जा रहे हों, मजबूती के लिए सरिया (Iron Rod) सबसे जरूरी चीज है. घरों की छत, बीम और कॉलम आदि बनाने में सरिये का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. यहां तक नींव यानी बेस को भी सरिये से ही मजबूती मिलती है. इस सरिये का भाव महज दो महीने पहले यानी मार्च 2022 में आसमान छू रहा था. मार्च में कुछ जगहों पर सरिये का भाव 85 हजार रुपये टन तक पहुंच गया था. अभी यह कम होकर कई जगहों पर 45 हजार रुपये टन के पास आ गया है.
सरकार ने बढ़ाई स्टील पर एक्सपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने हाल ही में स्टील पर एक्सपोर्ट ड्यूटी (Export Duty) बढ़ा दी है. इसके कारण घरेलू बाजार में स्टील के उत्पादों (Steel Products) के दाम तेजी से गिरे हैं. सरिया की कीमतों में आई कमी की भी मुख्य वजह यही है. इसी साल मार्च में एक समय सरिया का खुदरा भाव 85 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया था, जो अभी कम होकर 45-50 हजार रुपये प्रति टन तक गिर गया है. सिर्फ लोकल ही नहीं बल्कि ब्रांडेड सरिये का भाव भी पिछले कुछ महीने में काफी कम हुआ है. अभी ब्रांडेड सरिया का भाव भी कम होकर 80-85 हजार रुपये प्रति टन पर आ गया है. मार्च 2022 में ब्रांडेड सरिये का रेट 01 लाख रुपये प्रति टन के पास पहुंच गया था. इस चार्ट में देखिए सरिये का औसत भाव कैसे कम हुआ है...
सरिया की औसत खुदरा कीमत (रुपये प्रति टन):
अब इस चार्ट में देखिए कि भारत के प्रमुख शहरों में अभी सरिये का क्या रेट चल रहा है. यह रेट 04 जून 2022 को अपडेट हुआ है. आयरनमार्ट (ayronmart) वेबसाइट सरिये की कीमतों की घट-बढ़ पर नजर रखती है और साप्ताहिक आधार पर कीमतों को अपडेट करती है. कीमतें रुपये प्रति टन में हैं.
कीमतें गिरा रहे ये फैक्टर्स
सरकार ने आसमान छूती महंगाई (Inflation) को कम करने के लिए डीजल और पेट्रोल पर टैक्स (Diesel Petrol Duty Cut) भी घटाया है. इसके बाद घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें नियंत्रित करने के लिए इसके निर्यात पर टैक्स बढ़ाया है. इनके अलावा भी कुछ फैक्टर अनुकूल हैं. बारिश का मौसम शुरू होते ही निर्माण कार्यों में कमी आने लगती है, जिससे बिल्डिंग मटीरियल्स की डिमांड खुद ही कम होने लगती है. रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) के बुरे हालात भी इस समय सहयोग कर रहे हैं. इन कारणों से ईंट, सीमेंट, सरिया यानी छड़, रेत जैसी चीजों की डिमांड निचले स्तर पर है.