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कुछ लोग मिडिल क्लास (Middle Class) के लिए इस बजट को ऐतिहासिक बता रहे हैं, कुछ कह रहे हैं कि आयकर (Income Tax) में इतना बड़े बदलाव का अनुमान किसी को नहीं था. इस ऐलान से सरकारी खजाने पर सालाना 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. लेकिन ये 1 लाख करोड़ रुपये देश के टैक्सपेयर्स को बचेंगे, जिसे वो दूसरे कामों में खर्च कर पाएंगे. सरकार ये भी मानकर चल रही है कि इससे सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी, क्योंकि टैक्स से बचे पैसों को लोग खर्च करेंगे.
दरअसल, सरकार ने बजट में 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने की घोषणा की है. इससे पहले 7 लाख तक की आय को इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया था. ये बदवाल और छूट केवल न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) के लिए प्रस्तावित है, यानी ओल्ड टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन अब जिस तरह से सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को प्रस्तावित किया है, उससे लगता है कि आने वाले दिनों में ओल्ड टैक्स रिजीम खत्म होना लगभग तय है.
12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं
बजट-2025 से पहले न्यू टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपये तक आय पर कोई टैक्स नहीं लगता था. क्योंकि आयकर धारा 87A के तहत 25 हजार रुपये का रिबेट (Rebate) मिल जाता है. अब सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने का ऐलान किया है तो रिबेट की राशि को भी बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दिया गया है.
बता दें, बजट-2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर न्यू इनकम टैक्स स्लैब पेश किया है. जिसमें 0-4 लाख की इनकम पर 0 टैक्स कर दिया गया है. पहले ये छूट 0-3 लाख रुपये की आय पर मिलती थी.
New Tax Slab (2025)
0– 4 लाख रुपये : 0%
4– 8 लाख रुपये : 5%
8–12 लाख रुपये : 10%
12–16 लाख रुपये : 15%
16–20 लाख रुपये : 20%
20–24 लाख रुपये : 25%
24 लाख से अधिक इनकम: 30%
न्यू टैक्स स्लैब के तहत 4 लाख रुपये से अधिक की इनकम पर अब टैक्स लगेगा. लेकिन साथ ही आयकर धारा 87A के तहत अब 60 हजार रुपये तक का रिबेट मिलेगा. क्योंकि सरकार ने 12 लाख तक की आय को करमुक्त करने का ऐलान किया है. न्यू टैक्स स्लैब के हिसाब से 12 लाख की कमाई पर 60 हजार रुपये इनकम टैक्स बनता है. लेकिन 87A के तहत 60 हजार रुपये का रिबेट मिल जाएगा, जिससे 12 लाख तक की कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा. यही नहीं, न्यू टैक्स स्लैब में सैलरीड क्लास को 75 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ भी मिलेगा. ऐसे में 12.75 लाख तक की कमाई पूरी तरह से कर मुक्त हो जाती है, यानी एक रुपये भी इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा.
लेकिन जैसे ही कमाई 12.75 लाख से एक रुपया भी बढ़ती है, तो फिर पूरी कमाई इनकम टैक्स के दायरे में आ जाती है. अब उदाहरण के तौर पर देखें तो किसी की कमाई अगर 12.76 लाख रुपये है तो फिर पूरा कमाई पर टैक्स देना पड़ेगा. जबकि आमदनी तो केवल 1 हजार रुपये बढ़ी है. न्यू टैक्स स्लैब के हिसाब से इनकम टैक्स 62,556 रुपये बनता है. अब आप कह सकते हैं ये तो सरासर गलत है, क्योंकि टैक्सेबल इनकम तो केवल 1 हजार रुपये बढ़ी, लेकिन टैक्स 62,556 रुपये देना पड़ेगा. जबकि 12.75 लाख रुपये की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है.
मार्जिनल रिलीफ क्या है?
ऐसे लोगों की शिकायत दूर करने के लिए सरकार ने मार्जिन रिलीफ (Marginal Relief) को पेश किया है. आइए जानते हैं इस नियम के बारे में... मार्जिनल रिलीफ के तहत ऐसे टैक्सपेयर्स को राहत मिलती है, जिनकी इंक्रीमेंटल आय में मामूली इजाफा से ज्यादा टैक्स की देनदारी बन जाती है, यानी जिनकी इंक्रीमेंटल आय टैक्सबेल इनकम से थोड़ी ज्यादा है, उन्हें इसका सीधा लाभ मिलेगा. लेकिन एक सीमित आय तक ही मार्जिनल रिलीफ का फायदा मिलता है. नियम के मुताबिक टैक्सपेयर्स की इंक्रीमेंटल आय और इनकम टैक्स में से जो कम होगा, उसे आयकर के तौर पर माना जाएगा. (इंक्रीमेंटल इनकम बढ़ी हुई आय को कहा जाता है).
हम बात कर रहे हैं कि 12.76 लाख की आय पर 62,556 रुपये इनकम टैक्स नाइंसाफी है, क्योंकि 12.75 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है, फिर 1 हजार की कमाई बढ़ने से ही इतना भारी टैक्स क्यों? फिर यहीं पर मार्जिनल रिलीफ का काम शुरू होता है. मार्जिनल रिलीफ का नियम कहता है कि इंक्रीमेंटल आय और इनकम टैक्स में जो कम होगा, वो टैक्स के तौर पर देय होगा. इसलिए यहां इंक्रीमेंटल इनकम सिर्फ 1 हजार रुपये है, जबकि इनकम टैक्स 62,556 रुपये बन जा रहा है. ऐसे में केवल 1 हजार रुपये ही टैक्स देना पड़ेगा. क्योंकि ये राशि इनकम टैक्स के स्लैब से कम है.
इसी तरह सालाना 13 लाख रुपये की आय पर 25 हजार रुपये टैक्स देना होगा, सालाना 13.25 लाख की आय पर 50 रुपये इनकम टैक्स बनेगा, क्योंकि यहां भी मार्जिनल रिलीव का लाभ मिलेगा. न्यू टैक्स रिजीम-2025 के तहत कुल 60 हजार रुपये तक का मार्जिनल लाभ दिया जाएगा, और जैसे ही इंक्रीमेंटल इनकम और इनकम टैक्स के बीच का मार्जिन घटकर शून्य हो जाएगा, यानी दोनों राशि बराबर हो जाएगी. उसके बाद इंक्रीमेंटल इनकम एक रुपया भी ज्यादा होने पर पूरा टैक्स देना होगा.