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मेडिकल इंश्योरेंस पर कितना लगता है GST, कैसे टैक्स जुड़ते ही बिगड़ जाता है प्रीमियम का खेल, गडकरी ने उठाया मुद्दा

GST On Health Insurance: देश में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया गया था और अन्य उत्पादों व सेवाओं के साथ ही लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस को भी इसमें शामिल किया गया था. फिलहाल इस पर 18 फीसदी की दर से टैक्स लगता है.

नितिन गडकरी ने वित्त मंत्री से किया लाइफ इंश्योरेंस से जीएसटी हटाने का आग्रह नितिन गडकरी ने वित्त मंत्री से किया लाइफ इंश्योरेंस से जीएसटी हटाने का आग्रह
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 1:50 PM IST

मोदी 3.0 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने बीते 28 जुलाई को एक पत्र लिखकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस पर लागू जीएसटी (GST On Medical Insurance) हटाने की मांग की है. उन्होंने इस टैक्स को 'जिंदगी की अनिश्चितताओं पर टैक्स लगाने जैसा' करार दिया है. इंश्योरेंस पर जीएसटी आपके प्रीमियम की राशि में इजाफा करता है और आपको ज्यादा खर्च करना पड़ता है. आइए जानते हैं इसका फुल कैलकुलेशन...

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तो सस्ते हो जाएंगे लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस?
फिलहाल लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस पर सरकार द्वारा लगाया गया गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) 18 फीसदी है. इसे हटाए जाने की मांग लंबे समय से चल रही है और अब नागपुर रीजन के LIC कर्मचारी संघ की ओर से केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सौंपे गए ज्ञापन में इसे हटाने का आग्रह किया गया, जिसे संज्ञान में लेते हुए Nitin Gadkari ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखकर जीएसटी हटाने की मांग की. अगर इस मांग को मान लिया जाता है और तो फिर लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस सस्ते हो सकते हैं. 

फाइनेंशियल सर्विस के तौर पर लगता है GST
1 जुलाई 2017 में पूरे देश में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने भारत के टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है और तब से पूरे देश में अलग-अलग कर की जगह एक ही कर लगाया जाता है. GST के एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) होता है, जो कि घरेलू उत्पाद, कपड़े, उपभोक्ता वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन, रियल एस्टेट के साथ ही सेवाओं पर लगाया जाता है. बीमा (Insurance) को भी एक फाइनेंशियल सर्विस मानते हुए इस कैटेगरी में शामिल किया जाता है. टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) और मेडिकल इंश्योरेंस दोनों पर एक समान 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगता है.

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कैसे बढ़ जाता है प्रीमियम का खर्च? 
टर्म और मेडिकल इंश्योरेंस की बात करें, तो इसके लिए जीएसटी कुल प्रीमियम राशि पर लागू किया जाता है. इसे उदाहरण के तौर पर समझें, तो अगर आपका कोई मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं और इसका कवरेज 5 लाख रुपये है, तो प्रीमियम लागत करीब 11,000 रुपये साल होती है. अब इसपर 18 फीसदी की दर से जो जीएसटी लगाया जाता है, उसका कैलकुलेशन करें तो [11000/(100 + 18%)] यानी अपने हर प्रीमियम पर आपको 1980 रुपये का अतिरिक्त भुगतान जीएसटी के रूप में करना होता है और आपका प्रीमियम 12,980 रुपये हो जाता है. इस तरीके से जीएसटी लागू होने के बाद स्वास्थ्य बीमा खरीदने वाले पॉलिसी खरीदारों को अधिक प्रीमियम राशि का पेमेंट करना पड़ता है. 

Nitin Gadkari ने जिस ज्ञापन को लेकर वित्त मंत्री से इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाने की मांग की है. उसमें एंप्लाइज यूनियन ने गुहार लगाते हुए कहा है कि जो व्यक्ति परिवार को सुरक्षा देने के लिए बीमा पॉलिसी खरीदता, तो उस स्थिति में इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए.

जीएसटी से पहले 15% टैक्स
बता दें, इंश्योरेंस पर जीएसटी लागू होने पर 15% टैक्स लगता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद 1 जुलाई 2017 से 18% वसूला जा रहा है. टैक्स दर में 3% की इस बढ़ोतरी से इंश्योरेंस पॉलिसियों के प्रीमियम पर सीधा असर पड़ा है, जिससे प्रीमियम की कीमतें बढ़ गईं. 

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ऐसे ले सकते हैं टैक्स बेनेफिट्स
यहां बता दें कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के बाद आप टैक्स बेनेफिट्स का लाभ जरूर ले सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 80C और 80D के तहत आप टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं. टैक्सपेयर्स को विशिष्ट बीमा योजनाओं के तहत इंश्योरर को पेमेंट की गई अपनी कुल प्रीमियम राशि के लिए टैक्स कटौती का क्लेम करने की सुविधा दी जाती है. यानी आपने साल में जितने भी इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान किया है, उन पर आप 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ उठा सकते हैं.

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