
पाकिस्तान कंगाली के कगार पर खड़ा है और उधर, पाकिस्तान के कुछ अमीर लोगों (Rich People in Pakistan) ने लाखों करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी दुबई में खरीद डाली है. दुबई लीक की एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पाकिस्तानी नागरिकों के पास दुबई में बड़ी संख्या में संपत्तियां (Property in Dubai) हैं, जिनकी कुल कीमत 12.5 अरब डॉलर ( करीब 10,43,80 करोड़ भारतीय रुपये) है.
द डॉन के अनुसार, पत्रकारों के एक इंटरनेशनल संघ द्वारा एक्सेस लीक डेटा में कहा गया है कि पाकिस्तानी नागरिकों ने दुबई में 17,000 से 22,000 प्रॉपर्टीज खरीदी हैं. रिपोर्ट में टॉप पाकिस्तानी राजनेताओं अधिकारियों का नाम दिया गया है, जिनके पास दुबई में विशाल संपत्ति (Dubai Property) है. इसमें राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बच्चे, आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी की पत्नी, हुसैन नवाज शरीफ, दिवंगत जनरल परवेज मुशर्रु और पूर्व प्रधान मंत्री शौकत अजीज शामिल हैं.
नामांकन के समय नहीं किया था इसका खुलासा
रिपोर्ट में राजनेताओं द्वारा संपत्ति की घोषणाओं में कुछ खामियों को भी उजागर किया है. उदाहरण के लिए, फरवरी के आम चुनावों के दौरान अपने सीनेट चुनाव नामांकन पत्र में आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी की पत्नी ने यह खुलासा नहीं किया था कि उनके पास दुबई में एक विला है. डेटा के मुताबिक यह प्रॉपर्टीज साल 2020 और 2022 में खरीदी गई थीं और यह दुबई में सैकड़ों हजारों प्रॉपर्टी के बारे में बताता है. रिपोर्ट में इन प्रॉपर्टी के स्वामित्व के बारे में भी जानकारी दी गई है.
साल 2022 में इतनी थी इन प्रॉपर्टी की कीमत
पाकिस्तानी नागरिकों ने 2022 के दौरान दुबई में 17,000 से अधिक संपत्तियों को खरीदा था. हालांकि, डेटा और अतिरिक्त सोर्सेज के आधार पर पता चलता है कि दुबई में पाकिस्तानी संपत्ति मालिकों की वास्तविक संख्या 22,000 से अधिक हो सकती है. वहीं इन प्रॉपर्टी का अनुमानित कीमत 2022 की शुरुआत में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा था. पिछले दो साल में संपत्ति की कीमत में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है. ऐसे में अभी अनुमान लगाया जाए तो इनकी कीमत 12.5 अरब डॉलर या करीब 10,43,80 करोड़ भारतीय रुपये हो गया होगा.
नहीं चुकाते टैक्स
इन खुलासों पर प्रतिक्रिया देते हुए, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के अध्यक्ष मलिक अमजद जुबैर तिवाना ने कहा कि इन संपत्तियों से किराये की आय या पूंजीगत मूल्य पर पाकिस्तान में टैक्स का भुगतान करने के पात्र लोग अपने दायित्वों को पूरा करें. वहीं पाकिस्तान के अधिकारी संभावित टैक्स चोरी को उजागर करने और टैक्स नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयास कर रहे हैं.
बता दें नॉर्वेजियन वित्तीय आउटलेट E24 और संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) के सहयोग से, लीक हुआ डेटा 'दुबई अनलॉक' नामक एक खोजी परियोजना का हिस्सा था, जिसमें 58 देशों के 74 भागीदार शामिल थे.