
देश में पिछले कुछ समय से पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को फिर से बहाल करने की मांग ने जोर पकड़ा है. गैर-बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया है. अब केंद्र सरकार ने इसको लेकर बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने नई पेंशन स्कीम (NPS) के रिव्यू के लिए कमेटी गठित की है. कमेटी का नेतृत्व वित्त सचिव टीवी सोमनाथन करेंगे. कमेटी सरकार को सुझाव देगी क्या मौजूदा पेंशन सिस्टम में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत है या नहीं. 24 मार्च को संसद में फाइनेंस बिल पेश करने के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई पेंशन स्कीम के रिव्यू के लिए कमेटी बनाने का ऐलान किया था.
ये लोग होंगे कमेटी के सदस्य
टीवी सोमनाथन की अगुवाई में कमेटी में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के सचिव, व्यय विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी और पेंशन फंड रेगुलेटरी और डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन बतौर सदस्य शामिल होंगे. हर गैर-बीजेपी शासित राज्यों में पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने का मुद्दा उठ रहा है. हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पुरानी पेंशन को बड़ा मुद्दा बनाया था और सरकार बनने के बाद इसे लागू करने का ऐलान भी कर दिया है.
इन राज्यों ने केंद्र सरकार से किया अनुरोध
राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमचाल प्रदेश की राज्य सरकारों ने पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने के अपने फैसले के बारे में केंद्र सरकार को सूचित किया है. साथ ही एनपीएस के तहत जमा फंड को वापस करने का अनुरोध किया है. हालांकि, केंद्र सरकार पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने के पक्ष में नजर नहीं आई है. लेकिन अब उसने नई पेंशन व्यवस्था के रिव्यू के लिए कमेटी बनाई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने से सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा और आगे चलकर ये मुसीबत खड़ी कर सकता है.
क्या है OPS और NPS में अंतर?
देश में एक जनवरी 2004 से NPS यानी नई पेंशन स्कीम लागू है. पुरानी पेंशन स्कीम के तहत रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारी के वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है. क्योंकि पुरानी स्कीम में पेंशन का निर्धारण सरकारी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी और महंगाई दर के आंकड़ों के अनुसार होता है. इसके अलावा पुरानी पेंशन स्कीम में पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कोई पैसा कटने का प्रावधान नहीं है. पुरानी पेंशन योजना में भुगतान सरकार की ट्रेजरी के माध्यम से होता है.
नई पेंशन स्कीम (NPS) का निर्धारण कुल जमा राशि और निवेश पर आए रिटर्न के अनुसार होता है. इसमें कर्मचारी का योगदान उसकी बेसिक सैलरी और DA का 10 फीसदी कर्मचारियों को प्राप्त होता है. इतना ही योगदान राज्य सरकार भी देती है. एक मई 2009 से एनपीएस स्कीम सभी के लिए लागू की गई.
मार्केट पर बेस्ड है NPS
पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की करीब आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी, जबकि नई पेंशन योजना में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है. क्योंकि पुरानी पेंशन स्कीम एक सुरक्षित योजना है, जिसका भुगतान सरकारी खजाने से होता है. वहीं, नई पेंशन योजना शेयर बाजार पर आधारित है, जिसमें बाजार की चाल के अनुसार भुगतान किया जाता है.