
शुक्रवार को शेयर बाजार (Stock Market) में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखी जा रही है. इस गिरावट में सबसे बड़ा रोल M&M के शेयर का रहा है. यह शेयर 6 फीसदी से ज्यादा फिसल गया है, जिससे निफ्टी-50 में दबाव बढ़ा है. लेकिन अचानक इतना क्यों गिर गया M&M का शेयर? हर कोई यही जानना चाह रहा है.
दरअसल, तमाम ऑटो स्टॉक्स पहले से ही दबाव में हैं, लेकिन M&M की चाल बिल्कुल अलग थी. शेयर में लगातार तेजी देखी जा रही थी, क्योंकि बिक्री बढ़ रही थी. इस बीच शुक्रवार को M&M के शेयरों में 6% की तगड़ी गिरावट आई. शेयर का भाव गिरकर 2500 रुपये के करीब आ गया है. M&M के शेयर शुक्रवार दोपहर 2 बजे 6.11% गिरकर 2,665.85 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा टाटा मोटर्स के शेयर में भी 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है.
M&M के शेयर में भारी गिरावट
अगर इस बड़ी गिरावट का कारण तलाशा जाए, तो एक्सपर्ट नई ईवी पॉलिसी (New EV Policy) बता रहे हैं. खबर है कि सरकार नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा कर सकती है. यह नीति कंपनियों को कम आयात शुल्क पर सालाना 8,000 प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों का आयात करने की अनुमति देगी. हालांकि, कंपनियों को तीन साल के भीतर भारत में मैन्युफैक्चरिंग करनी होगी.
M&M समेत ऑटो सेक्टर्स के सभी स्टॉक्स में गिरावट देखे जा रहे हैं. दरअसल, टेस्ला (Tesla) जैसी ग्लोबल कंपनियां लगातार इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की मांग कर रही हैं. लेकिन अब सरकार शर्त के साथ छूट दे सकती है. सरकार चाहती है कि टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियां भारत में आएं, भारत में मैन्युफैरिंग करें और फिर शुल्क में छूट का फायदा उठाएं.
नई ईवी पॉलिसी का लाभ उठाने के लिए विदेशी कंपनियों देश में कम से कम 500 अरब डॉलर का निवेश करना होगा. कमिटमेंट के बाद शुरुआत में हर साल 8000 यानी 5 साल में करीब 40000 गड़ियों पर सिर्फ 15 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी चुकानी होगी, यानी अभी उन गाड़ियां पर 110 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी वसूल की जाती है.
ऑटो सेक्टर में दबाव के कई कारण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडस्ट्री के साथ व्यापक परामर्श के बाद नई इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति तैयार की गई है. अब कहा जा रहा है कि अगर विदेशी गाड़ियों को इंपोर्ट ड्यूटी में छूट मिलती है तो फिर घरेलू ऑटो कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है.
ऑटोशेयर में गिरावट और भी कारण हैं. अमेरिका द्वारा ऑटोमोबाइल, फॉर्मा, और सेमीकंडर्स पर संभावित 25% या उससे अधिक के टैरिफ लगाने की घोषणा ने ग्लोबल बाजार में अस्थिरता पैदा की है. इससे भारतीय ऑटो सेक्टर पर भी निगेटिव असर पड़ा है. 2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 11.75 बिलियन डॉलर की निकासी की है, जिससे बाजार में दबाव
बढ़ा है. साथ ही टाटा मोटर्स समेत कई ऑटोमोबाइल कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से खराब रहे हैं.